जी-7 की बैठक के लिए इटली में एकजुट हुए दुनिया के नेता, मोदी भी हुए रवाना

जी-7 देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध, ग़ज़ा-इसराइल युद्ध, जलवायु परिवर्तन, प्रवासी मुद्दे, तकनीक और अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी है.

सारांश

  • नीट-यूजी में ग्रेस मार्क्स दिए गए 1,563 छात्रों के लिए दोबारा होगी परीक्षा. एनटीए ने नोटिफ़िकेशन जारी कर बताया 23 जून को होंगे एग्ज़ाम.
  • पीएम नरेंद्र मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने इटली रवाना हुए. तीसरी बार पीएम पद की शपथ लेने के बाद मोदी का यह पहला विदेश दौरा है.
  • अजीत डोभाल को एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त कर दिया गया है.
  • चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू और कश्मीर पर की गई टिप्पणी पर भारत के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
  • पेमा खांडू ने लगातार तीसरी बार अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. चोओना मीन ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.

लाइव कवरेज

दीपक मंडल

  1. ईरान के साथ बात नहीं बनने के बाद ट्रंप की नई धमकी का क्या है मतलब, आगे क्या होगा?

  2. यूएई ने कहा, 'होर्मुज़ स्ट्रेट ईरान का नहीं, जो वो इसे बंद कर सके'

    सुल्तान अल जाबेर

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    इमेज कैप्शन, सुल्तान अल जाबेर ने कहा है कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज़ में क़रीब 800 कमर्शियल जहाज़ फंसे हुए हैं और कम से कम 10 जहाज़ों को निशाना बनाया गया (फ़ाइल फ़ोटो)

    संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ईरान की तरफ़ से होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकेबंदी की कोशिश का विरोध किया है.

    यूएई का कहना है कि तेल और गैस के लिए यह अहम शिपिंग मार्ग "कभी भी ईरान का नहीं रहा है कि वह इसे बंद कर सके या इस पर रोक लगा सके."

    यूएई के उद्योग मंत्री और अबू धाबी की सरकारी तेल कंपनी के प्रमुख सुल्तान अहमद अल जाबेर ने सोशल मीडिया पर कहा, "ऐसा करने की कोई भी कोशिश सिर्फ़ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है. यह वैश्विक आर्थिक जीवनरेखा में रुकावट है और हर देश की ऊर्जा, भोजन और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक सीधा ख़तरा है."

    28 फ़रवरी को जब से अमेरिका और इसराइल ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई शुरू की है, तब से ईरान ने धमकी दी है कि कोई भी जहाज़ बिना अनुमति के इस समुद्री मार्ग का इस्तेमाल नहीं कर सकता है.

    ईरान ने ऐसे जहाज़ों पर हमला करने की चेतावनी दी और कुछ जहाज़ों पर इस इलाक़े में हमला भी किया गया.

    ईरान की इस चेतावनी की वजह से होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप हो गई और वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं.

    अल जाबेर ने कहा, "इस तरह की मिसाल कायम करना गैरकानूनी, ख़तरनाक और अस्वीकार्य है. दुनिया इसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर सकती और न ही इसकी इजाज़त दे सकती है.''

  3. ईरान ने कहा, 'हमारा भरोसा जीतना अमेरिका के हाथ में, जिसमें वो नाकाम रहा है'

    इस्लामाबाद में बैठक के दौरान ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़

    इमेज स्रोत, Reuters/ Pakistan’s Prime Minister Office

    इमेज कैप्शन, इस्लामाबाद में बैठक के दौरान ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़

    इस्लामाबाद में हुई वार्ता में अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ ने कहा है कि अब अमेरिका के लिए "यह तय करने का समय है कि वह हमारा भरोसा जीत सकता है या नहीं."

    सोशल मीडिया एक्स पर अपनी पोस्ट में क़ालीबाफ़ ने कहा कि उन्होंने बातचीत से पहले इस बात पर ज़ोर दिया था कि ईरान के पास "अच्छी मंशा और इच्छाशक्ति" थी, लेकिन पिछले दो युद्धों के अपने अनुभवों की वजह से उसे "विरोधी पक्ष पर कोई भरोसा नहीं था."

