कोलकाता के आनंदपुर इलाके में गोदामों में लगी आग के बाद पुलिस अब भी पीड़ितों की पहचान की प्रक्रिया में जुटी हुई है. अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल संभव नहीं है.
कई मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसी आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या 15 से अधिक हो सकती है और दर्जनों लोग अब भी लापता हैं. वहीं पुलिस ने कहा है कि वह डीएनए जांच पूरी होने के बाद ही कोई अंतिम आंकड़ा बताएगी.
यह आग 26 जनवरी की सुबह करीब तीन बजे लगी थी. शुरुआती जानकारी के मुताबिक़, आग पहले एक डेकोरेटर कंपनी के गोदाम में लगी और फिर पास में स्थित दूसरे गोदाम तक फैल गई, जिसे फ़ास्ट फ़ूड चेन वॉव मोमो इस्तेमाल कर रही थी.
दोनों गोदामों में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी, जिस वजह से आग तेज़ी से फ़ैल गई. उस समय गोदामों में कई मज़दूर और कर्मचारी मौजूद थे, जिनमें से कई लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल पाया.
बारुईपुर के पुलिस अधीक्षक सुवेंद्र कुमार ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, "हमने इस मामले में पांच सदस्यों की एसआईटी बनाई है. एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है. इस व्यक्ति को आठ दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया गया है."
उन्होंने बताया, "डीएनए प्रोफ़ाइलिंग कराई जा रही है. अभी तक पूरे शव नहीं मिले हैं, केवल शरीर के हिस्से बरामद हुए हैं, इसी वजह से हम मृतकों की संख्या की पुष्टि नहीं कर पा रहे हैं."
पुलिस ने इस मामले में पुष्पांजलि डेकोरेटर्स के मालिक गंगाधर दास को लापरवाही के आरोप में गिरफ़्तार किया है. उन पर आरोप है कि गोदाम में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, जिससे आग का खतरा बढ़ गया. पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
पश्चिम बंगाल अग्निशमन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने द हिन्दू अख़बार को बताया कि दोनों गोदामों के पास वैध फ़ायर सेफ़्टी क्लीयरेंस नहीं थी.
कोलकाता के मेयर फ़िरहाद हकीम ने कहा है कि इस घटना की जांच के निर्देश दिए गए हैं और यह देखा जा रहा है कि गोदामों का संचालन नियमों के मुताबिक़ हो रहा था या नहीं. उन्होंने कहा कि दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद दी जाएगी.
इस बीच, वॉव मोमो ने एक बयान जारी कर कहा है कि आग पड़ोस के गोदाम से उनके परिसर में फैली थी. कंपनी ने बताया कि इस हादसे में उसके दो कर्मचारी और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले एक सुरक्षा गार्ड की मौत हुई है.
कंपनी ने पीड़ित परिवारों के लिए 10 लाख रुपये का मुआवज़ा, आजीवन मासिक वेतन सहायता और बच्चों की शिक्षा का ख़र्च उठाने का एलान किया है.
प्रशासन का कहना है कि फ़ॉरेंसिक जांच और डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ़ हो पाएगा कि इस आग में कुल कितने लोगों की जान गई और कितने लोग अब भी लापता हैं. पुलिस और दमकल विभाग की जांच अभी जारी है.