जेएनयू में गुरुवार को फ़िल्म 'द साबरमती रिपोर्ट' की स्क्रीनिंग के दौरान पत्थरबाज़ी की घटना सामने आई है
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि जब तक वह उपासना स्थल क़ानून मामले पर सुनवाई कर रहा है तब तक देश में कहीं और इस क़ानून को चुनौती देने वाले मामले दर्ज न किए जाएं
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बार फिर से उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पर निशाना साधा है
अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को यह एलान किया कि विधानसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी की सरकार बनने पर दिल्ली की महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये दिए जाएंगे
लाइव कवरेज
सुमंत सिंह और अभिषेक पोद्दार
नमस्कार
रात के 10 बज चुके हैं और इसी के साथ गुरुवार के लाइव पेज को विराम देने का वक़्त भी आ गया है. अब बीबीसी संवाददाता अभिषेक पोद्दार को दीजिए इजाज़त.
शुक्रवार को हम बीबीसी लाइव पेज के ज़रिए दिन भर की बड़ी ख़बरों को लेकर फिर से हाज़िर होंगे.
फ़िलहाल के लिए हमारे पेज पर मौजूद कुछ बड़ी ख़बरें हैं, जिन्हें आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं.
- सुनील पाल और मुश्ताक़ ख़ान: दो कॉमेडियन के 'अपहरण' की एक जैसी कहानी, अब तक क्या पता है? पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
- दमिश्क: सीरियाई राजधानी के इतिहास की कहानी क्या है? पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
- फ्रांस: वो 50 लोग जिन पर चल रहा ज़ीज़ेल पेलीको से रेप का मुकदमा- पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
- अर्दोआन की चाल भांपने में क्या चूक गए पुतिन? पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
जो बाइडन ने 39 अमेरिकी नागरिकों की सज़ा को किया माफ़
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इमेज कैप्शन, जो बाइडन ने अपने बेटे हंटर बाइडन की सज़ा को भी माफ़ कर दिया था.
मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अहिंसक
अपराधों के दोषी 39 अमेरिकी नागरिकों की सज़ा को माफ़ कर दिया है.
इसके अलावा जो बाइडन ने 1500 दोषियों की सज़ा को
कम भी कर दिया है. व्हाइट हाउस के मुताबिक़ तादाद के हिसाब से यह एक ही दिन में जारी
किया गया सबसे ज़्यादा क्षमादान है.
अमेरिकी संविधान राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है
कि वह महाभियोग के अलावा किए गए अपराधों के लिए राहत या माफ़ी दे सकते हैं.
इस महीने की शुरुआत में जो बाइडन ने अपने बेटे
हंटर बाइडन की सज़ा को भी माफ़ कर दिया था.
बाइडन के इस क़दम की आलोचना भी हुई थी. क्योंकि बाइडन
ने पहले अपने बेटे की सज़ा माफ़ करने से इनकार कर दिया था.
हालांकि बाद में उन्होंने यह तर्क देते हुए सज़ा
को माफ़ कर दिया कि उनके बेटे के ख़िलाफ़ मामला राजनीति से प्रेरित था.
हंटर बाइडन पर दो संघीय आपराधिक मामले चल रहे थे
और उन्हें दोषी भी क़रार दिया गया था. इसी महीने के अंत में उन्हें सज़ा भी होने
वाली थी.
हमास का दावा- इसराइली हमले में मारे गए सहायता सामग्री की सुरक्षा करने वाले 12 लोग
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इमेज कैप्शन, ग़ज़ा में मानवीय सहायता को पहुंचाने वाले ट्रक
हमास के नागरिक सुरक्षा प्राधिकरण और स्थानीय चिकित्सकों का कहना है कि ग़ज़ा
में इसराइल के ताज़ा हमले में कम से कम 35 फ़लस्तीनियों की मौत हुई है.
इनमें 12 लोग ऐसे थे जो मानवीय सहायता के लिए ग़ज़ा में आने वाले
ट्रकों या लॉरियों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी निभा रहे थे.
वहीं इसराइली सेना ने कहा है कि उन्होंने “सशस्त्र हमास आतंकवादियों” पर हमले किये थे, जो कि लॉरियों को हाईजैक करने की योजना बना रहे थे.
हमास के नागरिक सुरक्षा प्राधिकरण ने यह भी कहा है कि एक और इसराइली हमले में नुसेरात शरणार्थी शिविर के पास 15 लोग मारे गए हैं.
हमास के नागरिक सुरक्षा प्राधिकरण के प्रवक्ता महमूद बसल ने समाचार एजेंसी एएफ़पी
को बताया कि इसराइल ने एक बार फिर सहायता ट्रकों की
सुरक्षा करने वालों को निशाना बनाया.
उन्होंने कहा कि इन हमलों में लगभग 30 लोग घायल भी हुए हैं, जिनमें से अधिकांश बच्चे
हैं.