    उनका कहना है कि ईरानी डेलीगेशन ने "आगे की पहल की, लेकिन विरोधी पक्ष आख़िरकार बातचीत के इस दौर में ईरानी डेलीगेशन का भरोसा जीतने में नाकाम रहा."

    उन्होंने आगे लिखा, "हम ईरान की सुरक्षा के चालीस दिनों की उपलब्धियों को मज़बूत करने की अपनी कोशिशों को एक पल के लिए भी नहीं रोकेंगे."

    क़ालीबाफ़ ने एक्स पर इस मुद्दे पर कई पोस्ट किए हैं.

    उन्होंने लिखा, “बातचीत काफ़ी विस्तृत थी और इसे आसान बनाने के लिए हम पाकिस्तान को धन्यवाद देते हैं.”

  4. ईरान के साथ बातचीत बेनतीजा रहने पर रूसी राजनयिक ने अमेरिका से ये कहा

    मिखाइल उल्यानोव

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    इमेज कैप्शन, मिखाइल उल्यानोव ने पूछा है कि क्या अमेरिकी उपराष्ट्रपति कुछ ही घंटों में इस जटिल मुद्दे के समाधान की उम्मीद कर रहे थे (फ़ाइल फ़ोटो)

    इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए में रूस के प्रतिनिधि ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सवाल किया है.

    आईएईए में रूस के प्रतिनिधि मिखाइल उल्यानोव ने ईरान के साथ समझौता न होने के बारे में जेडी वेंस की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा, "क्या उपराष्ट्रपति को वास्तव में उम्मीद थी कि इतने जटिल और बहुआयामी मुद्दे पर कुछ ही घंटों में समझौता हो जाएगा?"

    एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि समझौता तभी संभव है जब एक पक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हो (जो इस मामले में नहीं है).

    उल्यानोव ने आगे कहा, "अगर अमेरिकी पक्ष समझौता चाहता है, तो उसे विशेषज्ञ स्तर पर कई दौर की बातचीत के लिए तैयार रहना होगा. कूटनीति में यह एक बुनियादी प्रक्रिया है."

    इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हुआ है.

    उन्होंने कहा, ''हम यहां से एक बहुत ही आसान प्रस्ताव देकर जा रहे हैं कि यही हमारा अंतिम और बेस्ट ऑफ़र है. हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं."

    इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, "हम 21 घंटे से इस पर हैं लेकिन बुरी ख़बर ये है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके."

  5. 'तब तक ज़िंदा रहें, जब तक आप काम कर सकते हैं'

  6. हैती के एक टूरिस्ट स्पॉट पर भगदड़ में कम से कम 30 लोगों के मारे जाने की आशंका, माया डेविस

    हैती किला

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    इमेज कैप्शन, यह हादसा हैती के उत्तर में बने क़िले के पास हुआ है (फ़ाइल फ़ोटो)

    हैती के एक मशहूर टूरिस्ट स्पॉट पर शनिवार को हुई भगदड़ में कम से कम 30 लोगों के मारे जाने की आशंका है.

    हैती के नॉर्ड डिपार्टमेंट के सिविल प्रोटेक्शन के प्रमुख जीन हेनरी पेटिट ने बताया कि यह घटना शनिवार को लाफेरियर सिटाडेल (जो एक यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है) में सालाना ईस्टर जमावड़े के दौरान हुई.

    उन्होंने चेतावनी दी कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है.

    प्रधानमंत्री एलिक्स डिडिएर फिल्स-एम ने कहा कि यह घटना उत्तरी शहर मिलोट में "एक टूरिस्ट इवेंट के दौरान हुई, जिसमें कई युवा शामिल थे."

    उन्होंने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और प्रभावित लोगों की मदद के लिए "सभी संबंधित अधिकारियों" को तैनात कर दिया गया है.

