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ट्रंप की चेतावनी पर ईरान ने कहा- 'हम भी ज़ोरदार जवाब देने के लिए तैयार'
- Author, यारोस्लव लुकी और कैथरीन आर्मस्ट्रॉन्ग
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि उसके परमाणु कार्यक्रम पर किसी समझौते के लिए बातचीत करने का समय 'तेज़ी से ख़त्म हो रहा है'. ये बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों की तैनाती लगातार बढ़ाई जा रही है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बड़े अमेरिकी नौसैनिक बेड़े का ज़िक्र करते हुए कहा है कि एक 'विशाल आर्माडा' पूरी ताक़त, उत्साह और मक़सद के साथ ईरान की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है.
इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि देश के सशस्त्र बल पूरी तरह से तैयार हैं और ज़मीन या समुद्र से किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई का 'तुरंत और ज़ोरदार' जवाब देने में सक्षम हैं.
ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण है और उसने अमेरिका व उसके सहयोगियों के इस आरोप को बार-बार ख़ारिज किया है, जिसके मुताबिक़ ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है.
ट्रंप ने इस नई चेतावनी से पहले, इसी महीने की शुरुआत में ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों पर की गई बर्बर कार्रवाई के बाद वादा किया था कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए ईरान में हस्तक्षेप करेगा.
उन्होंने कहा था, "मदद रास्ते में है." लेकिन बाद में ट्रंप ने अपने रुख़ में बदलाव किया और कहा कि उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी दिए जाने का सिलसिला रुक गया है.
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (HRANA) के मुताबिक़, दिसंबर के आख़िर में ईरान में प्रदर्शन शुरू होने के बाद से अब तक 6 हज़ार 301 से ज़्यादा लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है. इनमें से 5 हज़ार 925 प्रदर्शनकारी थे.
एचआरएएनए का कहना है कि वह लगभग तीन हफ़्तों तक इंटरनेट बंद रहने के बावजूद मिली 17 हज़ार अन्य कथित मौतों की रिपोर्टों की भी जांच कर रहा है.
वहीं, नॉर्वे के संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) ने चेतावनी दी है कि मरने वालों की कुल संख्या 25 हज़ार से ज़्यादा हो सकती है.
ट्रंप का बयान और ईरान का जवाब
ट्रंप का ताज़ा बयान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ज़्यादा केंद्रित नज़र आ रहा है.
उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "उम्मीद है कि ईरान जल्द ही बातचीत की मेज़ पर आएगा और एक निष्पक्ष और न्यायसंगत समझौते पर बातचीत करेगा- कोई परमाणु हथियार नहीं."
ट्रंप ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी नौसैनिक बल उस बेड़े से भी बड़ा है, जिसे निकोलस मादुरो को पकड़ने से पहले उन्होंने वेनेज़ुएला भेजा था.
ट्रंप ने पोस्ट में यह भी लिखा कि यह सैन्य बल 'ज़रूरत पड़ने पर अपने मिशन को तेज़ी और ताक़त के साथ पूरा करने के लिए तैयार, इच्छुक और सक्षम है.'
पिछले साल जून में ईरान और इसराइल के बीच 12 दिनों तक चले संघर्ष के दौरान ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए अमेरिकी हमलों का ज़िक्र करते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी, "अगला हमला इससे कहीं ज़्यादा भयानक होगा! ऐसा दोबारा मत होने देना."
इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा, "ईरान ने हमेशा एक आपसी हित वाला, निष्पक्ष और न्यायसंगत परमाणु समझौता चाहा है. जो बराबरी के आधार पर हो, जिसमें कोई दबाव, धमकी न हो, जो शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक हासिल करने के लिए ईरान के अधिकारों को पक्का करे और यह गारंटी दे कि कोई परमाणु हथियार न हों."
उन्होंने कहा, "ऐसे हथियारों की हमारी सुरक्षा से जुड़ी रणनीति में कोई जगह नहीं है और हमने उन्हें कभी हासिल करने की कोशिश भी नहीं की है."
वहीं, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़िम घरीबाबादी ने कहा कि संदेशों के आदान-प्रदान के बावजूद फिलहाल अमेरिका के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं चल रही है.
बीबीसी की पड़ताल में क्या पता चला?
ओपन-सोर्स टूल्स का इस्तेमाल करते हुए बीबीसी वेरिफ़ाई ने हाल ही में क्षेत्र में हुई अमेरिकी सैन्य तैनातियों में से कुछ को ट्रैक किया है. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि कम से कम 15 लड़ाकू विमान जॉर्डन के मुवाफ़क़ एयरफ़ोर्स बेस पर पहुंचे हैं.
