अब इस लाइव पेज को विराम देने का वक़्त आ गया है. बीबीसी संवाददाता संदीप राय को दीजिए इजाज़त.
कल सुबह एक नए लाइव पेज के साथ हम फिर हाज़िर होंगे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की वेबसाइट पर लगी कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को दावोस में हो रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रीनलैंड, टैरिफ़, नेटो और यूरोप समेत कई मुद्दों पर बात की.
चंदन कुमार जजवाड़े, संदीप राय
अब इस लाइव पेज को विराम देने का वक़्त आ गया है. बीबीसी संवाददाता संदीप राय को दीजिए इजाज़त.
कल सुबह एक नए लाइव पेज के साथ हम फिर हाज़िर होंगे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की वेबसाइट पर लगी कुछ अहम ख़बरों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

इमेज स्रोत, Reuters
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को दावोस में हो रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रीनलैंड, टैरिफ़, नेटो और यूरोप समेत कई मुद्दों पर बात की.
ट्रंप के भाषण की प्रमुख बातें-
यूरोप: भाषण की शुरुआत में ही ट्रंप ने कहा कि यूरोप "सही दिशा में नहीं जा रहा". इसके लिए उन्होंने "लगातार बढ़ता सरकारी ख़र्च, बिना नियंत्रण के बड़े पैमाने पर प्रवासन और अंतहीन विदेशी आयात" को ज़िम्मेदार ठहराया.
ग्रीनलैंड: ट्रंप ने कहा कि वह डेनमार्क से ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए "तुरंत बातचीत" चाहते हैं. उन्होंने कहा, "इस विशाल भूभाग, इस विशाल बर्फीले इलाके की रक्षा केवल अमेरिका ही कर सकता है."
ग्रीनलैंड-आईसलैंडः डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर की गई अपनी टिप्पणियों से सुर्खियां बटोरीं, लेकिन कई मौकों पर वह जिस द्वीप की बात कर रहे थे, उसके नाम को लेकर भ्रमित दिखाई दिए. उन्होंने कई बार ग्रीनलैंड की जगह आईसलैंड कहा.
बल प्रयोग: इसे अपने भाषण का सबसे बड़ा बयान बताते हुए ट्रंप ने कहा कि वह बल का इस्तेमाल नहीं करेंगे. उन्होंने कहा, "मुझे बलप्रयोग करने की ज़रूरत नहीं है. मैं बलप्रयोग नहीं करना चाहता. मैं बलप्रयोग नहीं करूंगा."
नेटो: ट्रंप ने इस दावे को ख़ारिज किया कि ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने से नेटो को नुक़सान होगा. उन्होंने कहा, "हम बहुत कुछ देते हैं और बदले में हमें बहुत कम मिलता है."
अर्थव्यवस्था: ट्रंप ने दावा किया कि उनके राष्ट्रपति कार्यकाल में अमेरिका एक "आर्थिक चमत्कार" देख रहा है. उन्होंने कहा कि महंगाई घटी है और आर्थिक विकास ऐसा है, "जैसा शायद किसी देश ने पहले कभी नहीं देखा".
टैरिफ़ः उन्होंने कहा कि इस आर्थिक प्रदर्शन का एक कारण विदेशी देशों पर लगाए गए टैरिफ़ हैं, ताकि "उनके कारण हुए नुक़सान की भरपाई की जा सके."
प्रवासन: ट्रंप ने कहा कि यूरोप "दूर-दराज़ की ज़मीनों से पूरी तरह अलग आबादी" ला रहा है. उन्होंने कहा, "सच कहूं तो यूरोप के कुछ हिस्से अब पहचान में ही नहीं आते."
यूक्रेन: ट्रंप ने कहा, "मैं राष्ट्रपति पुतिन से बातचीत कर रहा हूं और मेरा मानना है कि वह समझौता करना चाहते हैं. मैं राष्ट्रपति जेलेंस्की से भी बातचीत कर रहा हूं और मुझे लगता है कि वह भी समझौता चाहते हैं. मैं आज उनसे मिलने वाला हूं."
चाइना विंड फ़ॉर्मः ट्रंप ने कहा कि चीन बड़ी संख्या में पवन टर्बाइन बनाता है, लेकिन "मैं चीन में कहीं भी कोई विंड फ़ॉर्म नहीं ढूंढ पाया." हालांकि बीबीसी ने पाया कि यह दावा सही नहीं है. दुनिया के सबसे बड़े विंड फ़ॉर्म में से एक चीन के गांसू प्रांत में स्थित है.

