टीम इंडिया का टॉप ऑर्डर क्यों हो रहा फ़्लॉप, बल्लेबाज़ी में क्या हैं दिक्कतें?

रोहित शर्मा और विराट कोहली

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, भारतीय क्रिकेट टीम को दूसरे टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने हरा दिया था
    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, ब्रिसबेन, गाबा से, बीबीसी हिंदी के लिए

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एडिलेड टेस्ट मैच तीसरे दिन के पहले सत्र में ही ख़त्म हो गया था. बचे हुए दो दिनों में टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज़ नैट प्रैक्टिस करते दिखे.

तीन घंटे के इस अभ्यास सत्र के दौरान एक अनूठा दृश्य देखने को मिला जब केएल राहुल नैट्स के बीच बल्लेबाज़ी कर रहे थे और उनके दाईं ओर विराट कोहली और रोहित शर्मा, तो बाईं ओर यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल बल्लेबाज़ी कर रहे थे.

टीम इंडिया, जो इस समय बदलाव के दौर से गुज़र रही है, उसके लिए ये तस्वीर बहुत कुछ कह रही थी. कोहली और रोहित जहां पुरानी पीढ़ी के दिग्गज हैं, वहीं राहुल ना तो गिल-जायसवाल की तरह युवा हैं और ना ही कोहली-रोहित की तरह स्थापित दिग्गज.

वो इस बदलाव को महसूस करने वाले शायद ऋषभ पंत के बाद दूसरे बल्लेबाज़ हैं. इस अभ्यास को गंभीर नज़रों से देख रहे थे हेड कोच गौतम गंभीर, जो अंपायर वाली भूमिका निभाते हुए गेंदबाज़ों के छोर पर खड़े थे. शनिवार से शुरू हो रहे ब्रिसबेन टेस्ट में एक बार फिर निगाहें भारतीय बल्लेबाज़ों पर होंगी.

बीबीसी हिंदी का व्हाट्सऐप चैनल
इमेज कैप्शन, बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
ये भी पढ़ें-

उस दौर की वापसी फिर न हो

सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़

इमेज स्रोत, Hindustan Times via Getty Images

इमेज कैप्शन, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की मशहूर तिकड़ी को भी 2011 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मुश्किलों का सामना करना पड़ा था

गौतम गंभीर ने अपने दौर में देखा है कि 2011 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण की मशहूर तिकड़ी टूट गई थी और उसके बाद कोहली-पुजारा-रहाणे-रोहित का दौर शुरू हुआ.

गंभीर और टीम इंडिया नहीं चाहेंगे कि 2024-25 में भारतीय बल्लेबाज़ी को उसी संघर्ष का सामना करना पड़े, जैसा उन्हें 2011-2012 में झेलना पड़ा था.

लेकिन भारतीय बल्लेबाज़ों को लगातार मुश्किल हालात में बिखरते देख ऐसा लगता है कि अगर इस दौरे पर उन्होंने सुधार नहीं किया, तो चयनकर्ता अजीत अगरकर को भविष्य के लिए कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं.

राहत की बात ये है कि ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद अगले छह महीने तक टीम इंडिया को टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलना है.

जडेजा बनाम टॉप ऑर्डर

रविंद्र जडेजा, विराट कोहली और रोहित शर्मा

इमेज स्रोत, AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, भारतीय क्रिकेट टीम ने रविंद्र जडेजा को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ दोनों टेस्ट मैच में जगह नहीं दी

अगर आपको ये बताया जाए कि जिस रविंद्र जडेजा को टीम इंडिया ने पर्थ और एडिलेड में जगह नहीं दी, उनका बल्लेबाज़ी औसत पिछले तीन सालों में टॉप ऑर्डर के एक या दो नहीं बल्कि तीन-तीन धाकड़ बल्लेबाज़ों से बेहतर है, तो आप चौंक जाएंगे!

ये सच है कि टेस्ट क्रिकेट में जडेजा का औसत ना सिर्फ एक सिरीज़ या एक साल बल्कि पिछले तीन सालों में रोहित शर्मा, शुभमन गिल और यहां तक कि विराट कोहली से भी बेहतर है.

कोहली ने पर्थ में शतक लगाकर ऑस्ट्रेलिया में अपनी शानदार साख को बनाए रखा है, वहीं गिल ने उपयोगी पारियां खेली हैं.

लेकिन, जिस तरह गाबा में उन्होंने पिछली बार 91 रनों की शानदार पारी खेली थी, उसी तरह की एक निर्णायक पारी की उम्मीद हर किसी को उनसे है.

बैटिंग चिंता का सबब

यशस्वी जायसवाल और ऋषभ पंत

इमेज स्रोत, Cricket Australia via Getty Images

इमेज कैप्शन, भारतीय टॉप ऑर्डर का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है.

न्यूज़ीलैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज़ (जहां 0-3 से हार हुई) से लेकर पर्थ और एडिलेड टेस्ट तक, भारतीय टॉप ऑर्डर का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है.