    स्थानीय मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि 19वीं सदी के इस क़िले की स्थापना की याद में आयोजित इस इवेंट का सोशल मीडिया पर प्रचार किए जाने के बाद, यहाँ छात्रों और पर्यटकों की भारी भीड़ जुटी थी.

    बताया जा रहा है कि भगदड़ की शुरुआत इसके एन्ट्री गेट के पास हुई थी और भारी बारिश शुरू होने से स्थिति और भी बिगड़ गई.

    सिटाडेल लाफेरियर, जिसे सिटाडेल हेनरी के नाम से भी जाना जाता है, का निर्माण क्रांतिकारी हेनरी क्रिस्टोफ ने हैती को फ्रांस से आज़ादी मिलने के कुछ ही समय बाद करवाया था.

    इस क़िले को बनाने में एक दशक से भी ज़्यादा का समय लगा था और यह कैरिबियन सागर में स्थित इस नए द्विपीय देश को हमलों से बचाने के लिए बनाए गए कई किलों का एक अहम हिस्सा था. तब से यह जगह हैती की आज़ादी का प्रतीक बन गई है.

  7. भारतीय इलाक़े को चीन की ओर से नया नाम देने पर विदेश मंत्रालय ने जताई कड़ी आपत्ति

    रणधीर जायसवाल

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    इमेज कैप्शन, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन के क़दम को आपसी रिश्ते को बिगाड़ने वाला बताया है (फ़ाइल फ़ोटो)

    भारत ने चीन की ओर से उन जगहों का नया नाम देने पर कड़ी आपत्ति जताई है जो भारत का हिस्सा हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस मुद्दे पर भारत का बयान साझा किया है.

    इस संबंध में मीडिया के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत, चीन की ओर से उन जगहों को मनगढ़ंत नाम देने के किसी भी शरारती प्रयास को पूरी तरह से ख़ारिज करता है, जो भारतीय क्षेत्र का हिस्सा हैं."

    विदेश मंत्रालय ने कहा, "झूठे दावे करने और मनगढ़ंत बातों वाले चीन के ऐसे प्रयास इस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश समेत ये जगहें और क्षेत्र हमेशा से भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य अंग रहे हैं और हमेशा रहेंगे."

    "चीन की ओर से की गई ये हरकतें, भारत-चीन के आपसी संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के लिए चल रहे प्रयासों को कमज़ोर करने वाली हैं. चीन को ऐसी हरकतों से बचना चाहिए, जो संबंधों को बिगाड़ती हैं और आपसी समझ को बेहतर बनाने के प्रयासों को नुक़सान पहुँचाती हैं."

    समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ चीन ने अपने शिनजियांग प्रांत में, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा के पास एक नया ज़िला बनाया है.

    सेनलिंग नाम का यह ज़िला, काराकोरम पर्वतमाला के पास स्थित है, जो इसके रणनीतिक महत्व को दर्शाता है.

    पीटीआई का कहना है, "पिछले साल भारत ने हीन और हेकांग ज़िलों के निर्माण को लेकर चीन के सामने विरोध दर्ज कराया था. भारत ने कहा था कि इन ज़िलों का कुछ इलाक़ा उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अधिकार क्षेत्र में आता है."

    "हीन ज़िले में विवादित अक्साई चिन पठार का एक बड़ा हिस्सा शामिल है. यह लद्दाख का वह हिस्सा है जिस पर चीन ने 1962 के युद्ध में कब्ज़ा कर लिया था, और तब से यह भारत-चीन सीमा विवाद का एक मुख्य मुद्दा बना हुआ है."

  8. 'बम गिरने से ज़मीन कांप गई': क्या कहते हैं ईरान से लौटे तमिलनाडु के मछुआरे

  9. अमेरिकी रक्षा मंत्री ने फ़ारस की खाड़ी को कहा अरब की खाड़ी, ईरान की तीखी प्रतिक्रिया

    पीट हेगसेथ

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने 'अरब की खाड़ी' शब्द का इस्तेमाल किया था

    अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से 'फ़ारस की खाड़ी' के लिए 'अरब की खाड़ी' शब्द के प्रयोग पर ईरानी अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.

