माओ की पुण्यतिथि मनाने की थोड़ी छूट

इमेज स्रोत, Getty
- Author, जेफ़ ली
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
चीन सरकार 9 सितंबर को माओत्से तुंग की 40वीं पुण्यतिथि मनाने के लिए उनके समर्थकों को एक सीमा तक छूट दे रही है. उसका ज़ोर माओत्से तुंग के देश के विकास और आधुनिक बनाने में योगदान पर है.
इसी साल मई में माओ के सांस्कृतिक क्रांति के 50 साल पूरे हुए हैं.
लेकिन चीन सरकार का ताज़ा कदम उनके आंदोलन के 50 साल पूरे होने के मौक़े से काफ़ी अलग है.
माओत्से तुंग की नीतियों के सकारात्मक पहलुओं के बजाय इस बार पूरे देश में कई संगठनों ने उनके जीवन पर सेमिनार और प्रदर्शनी के आयोजन की योजना बनाई है.
कुछ ऐसी ही नीति चीन की आधिकारिक मीडिया की है जिसका मानना है कि माओ का एक सरल मूल्यांकन नहीं किया जा सकता है.

इमेज स्रोत, Getty
चीन में, ख़ासकर पुरानी पीढ़ी के लोग 'पीपुल्स रिपब्लिक' के संस्थापक माओ को काफ़ी सम्मान देते हैं.
हालांकि वहां किसी बड़े उत्सव का आयोजन नहीं किया गया है, लेकिन चीन में हज़ारों लोग माओ को श्रद्धांजलि देने के लिए बीज़िग में उनकी समाधि पर गए हैं.
चीन के राष्ट्रीय अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने 7 सितंबर को लिखा कि कई लोग उन्हें आज भी एक 'महान व्यक्तित्व' के तौर पर याद करते हैं, जिन्होंने विरोधी सिपाहसलारों को हराया और देश को एकजुट किया.
हांगकांग के 'फीनिक्स टीवी' ने 8 सितंबर को एक व्यक्ति शी शिचन का प्रोफ़ाइल दिखाया, जिन्होंने 1959 में माओ से मुलाकात की थी और फिर उन्होंने दिवंगत माओ की याद में एक संग्रहालय बनवाया.
उन्होंने बताया, "माओ ने चीन को आज़ादी दिलाई और हमें घर और ज़मीन दी. अपनी आने वाली पीढ़ी को यह सब बताने के लिए हमें उस महान इंसान को ज़रूर याद करना चाहिए."

इमेज स्रोत, AP
सरकार से मान्यता प्राप्त 'पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस' ने भी इस सालगिरह को देखते हुए, 5 सितंबर को माओ की पुरानी तस्वीरें जारी की हैं.
इन तस्वीरों में माओ के जीवन के अलग अलग पड़ाव को दिखाया गया है, मसलन चीन-जापान युद्ध, चीन का गृह युद्ध और देश के औद्योगिकरण के दौर की तस्वीरें.
हालांकि दिवंगत माओ के ज़्यादातर समर्थक चीन में सांस्कृतिक क्रांति में उनकी भूमिका पर बात नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि उसका चीन की सरकारी मीडिया ही आलोचना करती रही है.
चीन में कम्यूनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली ने चीन में सांस्कृतिक क्रांति के पचास साल पूरे होने पर एक संपादकीय प्रकाशित किया था, जिसमें सांस्कृतिक क्रांति को सैद्धांतिक और व्यवहारिक तौर पर पूरी तरह से ग़लत बताया था.
वह अवसर तो मूल रूप से बिना किसी ख़ास आयोजन के गुज़र गया. हालांकि उस वक़्त वामपंथी संगठनों ने कुछ बैठकें की थी, लेकिन उसे सीधे तौर पर सांस्कृतिक क्रांति से नहीं जोड़ा गया.
सेंसर करने वालों ने सोशल मीडिया से भी उन संदेशों को हटा दिया, जो सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ नज़र आ रही थीं. पीपुल्स डेली के संपादकीय ने भी माओ को विवादों से दूर रखा.

उसने 1981 के एक प्रस्ताव की चर्चा की, जिसमें माओ के आंदोलन को 'ग़लती से शुरू किया गया आंदोलन' बताया गया था और कहा गया कि यह प्रस्ताव माओ के विचारों के महत्व को पूरी तरह से स्पष्ट करता है.
दूसरी तरफ चीन मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी माओ की तरह दिखाने की कोशिश कर रहा है.
स्वतंत्र सूत्रों के मुताबिक 2013 में जिनपिंग के सत्ता संभालने के बाद से ही चीन सरकार या सरकार नियंत्रित मीडिया ने माओ के दौर के सांस्कृतिक मुद्दों को अपनाया है, ताकि जिनपिंग को नए रूप में पेश किया जा सके.
माओ के दौर के एक क्लासिकल गीत 'द ईस्ट इज़ रेड 'का नया वर्ज़न तैयार कर जिनपिंग की तारीफ भी की गई. हांगकांग स्थित एप्पल्स डेली में 23 अप्रैल को यह रिपोर्ट आई थी.
नए गीत की एक लाइन है, "जिनपिंग ने माओ को अपनाया, उन्होंने देश के पुनरुत्थान के लिए संघर्ष किया".

इमेज स्रोत, AP
मार्च के महीने में तिब्बती प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को भी एक राष्ट्रीय बैठक में जिनपिंग की छवि बनाने वाले बैज पहने हुए देखा गया था, ठीक उसी तरह जैसा कि चीन में सांस्कृतिक क्रांति के दौरान पहनना ज़रूरी था.
चीन के हेनान प्रांत में जनवरी में माओत्से तुंग की 15 मंज़िला ऊंची मूर्ति बनाई गई. यह चीनी नेताओं के बीच सरकार की उस अपील के बावज़ूद हुआ, जिसमें किसी व्यक्ति की उपासना बंद करने को कहा गया था.
(<link type="page"><caption> बीबीसी मॉनिटरिंग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/monitoring" platform="highweb"/></link> दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCMonitoring" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> फेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/BBCMonitoring" platform="highweb"/></link> पर भी पढ़ सकते हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi " platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi " platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