इमेज स्रोत, Bloomberg via Getty Images
ग्रीनलैंड को हासिल करने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांग और इसका विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर टैरिफ़ लगाने की धमकियों को लेकर विरोध बढ़ गया है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, यूरोपीय संसद ने बुधवार को अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते को रोकने का फ़ैसला किया है.
यूरोपीय संसद में अमेरिका से होने वाले व्यापार पर टैरिफ़ हटाने से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो रही थी.
यह समझौता जुलाई के अंत में स्कॉटलैंड के टर्नबेरी में हुआ था. इसके तहत अमेरिकी सामान पर आयात शुल्क कम करने और अमेरिकी लॉब्स्टर पर शून्य शुल्क जारी रखने का प्रस्ताव था, जिस पर पहली बार 2020 में सहमति बनी थी.
इन प्रस्तावों को यूरोपीय संसद और यूरोपीय संघ की सरकारों की मंज़ूरी मिलनी थी.
यूरोपीय संसद की व्यापार समिति को 26 और 27 जनवरी को मतदान के ज़रिये अपनी स्थिति तय करनी थी, लेकिन अब इसे टाल दिया गया है.
समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लांगे ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नई टैरिफ़ धमकियों ने टर्नबेरी समझौते को तोड़ दिया है और इसे अगले आदेश तक रोक दिया जाएगा.

इमेज स्रोत, Getty Images
राजकोट में खेले जा रहे पहले टी20 मैच में भारत ने न्यूज़ीलैंड के सामने 239 रनों का लक्ष्य रखा है.
भारत की ओर से सर्वाधिक रन अभिषेक शर्मा ने बनाए. उन्होंने 35 गेंदों में पांच चौकों और आठ छक्के की मदद से कुल 84 रन बनाए.
संजू सैमसन 10 रन, ईशान किशन 8 रन, सूर्य कुमार यादव 32 रन, हार्दिक पांड्या 25 रन, शिवम दुबे 9 रन, अक्षर पटेल पांच रन और अर्शदीप सिंह ने नाबाद 6 रन बनाए.
मैच शुरू होने से पहले न्यूज़ीलैंड ने टॉस जीतकर गेंदबाज़ी का फ़ैसला किया था.