  • यशस्वी जायसवाल: सबसे ज़्यादा 376 रन बनाए, जिनमें से 238 रन सिर्फ दो पारियों में आए. बाकी 8 पारियों में उन्होंने कुल 138 रन बनाए (13, 35, 30, 77, 30, 5, 0, 24).
  • ऋषभ पंत: दूसरे कामयाब बल्लेबाज़, जिन्होंने कुल 348 रन बनाएँ, जिनमें तीन पारियों का योगदान 223 रनों का रहा. बाकी 7 पारियों में उन्होंने केवल 125 रन बनाए (20, 99, 18, 0, 60, 64, 37).
  • विराट कोहली: पर्थ में नाबाद शतक लगाकर कोहली ने भले ही अपने रनों की संख्या 216 कर ली, जिनमें एक नाबाद शतक और एक 70 रन की पारी शामिल है. बाकी 8 पारियों में उनका स्कोर केवल 46 रन रहा (0, 70, 1, 17, 4, 1, 5, 7).
  • गिल और सरफराज़ ख़ान: दोनों ने 6-6 पारियों में 203 और 171 रन बनाए हैं.

साल 2024 में 7 बार टीम इंडिया 200 से कम स्कोर पर ऑल आउट हुई है और ऐसा 6 बार पिछले 5 टेस्ट में हुआ है.

ऑस्ट्रेलिया की ज़मीन पर विदेशी बल्लेबाज करते रहे हैं संघर्ष

रोहित शर्मा

इमेज स्रोत, Cricket Australia via Getty Images

इमेज कैप्शन, इंग्लैंड के खिलाफ धर्मशाला टेस्ट में शतक के बाद रोहित शर्मा ने 12 पारियों में सिर्फ एक अर्द्धशतक लगाया है

लेकिन, इन सभी खिलाड़ियों के बल्ले से ज़्यादा अगर किसी एक बड़ी और लाजवाब पारी की सख़्त ज़रूरत है, तो वो कप्तान रोहित शर्मा हैं.

इंग्लैंड के खिलाफ धर्मशाला टेस्ट में शतक के बाद, उन्होंने 12 पारियों में सिर्फ एक अर्द्धशतक लगाया है.

37 साल के रोहित का ये संभवतः आखिरी ऑस्ट्रेलिया दौरा हो सकता है. इस ज़मीन पर एक भी टेस्ट शतक ना लगाना, शायद एक बल्लेबाज़ के तौर पर, उन्हें पूरी ज़िंदगी कचोटता रहेगा.

ऑस्ट्रेलिया की ज़मीन पर विदेशी बल्लेबाज़ों के लिए रन बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, ख़ासकर पहली पारी में.

पर्थ टेस्ट में भी राहुल, जायसवाल और कोहली ने दूसरी पारी में ही अच्छा प्रदर्शन किया. जायसवाल ने तो इस दौरे की किसी भी पहली पारी में अब तक खाता भी नहीं खोला है. पिछले 5 सालों में ऑस्ट्रेलियाई ज़मीन पर विदेशी बल्लेबाज़ों ने 24 मैचों में 22 से भी कम के औसत से रन बनाए हैं और केवल दो शतक ही निकले हैं, जिनमें से एक भारतीय बल्लेबाज़ अंजिक्य रहाणे का है.

पहली पारी और गंभीर की 'गंभीर' चुनौती

गौतम गंभीर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, गौतम गंभीर भारतीय टीम के कोच हैं
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

पहली पारी में बल्लेबाज़ों के निरंतर संघर्ष वाले आंकड़े देखकर कोच गौतम गंभीर को चिंता हो सकती है, क्योंकि जब से उन्होंने कार्यभार संभाला है, तब से टीम के बल्लेबाज़ पहली पारी में सामूहिक रूप से 16 बार शून्य पर आउट हुए हैं.

इस दौरान, एकमात्र शतक रविचंद्रन अश्विन जैसे ऑलराउंडर के बल्ले से घरेलू मैदान पर बांग्लादेश के खिलाफ़ चेन्नई टेस्ट में आया था.

इतना ही नहीं, मौजूदा दौरे पर चार पारियों में तीन बार नीतिश कुमार रेड्डी टीम के टॉप-स्कोरर रहे हैं. ये आंकड़ा रेड्डी की कामयाबी से ज़्यादा, टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की लगातार नाकामी को दर्शाता है.

बस, उम्मीद यही की जा सकती है कि पिछली बार गाबा का घमंड तोड़ने वाली टीम इंडिया इस बार भी अपने बल्लेबाज़ों के दम पर जीत के सिलसिले को बरकरार रख पाए. ऐसा होने से ना सिर्फ भारतीय बल्लेबाज़ी में सुधार होगा बल्कि सीरीज़ जीतने की उम्मीदें भी फिर से जिंदा हो सकेंगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)