'एंबुलेंस थी, अस्पताल था, पर आसिम को मरना ही था'

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    • Author, वुसअतुल्लाह ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए, पाकिस्तान से

मुझे मालूम है कि ये कहानी आपको सिर्फ़ बोर करेगी, फिर भी पढ़ लें.

आसिम अपने दो साल के बच्चे को गाड़ी में साथ बिठाकर कुछ सौदा ख़रीदने घर से बाहर निकला.

अभी वो दुकान के सामने पहुंचकर गाड़ी से बाहर निकलने ही वाला था कि मोटरसाइकिल पर दो लड़के तेजी से आए.

एक ने आसिम की कनपटी पर पिस्तौल रखकर मोबाइल फ़ोन छीनना चाहा. डाकू शायद अनाड़ी थे, लिहाजा छीनाझपटी में गोली चल गई और आसिम के सीने में घुस गई.

लड़के फ़रार हो गए. कार के इर्द गिर्द भीड़ लग गई. आसिम होश में था, उसने अपने एक दोस्त को फ़ोन किया. दोस्त दस मिनट के अंदर पहुंच गए.

पीछे पीछे एंबुलेंस भी आ गई. आसिम को एंबुलेंस में डालकर अब्बासी शहीद अस्पताल ले जाया गया, जो उस जगह से 15 मिनट की ड्राइव पर था.

अब्बासी के इमरजेंसी वालों ने कहा कि मरीज को आप जिन्ना हॉस्पीटल ले जाएं, क्योंकि हमारे पास सीने के गहरे ज़ख्म की जांच का कोई इंतज़ाम नहीं.

एंबुलेंस जिन्ना अस्पताल की ओर चल पड़ी जो कि कराची के दूसरे कोने पर 40 मिनट की दूरी पर था.

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जिन्ना अस्पताल के इमरजेंसी वाले डॉक्टरों ने कहा कि गोली चूंकि दिल के करीब लगी है लिहाजा आसिम को फौरन दिल के वार्ड में ले जाया जाए.

आसिम को वॉर्ड तक पहुंचाने में पंद्रह मिनट और लग गए.

दिल के वॉर्ड के इंचार्ज डॉक्टर ने कहा हम तो सिर्फ़ हॉर्ट अटैक के मरीजों को देखते हैं, ये तो जख़्मी मरीज हैं, हमें इन्हें नहीं देख सकते. बेहतर होगा कि आप इन्हें लियाकत नेशनल अस्पताल ले जाएं.

आसिम के दोस्तों ने बक-बक झक-झक में टाइम बर्बाद करने के बजाए एंबुलेंस को लियाकत नेशनल अस्पताल की ओर मुड़वा लिया.

जिस वक्त एंबुलेंस गेट के अंदर दाखिल हो रही थी, आसिम की आंखें बंद हो गईं. लियाकत अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड के डॉक्टर ने कहा, बहुत देर हो गई सर, मरीज़ इंटरनल ब्लीडिंग की वजह से मर चुका है.

आसिम के दोस्तों ने पूछा कि डेथ सर्टिफिकेट कहां से बनेगा. डॉक्टर ने कहा जिस इलाके में मरीज रहता था, उस इलाके के बड़े अस्पताल से.

इसके बाद एंबुलेंस ने एक बार फिर अब्बासी शहीद अस्पताल का रुख़ किया जहां आसिम को जख़्मी होने के बाद सबसे पहले ले जाया गया था.

अब्बासी अस्पताल वालों ने चंद कागज़ भरवाने के बाद 20 मिनट में 38 साल के आसिम की मौत का सर्टिफिकेट बना दिया.

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आसिम की मौत की ख़बर किसी न्यूज़ चैनल पर नहीं आई, किसी अख़बार में नहीं छपी, क्योंकि ढाई करोड़ आबादी वाले कराची में रोजाना ऐसी 36 ख़बरें रूलती फिरती हैं.

आज सिंध के मुख्यमंत्री ने कराची में आम जनता के लिए एक और आधुनिक अस्पताल बनाने की ख़ुशखबरी सुनाई है. सब चैनल इसे ब्रेकिंग न्यूज़ के तौर पर चला रहे हैं.

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