जेएनयू में फ़िल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की स्क्रीनिंग के दौरान हुई पत्थरबाज़ी
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इमेज कैप्शन, जेएनयू के छात्र संघ अध्यक्ष धनंजय कुमार ने घटना के लिए एबीवीपी को ज़िम्मेदार ठहराया
दिल्ली स्थित जवाहर लाल
नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू)
में गुरुवार को फ़िल्म ‘द साबरमती रिपोर्ट’ की स्क्रीनिंग के दौरान पत्थरबाज़ी की घटना सामने आई
है.
इस बारे में जेएनयू के
छात्र संघ अध्यक्ष धनंजय ने बीबीसी से बात की. उन्होंने छात्र संगठन एबीवीपी को इस
घटना का ज़िम्मेदार ठहराया है.
धनंजय ने कहा, “एक फ्लॉप फ़िल्म की स्क्रीनिंग के दौरान एबीवीपी ने खुद ही पत्थरबाज़ी की है.
ये एक प्रोपेगेंडा फ़िल्म है और ये सिनेमाघरों में फ्लॉप रही. हाल के समय में
जेएनयू को ऐसी जगह बनाने की कोशिश हो रही है जहां से इस तरह की फ़िल्मों की
स्क्रीनिंग कराई जाती है ताकि मीडिया में इसकी बात हो.”
उन्होंने कहा कि लेफ़्ट ने इस फ़िल्म की स्क्रीनिंग के ख़िलाफ़ पर्चा
ज़रूर निकाला था.
साल
2024 में धनंजय ने यूनाइटेड लेफ़्ट की तरफ़ से जेएनयू छात्र संघ का चुनाव जीता था
और अध्यक्ष बने थे. यूनाइटेड लेफ़्ट में एनएसयूआई और एसएफ़आई जैसे छात्र संगठन
शामिल हैं.
वहीं, जेएनयू में पीएचडी के छात्र और एबीवीपी के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक अंबुज मिश्र ने कहा, “इसमें कुछ लोग घायल हैं. साबरमती
हॉस्टल की तरफ़ से पत्थर फेंके गए थे. किसी को गंभीर चोट नहीं आई है. लेकिन चोटें
लगी हैं. यूनाइटेड लेफ़्ट ने इस फ़िल्म की स्क्रीनिंग के ख़िलाफ़ सुबह पर्चा भी
निकाला था.”
जेएनयू एबीवीपी ने भी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स
पर घटना के बारे में पोस्ट लिखी है.
अपनी पोस्ट में जेएनयू एबीवीपी ने लिखा, "एबीवीपी ने जेएनयू में साबरमती ढाबे पर ‘द साबरमती रिपोर्ट’ फ़िल्म
की स्क्रीनिंग कराई, वामपंथियों ने फ़िल्म देख रहे छात्रों पर पत्थर फेंके, पत्थरबाजी की और पोस्टर फाड़े. सुबह एसएफ़आई ने प्रेस रिलीज़ निकालकर
स्क्रीनिंग का विरोध किया था. गोधरा की सच्चाई न 20 साल पहले इन्हें पची थी न आज पच रही है."
‘द साबरमती रिपोर्ट’में विक्रांत मेसी और राशि खन्ना
जैसे कलाकारों ने मुख्य भूमिका निभाई है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने
भी राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा समेत कई नेताओं के साथ यह फ़िल्म देखी थी.
डोनाल्ड ट्रंप को टाइम मैगज़ीन ने चुना साल 2024 का पर्सन ऑफ़ द ईयर
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इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप को 2016 में पहली बार टाइम मैगज़ीन ने पर्सन ऑफ़ द ईयर चुना था
दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित
पत्रिकाओं की फ़ेहरिस्त में शामिल टाइम मैगज़ीन ने डोनाल्ड ट्रंप को अपना 'पर्सन
ऑफ़ द ईयर' 2024 चुना है.
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दूसरी बार टाइम मैगज़ीन के पर्सन ऑफ़ द ईयर चुने गए हैं.
डोनाल्ड ट्रंप को पहली बार 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद पर्सन
ऑफ़ द ईयर चुना गया था.
टाइम मैगज़ीन के
एडिटर-इन-चीफ़ सैम जैकब्स ने पत्रिका के पाठकों के लिए लिखे पत्र में कहा, “ऐतिहासिक रूप से वापसी करने
वाले, अमेरिकी राष्ट्रपति पद को नया आकार देने और दुनिया में अमेरिका की भूमिका को
बदलने के लिए, डोनाल्ड ट्रंप टाइम के 2024 के पर्सन ऑफ़ द ईयर हैं."
टाइम मैगज़ीन साल 1927 से ही हर साल पर्सन ऑफ़ द ईयर चुनती है. इसमें किसी ऐसे व्यक्ति को शामिल किया जाता है जिसने उस साल अपने
अच्छे या बुरे कामों से दुनिया को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया हो या वैश्विक
घटनाओं पर सबसे बड़ा असर डाला हो.