इमेज स्रोत, Getty Images
तमिलनाडु और केरल के राज्यपालों के बाद अब कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य विधानसभा के संयुक्त सत्र में दिए जाने वाले अपने अभिभाषण की कुछ सामग्री पर आपत्ति जताई है.
यह सत्र बेंगलुरु में गुरुवार से शुरू होना है.
क़ानून मंत्री एचके पाटिल ने पत्रकारों से कहा, "वह अपने अभिभाषण से 11 पैरा हटवाना चाहते हैं, जो कैबिनेट ने तैयार किया है. इन पैरा में केंद्र-राज्य संबंधों, कुछ केंद्रीय नीतियों से राज्य पर पड़ने वाले असर और मनरेगा का ज़िक्र है."
क़ानून मंत्री पाटिल, महाधिवक्ता शशिकिरण शेट्टी और मुख्यमंत्री के क़ानूनी सलाहकार के. पोन्नन्ना के साथ लोक भवन पहुंचे थे.
यह दौरा तब हुआ जब मुख्य सचिव को राज्यपाल कार्यालय से फ़ोन आया कि राज्यपाल को अपने अभिभाषण को लेकर आपत्तियां हैं.
पाटिल ने कहा कि राज्यपाल गहलोत कुछ पैरा हटाना चाहते थे, लेकिन "हमने यह स्पष्ट किया कि संयुक्त सत्र में दिया जाने वाला अभिभाषण कैबिनेट की ओर से तैयार किया जाता है. संविधान का अनुच्छेद 176 साफ़ तौर पर कहता है कि राज्यपाल को सरकार की नीतियां और कार्यक्रम पढ़कर सुनाने होते हैं. संविधान में यह पूरी तरह स्पष्ट है कि यह भाषण अनिवार्य रूप से कैबिनेट ही तैयार करती है."
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को बताया कि मनरेगा को ख़त्म कर उसकी जगह 'विकसित भारत जी राम जी' क़ानून लाने का सीधा असर राज्य के लोगों पर पड़ रहा है और राज्य सरकार को इस बारे में बोलना होगा और जनता के सामने यह बात रखनी होगी.
पाटिल ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री को जानकारी देगा और फिर राज्यपाल से दोबारा संपर्क करेगा. सरकार ने राज्यपाल को बताया है कि सरकार के रुख़ में कोई बदलाव नहीं है.
इस सवाल पर कि अगर राज्यपाल संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार कर देते हैं तो क्या होगा, पाटिल ने कहा, "जब वह स्थिति आएगी, तब उस पर फैसला लिया जाएगा."
जब यही सवाल मुख्यमंत्री के क़ानूनी सलाहकार पोन्नन्ना से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 176 पूरी तरह साफ़ है और इसके मुताबिक़ नए साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा के संयुक्त सत्र को राज्यपाल को संबोधित करना ही होता है.
पूर्व महाधिवक्ता रवि वर्मा कुमार ने बीबीसी हिंदी से कहा, "राज्यपाल को कैबिनेट की सलाह के मुताबिक़ काम करना होता है. कैबिनेट की ओर से तैयार किए गए अभिभाषण पर उन्हें कोई विवेकाधिकार नहीं है, भले ही उसमें केंद्र सरकार की आलोचना ही क्यों न हो. ये सभी स्थापित संवैधानिक मुद्दे हैं. अगर वह इसका पालन नहीं करते हैं, तो यह उनके संवैधानिक कर्तव्य का उल्लंघन माना जाएगा."

इमेज स्रोत, EPA/Shutterstock
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बीते दो सदियों में अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने ग्रीनलैंड को ख़रीदने की कोशिश की है.
उन्होंने कि ग्रीनलैंड में डेनमार्क का नामो-निशान नहीं है और डेनमार्क ग्रीनलैंड पर बहुत कम ख़र्च कर रहा है.
उन्होंने कहा, "सिर्फ़ अमेरिका ही उस भू-भाग की रक्षा कर सकता है."
उन्होंने कहा, "मैं ग्रीनलैंड को इस स्पीच से बाहर रखना चाहता था लेकिन अगर मैं ऐसा करता को नकारात्मक टिप्पणियां आतीं."
ट्रंप ने ये भी कहा कि वो ग्रीनलैंड और डेनमार्क के लोगों का सम्मान करते हैं.
बीबीसी संवाददाता एंथनी जर्चर का आकलन
डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में मौजूद श्रोताओं के सामने यह तर्क रखा कि अमेरिका को ग्रीनलैंड क्यों हासिल करना चाहिए.
उनके कुछ तर्क पहले से जाने-पहचाने थे, जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं और अमेरिका के पश्चिमी गोलार्द्ध में ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति.
हालांकि, इस बार नया दावा यह था कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान डेनमार्क पर जर्मनी के हमले के बाद ग्रीनलैंड की रक्षा में भूमिका निभाने के कारण अमेरिका का उस द्वीप पर नियंत्रण रहा है और उस पर उसका अधिकार बनता है.
ट्रंप ने कहा, "हमारे पास यह पहले से था, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के बाद हमने इसे डेनमार्क को लौटा दिया."
उन्होंने कहा कि अमेरिका को "इसे अपने पास ही रखना चाहिए था."