    ईरान के उपराष्ट्रपति अब्दुलकरीम होसैनज़ादेह ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "अलेक्जेंडर और मंगोलों के सेनापति भी फ़ारस की खाड़ी का 2500 साल पुराना नाम नहीं बदल सके, आप एक कप्तान से ज़्यादा कुछ नहीं हैं."

    होसैनज़ादेह ने लिखा है, "क्या आप अपनी युद्ध भड़काने वाली परियोजना की नाकामी को लेकर चिंतित हैं? क्या आप अरब देशों का शोषण करना चाहते हैं? आपसे नहीं, लेकिन मैं अपने अरब भाइयों से यह उम्मीद करता हूँ कि वे अपना पैसा ऐसे व्यक्ति के भ्रम पर ख़र्च न करें जो उनकी रक्षा नहीं कर सकता."

    इससे पहले ऑस्ट्रिया के वियना स्थित ईरानी दूतावास ने भी अमेरिकी रक्षा मंत्री के एक्स पोस्ट में "अरब खाड़ी" शब्द के इस्तेमाल पर प्रतिक्रिया व्यक्त की.

    दूतावास ने लिखा, "यह कोई संयोग नहीं है कि पीट हेगसेथ को ईरान के विरुद्ध युद्ध में और ख़ासकर होर्मुज़ स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर, करारी हार का सामना करना पड़ा. उनकी मुख्य समस्या ये थी कि उन्होंने होर्मुज़ स्ट्रेट को ग़लत जगह पर खोजा."

    "उन्हें यह नहीं पता था कि वह फ़ारस की खाड़ी में स्थित है. हमारी विनम्र सलाह है कि वे हर सुबह दस बार 'फ़ारस की खाड़ी' दोहराएं. इससे शायद उन्हें अगला युद्ध जीतने में मदद न मिले, लेकिन कम से कम वे सही जगह पर तो पहुंच जाएंगे."

    इससे पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक्स पर सेंटकॉम (अमेरिकी सेंट्रल कमांड) का एक बयान साझा किया और उसके एक अंश का ज़िक्र करते हुए लिखा, "विध्वंसक पोत यूएसएस फ्रैंक ई पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी अरब की खाड़ी में एक व्यापक मिशन के हिस्से के रूप में काम कर रहे हैं."

    उन्होंने लिखा, "इसका मक़सद यह सुनिश्चित करना है कि यह जलमार्ग इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की बिछाई गई समुद्री माइन्स को ख़त्म करना है."

    हालाँकि ईरान ने अमेरिका के इस दावे से इनकार किया है.

  10. 'ऐसा लग रहा है फिर मेरी माताजी चली गई हैं': आशा भोसले को कैसे याद कर रही है फ़िल्म इंडस्ट्री

  11. अब तुर्की के ख़िलाफ़ इसराइल की बयानबाज़ी की वजह क्या है?

  12. ईरान और अमेरिका की बातचीत बेनतीजा रहने पर ब्रिटेन के पीएम ने की ये अपील

    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर

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    इमेज कैप्शन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने अमेरिका-ईरान बातचीत के नाकाम रहने के बाद अपनी सलाह दी है (फ़ाइल फ़ोटो)

    इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद मध्य पूर्व के हालात को लेकर संदेह बना हुआ है.

    शांति वार्ता की नाकामी के बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने अमेरिका और ईरान से 'कोई रास्ता निकालने' की अपील की है.

    डाउनिंग स्ट्रीट ने जानकारी दी है कि प्रधानमंत्री स्टार्मर ने ईरान और अमेरिका दोनों से अपील की है कि वे "कोई रास्ता निकालें."

    ओमान के सुल्तान के साथ बातचीत में स्टार्मर ने कहा कि सीज़फ़ायर जारी रहना "बेहद ज़रूरी" है और "सभी पक्षों ने आगे किसी भी तरह के तनाव से बचने की कोशिश की है."

    ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटफ़ोर्ड ने बीबीसी के 'संडे विद लॉरा कुएन्सबर्ग' कार्यक्रम में कहा कि ईरान में युद्ध ख़त्म करने के लिए शुरुआती बातचीत का बिना किसी समझौते के टूट जाना "निराशाजनक" है.

    स्ट्रीटफ़ोर्ड ने इस संघर्ष में शामिल न होने के ब्रिटेन के फ़ैसले का बचाव किया.

    इससे पहले पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई.

    इसके बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल अपने-अपने देश रवाना हो चुके हैं.

  13. आशा भोसले बड़ी बहन लता मंगेशकर से तुलना पर क्या सोचती थीं, सुनिए आर्काइव इंटरव्यू

  14. 'होर्मुज़ ईरान के क़ब्ज़े में है और इसका टोल टैक्स तो चुकाना ही होगा'- ईरान

    होर्मुज़ स्ट्रेट

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    इमेज कैप्शन, होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण उसके लिए एक ताक़त बनकर उभरा है (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिका और ईरान के बीच लागू सशर्त संघर्षविराम का एक मुख्य हिस्सा, इस समुद्री रास्ते से जहाज़ों का सुरक्षित गुज़रना रहा है. यह दोनों पक्षों के लिए एक अहम मुद्दा है.

    इस समुद्री मार्ग से आम दिनों में दुनिया का क़रीब 20% तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) गुज़रता है.

    ईरान की संसद के उपाध्यक्ष हाजी बाबाई ने कहा है कि यह स्ट्रेट ईरान के लिए एक 'अति संवेदनशील सीमा' है.

    'इस्लामिक प्रोपेगेशन ऑर्गनाइज़ेशन' से जुड़ी 'मेहर न्यूज़ एजेंसी' के मुताबिक़ बाबाई का कहना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट पूरी तरह से ईरान के कब्ज़े में है और "इसका शुल्क रियाल में ही चुकाना होगा."

    रियाल ईरान की मुद्रा है.

    इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ज़ोर देकर कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट "जल्द ही खुल जाएगा."

    अमेरिका की 'सेंट्रल कमांड' ने भी शनिवार को बताया कि नौसेना के दो विध्वंसक जहाज़ों ने, जलमार्ग को समुद्री सुरंगों (सी माइन्स) से मुक्त कराने के एक बड़े अभियान के तहत, "होर्मुज़ को पार किया है."

    लेकिन ईरान ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया है कि ये दोनों जहाज़ उस इलाक़े से गुज़रे थे.

    समाचार एजेंसी एएफ़पी ने ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के हवाले से बताया, "ईरान के 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' ने कहा है कि किसी भी सैन्य जहाज़ के होर्मुज़ से गुज़रने की कोशिश का सख़्ती से जवाब दिया जाएगा."

    शनिवार को ईरान ने दावा किया कि उसकी कड़ी चेतावनी के बाद अमेरिका का एक विध्वंसक जहाज़ होर्मुज़ स्ट्रेट से वापस लौट गया.

    इधर पाकिस्तान में ईरान के साथ घंटों चली बातचीत के बाद हुई अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने होर्मुज़ स्ट्रेट का ज़िक्र नहीं किया.

  15. अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में बातचीत कैसे आगे बढ़ी थी और अंत में क्या हुआ?, जैकब फ़िलिप्स, रिपोर्टर

    जेडी वेंस

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान में शांति वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अपने देश के लिए रवाना हो गया है

    पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे चली बातचीत बिना किसी नतीजे के ख़त्म हो गई. हालाँकि दोनों देशों के बीच कोई बातचीत हो पाएगी या नहीं, इसे लेकर भी शुरू से संदेह बना हुआ था.

    अनिश्चितता का दौर

    शुक्रवार को जब पाकिस्तान के इस्लामाबाद में सड़कें साफ़ की गईं और वहाँ सुरक्षा बढ़ाई गई थी, तब भी इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी कि क्या अमेरिका-ईरान शांति वार्ता आगे बढ़ पाएगी या नहीं.