उपासना स्थल क़ानून के फ़ैसले पर अजमेर दरगाह कमेटी के सचिव ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, अजमेर दरगाह अंजुमन कमेटी के सचिव सरवत चिश्ती ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया दी है
गुरुवार को सुप्रीम
कोर्ट ने उपासना स्थल क़ानून पर एक अहम आदेश दिया.
अपने आदेश में
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक वह इस मामले पर
सुनवाई कर रहा है तब तक देश में कहीं और इस क़ानून को चुनौती देने वाले मामले दर्ज
न किए जाएं.
सुप्रीम कोर्ट के इस
आदेश का अजमेर दरगाह अंजुमन कमेटी के सचिव सरवत चिश्ती ने स्वागत किया है.
उन्होंने कहा, यह एक स्वागत योग्य आदेश है और न्याय प्रणाली में हमारा विश्वास फिर से बहाल हुआ है. निचली अदालतों के जो फ़ैसले आ रहे थे उसने न्याय प्रणाली पर सवालिया
निशान खड़े किए थे.
सरवत चिश्ती ने कहा, “कोर्ट में हमारी आस्था इसलिए होती
है कि वहां से हमें इंसाफ़ मिलेगा. लेकिन संभल में निचली अदालत ने एक ही दिन में
कमीशन बना दिया और वहां सर्वे भी हो गया जिसमें लोगों की जान चली गई.”
अजमेर दरगाह के मामले पर उन्होंने कहा, “अजमेर में ख़्वाजा मोइनुद्दीन
चिश्ती की दरगाह जो कि भारत के और इसके धर्मनिरपेक्ष विचारों को बढ़ावा देती है उसके
केस को कोर्ट में दाख़िल कर लिया गया. इससे करोड़ों लोगों के दिलों को ठेस पहुंची.”
उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट उपासना
स्थल क़ानून 1991 को लागू करेगा. ताकि जगह-जगह जो खुदाई अभियान चल रहा है, जिससे हिंदू और मुसलमानों के
बीच विवाद बढ़ रहा है, उस पर रोक लगे.”
गुकेश डी ने रचा इतिहास, बने दुनिया के सबसे युवा वर्ल्ड चेस चैंपियन
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इमेज कैप्शन, गुकेश ने चीन के ग्रैंड मास्टर को हराया
भारतीय शतरंज खिलाड़ी गुकेश डी दुनिया के सबसे कम उम्र के वर्ल्ड चेस चैंपियन
बने हैं.
गुकेश ने वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए सिंगापुर में खेले गए मैच में चीन के
ग्रैंड मास्टर डिंग लिझेन को हराया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, भारत के 18 वर्षीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश ने चीन के ग्रैंड मास्टर को 14वीं और अंतिम बाज़ी में हराया.
वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद गुकेश ने कहा, "हम सब जानते हैं कि डिंग (लिझेन) कौन हैं. वह कई साल से शतरंज की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं. मेरे लिए वह असली वर्ल्ड चैंपियन हैं.
चैंपियनशिप में आने से पहले वो शायद शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट नहीं थे, लेकिन वह हर बाज़ी में सच्चे चैंपियन की तरह लड़े और मुझे डिंग और उनकी टीम के लिए अफ़सोस है."
हालांकि गुकेश के चीनी प्रतिद्वंद्वी डिंग लिझेन ने भी हारने के बावजूद एक
रिकॉर्ड बनाया है.
अंतरराष्ट्रीय चेस फ़ेडरेशन के मुताबिक़, डिंग लिझेन ने अपनी एक चाल चलने
के लिए 18
मिनट और 30 सेकंड का वक़्त लिया. यह अभी तक किसी भी खिलाड़ी का लिया गया सबसे लंबा
वक़्त भी है.
हार के बाद चीन के ग्रैंड मास्टर डिंग लिझेन ने कहा, “मैच के दौरान मुझे यह पता चला कि
मैंने एक बड़ी ग़लती कर दी है. इसके बाद मैं पूरी तरह से सदमे में चला गया था.”
हाथरस गैंगरेप केस : पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद क्या बोले राहुल गांधी
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इमेज कैप्शन, राहुल गांधी गुरुवार को उत्तर प्रदेश के हाथरस पहुंचे
लोकसभा में विपक्ष के नेता
राहुल गांधी गुरुवार को उत्तर प्रदेश के हाथरस पहुंचे.
हाथरस में उन्होंने साल
2020 में कथित गैंगरेप के बाद जान गंवाने वाली दलित युवती के परिवार से मुलाक़ात
की थी.
राहुल की पोस्ट के अनुसार
पीड़ित परिवार के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है. उन्हें हर समय बंदूक और कैमरों की निगरानी में रखा जाता है.
राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार पर
भी निशाना साधा. उन्होंने लिखा है कि बीजेपी सरकार ने पीड़ित परिवार से जो वादे
किए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए हैं. न तो सरकारी नौकरी दी गई है और न ही उन्हें किसी
दूसरी जगह घर देकर शिफ्ट करने का वादा पूरा किया गया है.
राहुल के मुताबिक़, पीड़ित परिवार को न्याय
देने के बजाय, सरकार उन पर तरह-तरह से अत्याचार कर रही है. दूसरी तरफ़ आरोपी खुलेआम घूम रहे
हैं.
अपनी पोस्ट में उन्होंने
लिखा, '' हाथरस जाकर चार साल पहले हुई शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण घटना के पीड़ित परिवार से मिला.
मुलाक़ात के दौरान उन्होंने जो बातें बताई उसने मुझे झकझोर कर रख दिया. पूरा परिवार आज भी
डर के साए में जी रहा है.”
राहुल गांधी ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने
के लिए उनके साथ पूरी ताकत से खड़े रहने की बात की है.
हाथरस में सितंबर 2020 में एक दलित युवती के साथ
कथित तौर पर गैंगरेप का मामला सामने आया था. इसके बाद युवती की मौत हो गई थी.
उस समय भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने
पीड़िता के परिवार से मुलाकात की थी और कहा था कि वो पीड़ित परिवार को न्याय
दिलाने के लिए लड़ेंगे.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने फिर उपराष्ट्रपति पर साधा निशाना, क्या कहा
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इमेज कैप्शन, कांग्रेस अध्यक्ष ने 10 बिंदुओं में उपराष्ट्रपति पर फिर निशाना साधा है
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक बार फिर से उपराष्ट्रपति जगदीप
धनखड़ पर निशाना साधा है.
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी एक एक्स पोस्ट में उपराष्ट्रपति को निशाने पर लेते
हुए लिखा, "निष्पक्षता की परंपरा आपके (राज्यसभा के सभापति) कार्यकाल में पूरी तरह से खंडित हो गई."
उन्होंने यह भी लिखा है कि विपक्ष का गला घोंटना अब राज्यसभा में
संसदीय प्रक्रिया का नियम भी बन गया है.
बता दें कि उपराष्ट्रपति ही राज्यसभा के सभापति भी होते हैं. कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने उपराष्ट्रपति के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है.
कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक़, राज्यसभा में संसद की मर्यादाओं तथा नैतिकता आधारित
परंपराओं का हनन अब दिनचर्या बन गई है और प्रजातंत्र को कुचलने तथा सत्य को पराजित
करने की कोशिश लगातार जारी है.
साथ ही मल्लिकार्जुन खड़गे ने कुछ बिंदुओं को देश के समक्ष उठाने की बात कही
है.
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इमेज कैप्शन, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
क्या हैं वे बिंदु
- उपराष्ट्रपति राज्यसभा में विपक्ष को लगातार टोकते हैं और अपनी बात पूरी करने
का मौक़ा नहीं देते हैं. वह सत्ता पक्ष के सांसदों, मंत्रियों और प्रधानमंत्री को कुछ भी कहने देते हैं. जबकि
विपक्ष पर अपनी बात को सुबूतों के आधार पर प्रमाणित करने को कहा जाता है और ऐसा नहीं करने पर कार्यवाही करने की धमकी दी जाती है.
- उपराष्ट्रपति ने अपने अधिकारों का ग़लत इस्तेमाल किया है और कई बार बड़ी
संख्या में विपक्षी सांसदों को सस्पेंड किया है. साथ ही वो सदन के बाहर भी
विपक्षी नेताओं की आलोचना कर चुके हैं.
- उपराष्ट्रपति भाजपा की दलीलों को दोहराते हैं. वह पद पर रहते हुए आरएसएस की
तारीफ़ भी करते हैं. जो कि संसदीय परंपरा और संविधान की भावना के ख़िलाफ़ है.
- वह मनमाने ढंग से विपक्षी सदस्यों के भाषणों को संसद के रिकॉर्ड से हटवा देते
हैं. जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों की बेहद आपत्तिजनक बातों को भी रिकॉर्ड पर रहने
देते हैं.
- सभापति के कार्यकाल के दौरान संसद टेलीविजन का कवरेज बिल्कुल एकतरफ़ा है.
ज़्यादातर समय केवल सत्ता पक्ष के लोग दिखाए जाते हैं. विपक्ष के किसी भी आंदोलन
को ब्लैकआउट कर देते हैं.
- सभापति ने कई फैसले बिल्कुल मनमाने ढंग से लिए हैं.
- विपक्षी सदस्यों को मंत्रियों के स्टेटमेंट पर अब सवाल नहीं पूछने देते है.
टीएमसी सांसद ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के ख़िलाफ़ दिया विशेषाधिकार हनन का नोटिस
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इमेज कैप्शन, सागरिका घोष चाहती हैं कि किरेन रिजिजू माफ़ी मांगें
तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने संसदीय कार्यमंत्री किरेन
रिजिजू के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है.