इमेज स्रोत, Reuters
तय समय से घंटों बाद दावोस पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में पहली टिप्पणी यूरोप को लेकर की.
ट्रंप ने कहा है, "यूरोप सही दिशा में नहीं जा रहा है. मैं आज के यूरोप को पहचान नहीं पाता. मैं यूरोप से प्यार करता हूं, मैं चाहता हूं कि वह अच्छा करे, लेकिन वह सही रास्ते पर नहीं है."
ट्रंप ने आगे कहा, "मैं किसी का अपमान नहीं करना चाहता." लेकिन उन्होंने जोड़ा कि उनके दोस्त यूरोप के अलग-अलग हिस्सों से लौटकर कहते हैं कि वे वहां के हालात को पहचान नहीं पाते.
उन्होंने "बिना रोक-टोक बड़े पैमाने पर प्रवासन" और रिकॉर्ड बजट व व्यापार घाटे का भी ज़िक्र किया.
ट्रंप ने कहा, "हमारी दुनिया के कुछ हिस्से हमारी आंखों के सामने तबाह हो रहे हैं और नेता इस पर कुछ नहीं कर रहे."
उन्होंने यह भी कहा कि विशेषज्ञों ने दावा किया था कि उनकी योजनाओं से मंदी और भारी महंगाई आएगी, लेकिन "हमने उन्हें ग़लत साबित कर दिया."
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त

इमेज स्रोत, UK PARLIAMENT
ग्रीनलैंड और चागोस समझौते को लेकर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर के बयान सामने आए हैं.
ब्रिटिश हाउस ऑफ़ कॉमन्स में प्रश्नकाल के दौरान प्रधानमंत्री स्टार्मर ने कहा, "मैं नहीं झुकूंगा. टैरिफ़ की धमकियों के बीच ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर हमारे सिद्धांतों और मूल्यों पर ब्रिटेन नहीं झुकेगा."
स्टार्मर ने ग्रीनलैंड के भविष्य पर अपना रुख़ दोहराते हुए कहा कि विरोध करने वाले देशों पर टैरिफ़ लगाने की ट्रंप की धमकियां "पूरी तरह ग़लत" हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि डेनमार्क की प्रधानमंत्री कल द्विपक्षीय बातचीत के लिए ब्रिटेन आ रही हैं.
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि 'चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरिशस को सौंपकर ब्रिटेन अमेरिका को निराश' कर रहा है.
एक दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने चागोस को सौंपने के समझौते को 'सबसे बड़ा मूर्खतापूर्ण वाला काम' कहा था.

इमेज स्रोत, Getty Images
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच पहला टी20 मैच नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेला जा रहा है.
न्यूज़ीलैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फ़ैसला किया है.
इंडिया टीम इलेवन
अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), रिंकू सिंह, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह.
न्यूज़ीलैंड टीम इलेवन
टिम रॉबिन्सन, डेवन कॉनवे, रचिन रविंद्र, ग्लेन फिलिप्स, मार्क चैपमैन, डैरिल मिचेल, मिचेल सैंटनर (कप्तान), क्रिस्टियन क्लार्क, काइल जैमीसन, इश सोढ़ी, जैकब डफी.


नेटो के पूर्व महासचिव एंडर्स फोग रासमुसेन का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप को ख़ुश करने का समय ख़त्म हो गया है और अब यूरोप से 'अधिक मजबूत प्रतिक्रिया' की उम्मीद की जानी चाहिए.
डेनमार्क के पूर्व प्रधानमंत्री एंडर्स फोग रासमुसेन ने द इकोनॉमिस्ट में एक लेख लिखा और इसका लिंक अपने एक्स हैंडल पर शेयर करते हुए लिखा- 'बस बहुत हो चुका.'
उन्होंने एक्स पर लिखा, "मैंने हमेशा अमेरिका की सराहना की है. प्रधानमंत्री (डेनमार्क) और महासचिव (नेटो) के रूप में मैं अमेरिका को स्वतंत्र दुनिया का नेता मानता रहा हूं."
"लेकिन ग्रीनलैंड को लेकर दी गई धमकियों के बाद अब मुझे कहना पड़ रहा है कि बस बहुत हो चुका. यूरोप को अपने हितों की रक्षा करनी होगी."
ट्रंप ने जबसे ग्रीनलैंड के उनके प्रस्तावित कब्ज़े का विरोध करने वाले आठ यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ़ लगाने की धमकी दी है, तबसे यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष, फ़्रांस के राष्ट्रपति और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी रवैये की कड़ी आलोचना की है.
इस समय स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की बैठक चल रही है और ट्रंप वहां विश्व के नेताओं से मिलने वाले हैं.