    फिर इस मामले में हमें हलचल दिखाई देने लगी. शुक्रवार की आधी रात को ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुँचा. उनका स्वागत पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक़ डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने किया.

    इसके बाद शनिवार सुबह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस 'एयर फ़ोर्स टू' विमान से उतरे तो डार और मुनीर ने उनसे मुलाक़ात की.

    अलग-अलग और आमने-सामने की बातचीत

    इसके बाद दोनों पक्षों ने पाकिस्तानी प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाक़ात की. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि वे "रचनात्मक रूप से बातचीत करेंगे."

    फिर पाकिस्तान सरकार के सूत्रों ने बीबीसी को बताया और बाद में व्हाइट हाउस ने भी इसकी पुष्टि की कि इस्लामाबाद में आमने-सामने की त्रिपक्षीय बातचीत चल रही थी.

    देर रात तक चली बातचीत

    इस शांति वार्ता में दोनों पक्ष पूरी रात बातचीत में व्यस्त रहे, और इसके बारे में बहुत कम जानकारी सार्वजनिक की गई.

    पाकिस्तान पहुंचे ईरानी प्रतिनिधिमंडल की तस्वीर

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    इमेज कैप्शन, पाकिस्तान पहुंचे ईरानी प्रतिनिधिमंडल की तस्वीर

    नतीजा क्या रहा?

    रविवार सुबह पाकिस्तान में ईरानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने एक बयान जारी किया.

    इस बयान में बातचीत को "गहन (इन्टेंसिव)" बताया गया और अमेरिका से "अत्यधिक मांगों और गैरकानूनी अनुरोधों" को छोड़ने का आग्रह किया गया.

    इसके कुछ ही देर बाद उपराष्ट्रपति वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि अमेरिका ने अपनी 'सीमाएं' साफ़ कर दी थीं, लेकिन ईरान उसकी शर्तों पर सहमत नहीं हुआ.

    रविवार को दोनों प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गए हैं.

  16. नमस्कार!

    अब तक बीबीसी संवाददाता सुमंत सिंह आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे. अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.

    बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के पन्ने पर लगी कुछ अहम ख़बरें पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक्स पर क्लिक करें.

  17. नेतन्याहू की अर्दोआन पर टिप्पणी के बाद तुर्की के विदेश मंत्रालय ने जारी किया बयान

    नेतन्याहू और अर्दोआन

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    इमेज कैप्शन, तुर्की के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर अर्दोआन पर लगाए गए आरोपों को 'बेबुनियाद और झूठा' बताया है (फ़ाइल फ़ोटो)

    इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन पर टिप्पणी की है. इसके बाद तुर्की के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर नेतन्याहू पर निशाना साधा है.

    नेतन्याहू ने एक्स पर लिखा, "इसराइल मेरे नेतृत्व में ईरान के आतंकवादी शासन और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रखेगा. जबकि अर्दोआन उनका समर्थन करते हैं और अपने ही कुर्द नागरिकों का जनसंहार किया."

    इस पर तुर्की के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर अर्दोआन पर लगाए गए आरोपों को 'बेबुनियाद और झूठा' बताया है.

    तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा, "हमारे राष्ट्रपति पर इसराइली अधिकारियों की ओर से लगाए गए बेबुनियाद और झूठे आरोप उन सच्चाइयों से पैदा हुई असहजता का नतीजा हैं, जिन्हें हम हर मंच पर लगातार उठाते रहे हैं."

    बयान में आगे कहा गया, "तुर्की निर्दोष नागरिकों के साथ खड़ा रहेगा और यह सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा कि नेतन्याहू उनके किए गए अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराए जाएं."

    इसके अलावा तुर्की के विदेश मंत्रालय ने नेतन्याहू को 'इस दौर का हिटलर' भी कहा है.

  18. आशा भोसले का निधन, कार्डियक अरेस्ट के बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में थीं भर्ती

  19. ईरान और अमेरिका के बीच नहीं हो पाया समझौता

  20. जब स्कोरबोर्ड की गलती ने सुरेश रैना का दिल तोड़ा था