सागरिका घोष ने किरेन रिजिजू पर सदन को सही से चलाने की ज़िम्मेदारी का उल्लंघन
करने और विपक्ष का अपमान करने का आरोप भी लगाया है.
टीएमसी राज्यसभा सांसद ने कहा, “बुधवार को किरेन रिजिजू ने सदन में विपक्ष की ओर देखते हुए
कहा था कि आप लोग सदन में बैठने के लायक नहीं हैं. अगर इस तरह का बयान संसदीय कार्य मंत्री देते हैं तो वे अपने पद का
ग़लत इस्तेमाल कर रहे हैं.”
सागरिका घोष ने कहा कि उन्होंने इसीलिए विशेषाधिकार हनन
का प्रस्ताव दिया है, जिसे विपक्ष के सभी दिग्गज नेताओं और पार्टियों ने साइन किया
है. वह चाहती हैं कि किरेन रिजिजू माफ़ी मांगें और उनके बयान को संसद के रिकॉर्ड से
हटाया जाए.
शीतकालीन सत्र में कई बार सदन की कार्यवाही बाधित हो
चुकी है और उसे स्थगित भी करना पड़ा है.
जहां विपक्षी पार्टियां इसके लिए सत्ताधारी बीजेपी को
दोषी ठहरा रही है तो वहीं बीजेपी का कहना है कि विपक्षी पार्टियां हंगामा करके सदन
को चलने नहीं देना चाहती हैं.
ब्रेकिंग न्यूज़, उपासना स्थल क़ानून से जुड़ा मामला, सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक निचली अदालतों को सर्वे समेत कोई भी आदेश देने से रोका, उमंग पोद्दार, बीबीसी संवाददाता
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उपासना स्थल क़ानून के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फ़ैसला सुनाया है.
शीर्ष न्यायालय ने आदेश दिया है कि जब तक वह इस मामले पर सुनवाई कर रहा है तब तक देश में कहीं और इस क़ानून को चुनौती देने वाले मामले दर्ज न किए जाएं.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "चूंकि ये मामला इस न्यायालय के तहत विचाराधीन है, इसलिए हम ये उचित मानते हैं कि कोई नया मामला दर्ज ना किया जाए. कोई नया केस दर्ज नहीं किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई तक किसी अदालत में लंबित मामलों में कोई प्रभावी अंतरिम या फाइनल आदेश न पारित किया जाए. इसमें सर्वे का आदेश भी शामिल है."
साथ ही केंद्र से इस बारे में हलफ़नामा दाख़िल करने के लिए भी कहा गया है.
उपासना स्थल क़ानून कहता है कि भारत में 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस स्वरूप में था, उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है.
याचिकाकर्ता अश्वनी उपाध्याय की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी और कई अन्य वकीलों ने कहा कि दोनों पक्षों को सुने बिना कोर्ट को आदेश नहीं पारित करना चाहिए. हालांकि, चीफ़ जस्टिस संजीव ख़न्ना ने कहा कि वो इस क़ानून की संवैधानिक वैधता, इसकी रूपरेखा और दायरे का विश्लेषण कर रहे हैं, इसलिए उन्हें देशभर में लंबित मुकदमों की सुनवाई पर रोक लगानी होगी.
टीएमसी सांसद ने लोकसभा में लिखित माफ़ी मांगी, ज्योतिरादित्य सिंधिया पर टिप्पणी से जुड़ा मामला
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इमेज कैप्शन, कल्याण बनर्जी बुधवार को लोकसभा में ज्योतिरादित्य सिंधिया पर टिप्पणी की थी
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को बताया कि
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर दी अपनी
टिप्पणी के लिए लिखित में माफ़ी मांग ली है.
गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही शुरू
हुई सत्ता पक्ष के सांसदों ने कल्याण बनर्जी की टिप्पणी के मुद्दे को उठाया.
इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने लिखित माफ़ी की
जानकारी देते हुए कहा, "कल सदन में जो कुछ
भी हुआ वो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और किसी भी सदस्य, विशेष रूप से महिलाओं पर टिप्पणी नहीं करना चाहिए. ये सदन
की गरिमा, मर्यादा के अनुरूप नहीं है."
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, "किसी भी व्यक्तिगत टिप्पणी करने से बचना चाहिए.
सहमति-असहमति, सकारात्मक व्यंग्य
भी हुए हैं यहां लेकिन कोई विशेष टिप्पणी, संसदीय मर्यादा के अनुकूल नहीं है. माननीय सदस्य ने भी इस संबंध में क्षमा
मांग ली है और लिखित में मुझे दे दिया है."
बुधवार को टीएमसी सांसद ने कल्याण बनर्जी ने
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद सत्ता पक्ष लगातार विरोध जताता रहा. इसके बाद कल्याण बनर्जी ने माफ़ी भी मांगी थी.
वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था,
"निजी तौर पर मुझ पर और भारत की महिलाओं पर जो
टिप्पणी की गई है उसके लिए मैं माफ़ी स्वीकार नहीं करूंगा."
असद की सत्ता के खात्मे के बाद सीरिया में इसराइली हमलों पर पाकिस्तान ने क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, सीरिया में बशर अल-असद के अपदस्थ होने के बाद से ही इसराइल ने उसके कई इलाकों में हवाई हमले शुरू कर दिए थे
सीरिया में बशर अल-असद की सत्ता के पतन के बाद से जारी इसराइली कार्रवाई पर पाकिस्तान ने गहरी चिंता जताई है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ज़हरा बलोच ने कहा है कि सीरिया के ख़िलाफ़ इसराइली आक्रामकता और सीरियाई क्षेत्र पर अवैध रूप से अपने कब्ज़े में लेने की इसराइली कार्रवाई से उनका मुल्क़ 'बेहद चिंतित' है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सीरियाई क्षेत्र में इसराइल ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है और उसके कई नागरिक और सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है.
दरअसल बीते रविवार बशर अल-असद को अपदस्थ किए जाने के बाद इसराइली सैनिक 1973 में हुई मिडिल ईस्ट वॉर के बाद बने डिमिलिटराइज़्ड ज़ोन में घुसने लगे थे. इसराइल ने इसे अपनी सीमा को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया कदम बताया है.
इसराइली सेना ने दावा किया है कि उन्होंने अब तक सीरिया पर 350 से अधिक हवाई हमले किए हैं.
केजरीवाल ने किया वादा- विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली की महिलाओं को मिलेंगे 2100 रुपये
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इमेज कैप्शन, महिला सम्मान योजना का एलान करते अरविंद केजरीवाल साथ में मुख्यमंत्री आतिशी
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार
को एक जनसभा के दौरान यह एलान किया कि विधानसभा चुनाव के बाद उनकी पार्टी की सरकार बनने पर दिल्ली की महिलाओं को
हर महीने 2100 रुपये दिए जाएंगे.
महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली इस योजना का नाम ‘महिला सम्मान योजना’ है.
फ़िलहाल के लिए दिल्ली सरकार ने महिलाओं के लिए इस योजना
के तहत हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता के प्रस्ताव को पास कर दिया है.
हालांकि विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र अभी यह रकम महिलाओं के खाते में जमा नहीं की
जाएगी.
केजरीवाल ने कहा, “मुझे यह एलान करते हुए फ़ख़्र हो
रहा है कि आतिशी की अध्यक्षता में दिल्ली सरकार की कैबिनेट मीटिंग में यह प्रस्ताव
पारित किया गया.”
हर महीने के 2100 रुपये दिए जाने के बारे में अरविंद केजरीवाल ने कहा, "मेरे
पास इस योजना के काम के दौरान कई महिलाएं आईं और उन्होंने कहा कि महंगाई बहुत
ज़्यादा हो गई है हज़ार रुपये काम नहीं चलेगा. तो मैं यह एलान कर रहा हूं कि कल से
रजिस्ट्रेशन शुरू होगा और वह 2100 रुपये के लिए होगा."
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा, "जैसे मैंने बिजली फ़्री कर दी
वैसे ही मैं 2100 रुपये लागू कर दूंगा. अगर कोई पूछे कि यह पैसा कहां से आएगा, कह
देना कि हमारा केजरीवाल जादूगर है छड़ी घुमाएगा और पैसे ले आएगा."
प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “अगले दो-तीन दिन में आम आदमी
पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाएंगे. आप अपना रजिस्ट्रेशन कराइए. वो आपको एक कार्ड
देकर आएंगे. आप उसे संभाल कर रखें और चुनाव के बाद एक हज़ार रुपये की योजना बदल कर 2100
रुपये की कर दी जाएगी.”
सीरियाई विद्रोहियों ने असद शासन की 'बदनाम जेलों' को बंद करने का वादा किया, सोफ़िया फ़ेरेरा और बारबरा प्लेट-अशर, बीबीसी न्यूज़
इमेज स्रोत, Reuters
इमेज कैप्शन, सैडनाया जेल से रविवार को हज़ारों क़ैदियों के रिहा किया गया
सीरियाई विद्रोही बलों ने कहा है कि वे पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन के दौरान चलाई जाने वाले बदनाम जेलों को बंद करने की योजना बना रहे हैं.
साथ ही उन लोगों की भी तलाश होगी जो यहां बंद कैदियों की हत्या या उन्हें प्रताड़ित करने में शामिल थे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने विद्रोही नेता अहमद अल-शारा, जिन्हें मोहम्मद अल-जुलानी के नाम से भी जाना जाता है, का एक बयान देखा है, जिसके मुताबिक़ पूर्व सरकार में गठित की गई सुरक्षा बलों को भी अब ख़त्म किया जाएगा.