इमेज स्रोत, Ashkar
केरल में बस में एक व्यक्ति पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाली महिला को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
दीपक नाम के जिस व्यक्ति पर आरोप लगाया गया था वीडियो वायरल होने के बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली थी.
बीबीसी तमिल के मुताबिक़, इस घटना के बाद महिला ग़ायब थी और पुलिस उसकी तलाश कर रही थी.
इस मामले को लेकर केरल में आक्रोश देखा जा रहा है. राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) ने इस मामले में पुलिस जाँच के आदेश दिए थे.
जिस महिला ने वीडियो बनाकर पोस्ट किया है, उसने आरोप लगाया है कि वह व्यक्ति उसे ग़लत तरीक़े से छू रहा था, इसलिए ऐसा करना पड़ा.
महिला ने आरोप लगाया था कि कन्नूर ज़िले में एक निजी बस में यात्रा के दौरान दीपक ने 'सेक्शुअल बाउंड्री' का उल्लंघन किया और उन्हें ग़लत तरीके़ से टच किया.
उनकी यह पोस्ट वायरल हो गई, जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई तरह की राय और बहसें देखने को मिलीं.
पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट डालने वाली महिला के ख़िलाफ़ 'आत्महत्या के लिए उकसाने' का मामला भी दर्ज किया है.
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)

इमेज स्रोत, Getty Images
भारत प्रशासित कश्मीर में पिछले हफ़्ते पुलिस ने मस्जिदों की प्रबंधन समितियों के सदस्यों और उनके परिवारों की सभी निजी जानकारियां इकट्ठा करने का अभियान शुरू किया.
कई बड़े अख़बारों ने यह ख़बर छापी तो श्रीनगर में मौजूद उनके संवाददाताओं को साइबर पुलिस ने तलब किया. इनमें इंडियन एक्सप्रेस के संवाददाता बशारत मसूद से एक बॉन्ड यानी हलफ़नामा पर दस्तख़त करने को कहा गया, जिसमें लिखा था कि “मैं दोबारा ऐसी ग़लती नहीं करूंगा.”
बशारत मसूद इस मामले में सीधे तौर पर मीडिया से बात नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनके दोस्तों के मुताबिक़ उन्हें साइबर पुलिस स्टेशन बुलाया गया और पूरे दिन यह कहकर बैठाए रखा गया कि “साहब अभी व्यस्त हैं.”
शाम को उनसे कहा गया कि अगली सुबह वे किसी रिश्तेदार या साथी को भी पुलिस स्टेशन लेकर आएं. अगले दिन जब बशारत पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने ले जाया गया, जहां उनसे एक बॉन्ड पर दस्तख़त करने को कहा गया.
बशारत ने बॉन्ड की भाषा पढ़ी, जिसमें ऐसा संकेत दिया गया था कि “बशारत क़ानून व्यवस्था के लिए ख़तरा हैं” और यह कि “मैं दोबारा ऐसी ग़लती नहीं करूंगा.”
बशारत ने इस काग़ज़ पर दस्तख़त करने से इनकार कर दिया. इसके बाद उन्हें लगातार तीन दिन तक थाने बुलाया गया और कई दिनों के लिए उनका फ़ोन भी पुलिस ने अपने पास रख लिया.
इंडियन एक्सप्रेस ने एक बयान में कहा है, “हम अपने पत्रकारों के सम्मान और गरिमा की सुरक्षा में कोई कमी नहीं छोड़ेंगे.”