इसके अलावा जॉर्डन, क़तर और हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया के सैन्य ठिकानों पर पहुंचने वाले विमानों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी गई है.
बीबीसी वेरिफ़ाई ने मध्य पूर्व क्षेत्र में पहुंचने वाले दर्जनों कार्गो प्लेन और रिफ़्यूलिंग एयरक्राफ़्ट की पहचान की है. वहीं, FlightRadar24 ट्रैकिंग साइट पर ईरानी हवाई क्षेत्र के पास ड्रोन और P-8 पोसाइडन जासूसी विमान उड़ान भरते हुए देखे गए हैं.
एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने बीबीसी वेरिफ़ाई से इस बात की पुष्टि की है कि ट्रंप ने जिस नेवल 'आर्माडा' का ज़िक्र किया था, उसकी अगुवाई करने वाला यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ़्ट कैरियर भी मध्य पूर्व पहुंच चुका है.
सोमवार को FlightRadar24 पर एक ऑस्प्रे विमान का ट्रैकर ओमान में लैंड करते देखा गया. ये विमान खाड़ी क्षेत्र से आया था. इससे संकेत मिलता है कि पोत 'अब्राहम लिंकन' आसपास के क्षेत्र में सक्रिय हो सकता है.
रिस्क एडवाइज़री फ़र्म सिबिलीन की प्रिंसिपल एनालिस्ट मेगन सटक्लिफ़ ने कहा, "पिछले दो हफ़्तों में अमेरिका ने इस क्षेत्र में नौसैनिक और हवाई संसाधनों की तैनाती तेज़ी से बढ़ाई है, जिससे उसकी क्षेत्रीय मौजूदगी काफ़ी मज़बूत हुई है."
सैटेलाइट तस्वीरों से ये भी सामने आया है कि कम से कम दो अमेरिकी गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर और तीन युद्धपोत पिछले कई महीनों से बहरीन में तैनात हैं.
इस बीच सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक़ ईरान ने पिछले साल सेवा में आए अपने ड्रोन कैरियर जहाज़ IRIS शाहिद बाघेरी को ईरान के तट के पास तैनात किया है.
ईरान का परमाणु कार्यक्रम और ट्रंप की कार्रवाई
साल 2015 में विश्व शक्तियों के साथ हुए परमाणु समझौते के तहत ईरान को 3.67% से अधिक प्यूरिटी तक यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं थी. ये कमर्शियल न्यूक्लियर पावर प्लांट के ईंधन के लिए ज़रूरी स्तर के बराबर है. इसके अलावा ईरान को 15 सालों तक अपने फोर्दो संयंत्र में किसी भी तरह के संवर्धन करने की इजाज़त नहीं थी.
हालांकि, ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान साल 2018 में इस समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था. उनका कहना था कि यह समझौता परमाणु बम बनाने से रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है. इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर दोबारा पाबंदियां लगा दीं, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से नुक़सान पहुंचा.
इसके जवाब में ईरान ने समझौते की शर्तों का लगातार उल्लंघन करना शुरू कर दिया, ख़ासतौर पर वो शर्तें जो संवर्धित यूरेनियम के उत्पादन से जुड़ी थीं, जिसका इस्तेमाल परमाणु रिएक्टरों के ईंधन के तौर पर होता है और जिससे परमाणु हथियार भी बनाए जा सकते हैं.
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से अमेरिकी मीडिया में ये कहा गया कि किसी नए परमाणु समझौते के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन रोकना होगा, अपने मिसाइल प्रोग्राम को भी सीमित करना होगा और मध्य पूर्व में प्रॉक्सी समूहों को समर्थन देना बंद करना होगा.
अमेरिका ने आख़िरी बार ईरान के परमाणु ठिकानों पर कार्रवाई बीते साल जून में की थी, जब उसने फोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान में तीन यूरेनियम संवर्धन केंद्रों को निशाना बनाया था.
उस समय अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि 'मिडनाइट हैमर' नाम के इस ऑपरेशन ने ईरान के परमाणु हथियार बनाने की संभावनाओं को बहुत बड़ा झटका दिया है.
हालांकि, ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर के डिप्टी पॉलिटिकल डायरेक्टर हसन अबेदिनी ने दावा किया कि देश को 'कोई बड़ा झटका नहीं लगा क्योंकि इन ठिकानों से सामग्री पहले ही हटा दी गई थी.'
हालांकि, हमले के जवाब में ईरान ने क़तर में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल अटैक किया था, जिसे ट्रंप ने 'बहुत कमज़ोर' और पहले से 'अनुमानित' करार दिया था.
जोशुआ चीथम, मैट मर्फी, एलेक्स मुरे, बारबरा मेत्ज़लर और सोफ़िया फरेरा सैंतोज़ की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.