बशर अल-असद के अपदस्थ होने के बाद सेडनाया जेल से रिहा हुए हज़ारों क़ैदियों के वीडियो काफ़ी चर्चा में रहे. इस जेल को मानवाधिकार समूह 'कसाईख़ाना' कहते थे.
यूके स्थित मॉनिटरिंग ग्रुप सीरियन ऑब्ज़रवेटरी फॉर ह्यमून राइट्स ने कहा है कि असद शासन में करीब 60 हज़ार लोगों को जेलों में यातनाएं दी गईं और उनकी हत्या हुई.
जुलानी की अगुवाई वाले इस्लामी गुट हयात तहरीर अल-शाम (एचटीएस) के साथ अन्य विद्रोही गुटों ने बशर अल-असद को राष्ट्रपति के पद से अपदस्थ किया.
सीरिया की राजधानी दमिश्क पर विद्रोहियों के कब्ज़े के बाद असद रूस चले गए और वहां उन्हें और उनके परिवार को शरण दी गई है.
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ब्रेकिंग न्यूज़, छत्तीसगढ़ पुलिस का दावा- नारायणपुर में मुठभेड़ के दौरान सात माओवादियों की मौत, आलोक पुतुल, रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए
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इमेज कैप्शन, ये मुठभेड़ ऐसे समय हुई है, जब तीन दिन बाद गृहमंत्री अमित शाह बस्तर पहुंचने वाले हैं (सांकेतिक तस्वीर)
छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित नारायणपुर में
पुलिस ने एक मुठभेड़ में सात संदिग्ध माओवादियों के मारे जाने का दावा किया है.
पुलिस ने मारे गए माओवादियों की संख्या बढ़ने से इनकार नहीं किया है.
इस मुठभेड़ के बारे में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, "नक्सली ऑपरेशन में सात नक्सलियों को मार गिराने में हमारे सुरक्षा बल के जवान सफल हुए हैं."
ये मुठभेड़ ऐसे समय हुई है,
जब तीन दिन बाद गृहमंत्री अमित शाह बस्तर
पहुंचने वाले हैं.
बस्तर के आईजी सुंदरराज पी के अनुसार, “नक्सल विरोधी सर्च अभियान में 10 दिसंबर को नारायणपुर, दंतेवाड़ा, जगदलपुर, कोंडागांव जिले की डीआरजी के साथ एसटीएफ़ और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम दक्षिण अबूझमाड़
क्षेत्र में रवाना हुई थी. आज सुबह 3 बजे से संयुक्त सुरक्षा बलों की टीम और नक्सलियों के बीच रुक-रुक कर मुठभेड़
जारी है. सर्च ऑपरेशन के दौरान अब तक सात वर्दीधारी नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं.”
पुलिस के अनुसार इस ऑपरेशन में एक हज़ार से
अधिक जवान शामिल हैं. पुलिस के अनुसार मुठभेड़ और सर्च अभियान अब तक जारी है.
पुलिस अधिकारियों ने इस मुठभेड़ में सीपीआई
माओवादी के सेंट्रल कमेटी के सदस्य के भी मारे जाने की आशंका जताई है. हालांकि
मारे जाने वाले संदिग्ध माओवादियों की अंतिम रूप से पहचान नहीं हो पाई है.
छत्तीसगढ़ में माओवादियों के ख़िलाफ़ पुलिस
लगातार अभियान चला रही है. इस साल अब तक पुलिस ने मुठभेड़ में 215 से अधिक माओवादियों के मारे जाने का दावा किया
है. छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने के बाद से अब तक की यह सबसे बड़ी संख्या है.
इसराइल का दावा- सीरिया की 70-80 फ़ीसदी सैन्य संपत्ति नष्ट की, योलांद नेल, बीबीसी न्यूज़
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इमेज कैप्शन, इसराइल ने कहा है कि उसने सीरियाई सैन्य ठिकानो को निशाना बनाया है
इसराइली डिफेंस फोर्स (आईडीएफ़) ने दावा किया है कि उसने सीरिया की राजधानी दमिश्क और लताकिया के बीच सीरियाई सेना की 70 से 80 फीसदी संपत्ति को नष्ट कर दिया है.
आईडीएफ़ ने कहा कि उसकी वायु सेना और नौसेना ने मिलकर शनिवार रात से अब तक सीरिया में 350 से ज़्यादा हमले किए हैं.
इन हमले के जरिए दमिश्क
और लताकिया के बीच 70 से 80 फ़ीसदी रणनीतिक सैन्य संपत्तियों को नष्ट किया गया है. इनमें लड़ाकू विमान, रडार और एयर डिफेंस
साइट्स, नौसेना के जहाज़ और हथियारों के ठिकाने शामिल
हैं.
इसराइली रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने कहा,
"बीती रात इसराइली नौसेना ने सीरियाई नौसेना के
बेड़े पर सफल हमला किया और उसे नष्ट कर दिया."