इमेज स्रोत, Getty Images
हिंदुस्तान टाइम्स के पत्रकार को भी तलब किया गया
‘हिंदुस्तान टाइम्स’ के संवाददाता आशिक़ हुसैन को भी मस्जिद कमेटियों की जांच से जुड़ी ख़बर देने पर इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा.
जब आशिक़ हुसैन को तलब किया गया, तो हिंदुस्तान टाइम्स ने पुलिस से लिखित रूप में इस बुलावे का कारण पूछा. कई दूसरे पत्रकारों को भी इसी स्टोरी के सिलसिले में साइबर पुलिस ने बुलाया था, लेकिन कुछ कारणों से उन्होंने अपना नाम सार्वजनिक नहीं किया है.
विधायक सज्जाद ग़नी लोन ने पुलिस की इस कार्रवाई को चिंताजनक बताया.
उन्होंने कहा, “तथ्यों पर आधारित खबरें छापने पर पत्रकारों को तलब करना लोकतंत्र पर हमला है.”
एक अन्य विधायक मोहम्मद यूसुफ़ तारीगामी ने कहा, “अधिकारी पत्रकारों को अपने इशारों पर चलाने के लिए नए-नए तरीक़े अपना रहे हैं.”
ग़ौरतलब है कि साल 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कुछ पत्रकारों पर कार्रवाई हुई है.
फ़हाद शाह के अख़बार ‘कश्मीरवाला’ को बंद कर दिया गया और उन्हें सेंट्रल जेल भेजा गया. 21 महीने बाद उन्हें ज़मानत मिली.
पिछले साल नवंबर में जम्मू में ‘कश्मीर टाइम्स’ के दफ़्तर पर छापा मारा गया और पुलिस ने दावा किया कि वहां हथियार मिले हैं. यह अख़बार कई साल पहले छपना बंद हो चुका है और अब सिर्फ़ ऑनलाइन पोर्टल चलाता है.
इन घटनाओं पर इंटरनेशनल फ़ेडरेशन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स और रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स जैसी वैश्विक संगठनों ने चिंता जताई है.

टी20 वर्ल्ड कप के मैच भारत में न खेलने की बांग्लादेश की इच्छा का पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने समर्थन किया है.
बीबीसी बांग्ला के अनुसार, पीसीबी ने आईसीसी को पत्र लिखकर अपना समर्थन ज़ाहिर किया.
क्षेत्रीय राजनीतिक स्थिति का हवाला देते हुए पीसीबी ने कहा कि बांग्लादेश टीम का इस समय भारत में न खेलने का निर्णय तर्कसंगत है. इस पत्र की एक प्रति आईसीसी बोर्ड के सदस्यों को भी भेजी गई है.
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) सुरक्षा कारणों से बांग्लादेश के मैचों का आयोजन श्रीलंका में करवाना चाहता है.
हालांकि, आईसीसी का रुख़ नहीं बदला है.
श्रीलंका और भारत के संयुक्त मेजबान होने के बावजूद, आईसीसी ने अभी तक बांग्लादेश को श्रीलंका में खेलने की अनुमति नहीं दी है.
उसने पिछले सप्ताह बीसीबी के साथ हुई बैठक में भी अपना यह रुख़ स्पष्ट किया.
बीबीसी बांग्ला के मुताबिक बांग्लादेश के टी20 कप्तान लिटन दास ने 2026 टी20 विश्व कप में बांग्लादेश की भागीदारी को लेकर अनिश्चितता स्वीकार की है.
उन्होंने कहा कि यह अनिश्चितता इसलिए पैदा हुई है क्योंकि आईसीसी ने अभी तक आयोजन स्थल पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है.
ग़ौरतलब है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने पिछले दिनों एक बड़ा फ़ैसला करते हुए बांग्लादेशी क्रिकेटर मुस्तफ़िज़ुर रहमान को आईपीएल की कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) की टीम से बाहर करने का आदेश दिया था.
इसके बाद दोनों देशों के बीच पहले से चल रहा तनाव और बढ़ गया.

इमेज स्रोत, Getty Images
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की टैरिफ़ की धमकी को लेकर यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा है कि 'ज़रूरत पड़ी तो यूरोप तैयार है.'
दावोस में हो रहे वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में उन्होंने कहा कि 'अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में ऐसा बदलाव आया है जो सिर्फ़ बड़ा नहीं, बल्कि स्थायी है.'
उन्होंने कहा, "अब हम ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जो खुली ताक़त से तय होती है."
वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोप के लिए अपनी स्वतंत्रता की दिशा में प्रयास तेज़ करना ज़रूरी है और उसे ताक़त के नए साधन हासिल करने होंगे.
डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को हासिल करने की कोशिश को लेकर बढ़ते तनाव का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 'सुरक्षा कारणों के बहाने अतिरिक्त टैरिफ़ की धमकी देना पूरी तरह ग़लत' है.
उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से टैरिफ़ की धमकी के जवाब पर चर्चा के लिए यूरोप के नेता गुरुवार को मिलने जा रहे हैं.
वॉन डर लेयेन ने कहा, "यूरोप संवाद और समाधान को तरजीह देता है, लेकिन अगर ज़रूरत पड़ी तो हम एकजुटता, तात्कालिकता और दृढ़ता के साथ कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं."
अमेरिकी राष्ट्रपति शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं से मिलने दावोस जा रहे हैं, लेकिन एयर फ़ोर्स वन में आई "मामूली इलेक्ट्रिकल समस्या" के कारण विमान को वापस लौटना पड़ा, जिससे उनकी यात्रा में देरी हुई.
डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर आठ यूरोपीय देश ग्रीनलैंड पर उनके प्रस्तावित कब्जे का विरोध करते हैं, तो 1 फ़रवरी से 10 प्रतिशत टैरिफ़ लगाया जाएगा. इस पूरे घटनाक्रम का यह संक्षिप्त ब्योरा है.