इसराइल की सेना सीरिया के गोलान हाइट्स
से सीरिया के असैन्यीकृत बफ़र ज़ोन की ओर आगे बढ़ी है.
कात्ज़ ने बताया कि उन्होंने आईडीएफ़ से कहा है
कि वो "दक्षिण सीरिया में एक ऐसा क्षेत्र स्थापित करे जो हथियारों और
आतंकवादी ख़तरों से मुक्त हो और वहां इसराइल की मौजूदगी ना हो."
सीरिया में बशर अल-असद की सत्ता जाने के बाद
इसराइल लगातार सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा है. उसका कहना है कि वह ये हमले
सीरियाई सेना के हथियारों को विद्रोहियों हाथों में जाने से रोकने के लिए कर रहा
है.
वर्तमान में सीरिया में विद्रोहियों की सरकार
है. इस अंतरिम सरकार का प्रधानमंत्री मोहम्मद अल-बशीर को बनाया गया है.
राहुल गांधी हाथरस में चार साल पहले कथित गैंगरेप के बाद जान गंवाने वाली पीड़िता के परिवार से मिले
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इमेज कैप्शन, राहुल गांधी ने हाथरस में साल 2020 में कथित गैंगरेप के बाद जान गंवाने वाली दलित युवती के परिवार से मुलाक़ात की.
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के हाथरस पहुंचे. यहां उन्होंने साल 2020 में कथित गैंगरेप के बाद जान गंवाने वाली दलित युवती के परिवार से मुलाक़ात की.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ राहुल गांधी
सुबह 11.15 बजे हाथरस के बूलगढ़ी गांव पहुंचे. उनकी इस
यात्रा के मद्देनज़र उत्तर प्रदेश पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की.
राहुल गांधी के दौरे को लेकर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा, "राहुल गांधी को पता ही नहीं है कि हाथरस में सीबीआई ने जांच कर ली है और मामला अदालत में चल रहा है."
उन्होंने कहा, "राहुल गांधी उत्तर प्रदेश को अराजकता और दंगों की आग में झोंकना चाहते हैं, लोगों को भड़काना चाहते हैं."
हाथरस में सितंबर 2020 में एक दलित युवती के साथ कथित तौर पर गैंगरेप के बाद उनकी
मौत हो गई थी.
उस समय भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने
पीड़िता के परिवार से मुलाकात की थी और कहा था कि वो पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए लड़ेंगे.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, 19 वर्षीय युवती के साथ 14 सितंबर 2020 को कथित तौर पर गैंगरेप हुआ. उन्हें पहले इलाज के लिए अलीगढ़ भेजा गया और फिर दिल्ली, जहां 29 सितंबर 2020 को उनकी मौत हो गई.
हालांकि, 30 अक्तूबर 2020 को सुबह-सुबह युवती का अंतिम संस्कार कर दिया गया. उनके परिवार ने स्थानीय पुलिसवालों पर अंतिम संस्कार के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया. हालांकि, पुलिस ने इस दावे को ख़ारिज किया और कहा कि अंतिम संस्कार परिवार की इच्छा के अनुसार हुआ.
शुरुआती जाँच के बाद ये मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था. मामले में चारों अभियुक्तों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल कर दी गई है.
वीएचपी के कार्यक्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज की टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, जस्टिस शेखर यादव ने विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी के मुद्दे पर कहा था कि हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक के अनुसार ही देश चलेगा
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस शेखर यादव की वीएचपी के एक कार्यक्रम के दौरान की गई टिप्पणी को बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जायज़ ठहराया है.
जस्टिस शेखर यादव ने विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रम में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी के मुद्दे पर कहा था कि हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यक के अनुसार ही देश चलेगा.
जस्टिस शेखर यादव का कहना था कि एक से ज़्यादा पत्नी रखने, तीन तलाक़ और हलाला के लिए कोई बहाना नहीं है और अब ये प्रथाएं नहीं चलेंगी.
इस कार्यक्रम में दिए उनके बयान पर विवाद हुआ और अब विपक्षी दल मौजूदा संसद सत्र के दौरान जस्टिस शेखर यादव पर चर्चा चाहते हैं. विपक्षी दलों ने जस्टिस शेखर यादव के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने संबंधी नोटिस पर भी साइन किए हैं. इसी से जुड़ा सवाल केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से भी किया गया.
इसके जवाब में उन्होंने कहा, "न्यायाधीश शेखर यादव जी ने जो बयान दिया है वो 200 प्रतिशत सही है. इसमें ये देखने की ज़रूरत है कि वो कहां (बयान) दे रहे थे, किस मंच पर थे. वो विश्व हिंदू परिषद के मंच पर थे. वो एक सही मंच था.माननीय न्यायाधीश महोदय शेखर यादव जी ने कोई कोर्ट में ऐसी बात नहीं कही है."
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट से जानकारी मांगी है.