इमेज स्रोत, Getty Images
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वो ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ में शामिल होने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का न्योता स्वीकार करेंगे.
इसराइल के प्रधानमंत्री ने ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी जानकारी दी है.
ग़ज़ा के प्रशासन और फिर से निर्माण के लिए ट्रंप प्रशासन के नए 'बोर्ड ऑफ़ पीस' में शामिल होने के लिए अमेरिका ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत दुनिया के कई नेताओं को न्योता दिया है.
अंग्रेज़ी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक़, ये बोर्ड डोनाल्ड ट्रंप की ग़ज़ा शांति योजना का हिस्सा है, लेकिन बोर्ड के चार्टर में ग़ज़ा का कोई उल्लेख नहीं है.
अमेरिका दावा कर रहा है कि उसका ये 'बोर्ड ऑफ़ पीस' एक नए अंतरराष्ट्रीय शांति संगठन के तौर पर काम करेगा.

इमेज स्रोत, ANI
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में वायु सेना का एक ट्रेनी एयरक्राफ़्ट हादसे का शिकार होकर एक तालाब में गिर गया.
तस्वीरों में दिख रहा है कि विमान तालाब में गिरा हुआ है और एयरक्राफ़्ट का कुछ हिस्सा पानी के अंदर भी है.
समाचार एजेंसी एएनआई के एक वीडियो में दिख रहा है कि क्रैश वाली जगह पर चारों तरफ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद हैं.
पीआरओ डिफ़ेंस विंग कमांडर देबार्थो धर ने बताया कि चालक दल के दो सदस्य सुरक्षित हैं.
उन्होंने कहा, "आज दोपहर 12 बजे चालक दल के दो सदस्यों वाला भारतीय वायु सेना का एक छोटा विमान ट्रेनिंग मिशन पर था. इस दौरान उसकी इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी. चालक दल के दोनों सदस्य सुरक्षित हैं और कोर्ट ऑफ़ इंक्वायरी के आदेश दे दिए गए हैं."
अब तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे.
अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता संदीप राय आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के पन्ने पर लगी कुछ अहम ख़बरें पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

इमेज स्रोत, Getty Images
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे की हत्या करने वाले शख़्स को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई है. साल 2022 में नारा शहर में एक रैली के दौरान शिंज़ो आबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
43 साल के तेत्सुया यामागामी ने पिछले साल ट्रायल की शुरुआत में ख़ुद ही अपना जुर्म क़बूल कर लिया था, लेकिन उन्हें क्या सज़ा मिलनी चाहिए, इस पर जापान में लोगों की राय बंटी हुई दिखी.
कई लोग 45 साल के इस व्यक्ति को एक बेरहम हत्यारा मानते हैं, वहीं कुछ लोग उसके मुश्किल बचपन को लेकर सहानुभूति भी रखते हैं.
सरकारी वकीलों ने कहा कि यामागामी को ‘गंभीर’ अपराध के लिए उम्रक़ैद मिलनी चाहिए और कहा कि आबे की हत्या से देश हैरान रह गया, क्योंकि जापान में बंदूक से जुड़े अपराध लगभग नहीं होते हैं.
नरमी की मांग करते हुए, यामागामी के वकीलों ने कहा कि वह ‘धार्मिक शोषण’ का शिकार थे.
जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे 8 जुलाई, 2022 को दिन में 11:30 बजे देश के पश्चिमी हिस्से नारा में एक चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे, तभी पीछे से उन्हें गोली मार दी गई थी.