कम नींद लेकर भी नेता कैसे रहते हैं तरोताज़ा?

बिल क्लिंटन

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    • Author, माइकल एस जैफी
    • पदनाम, यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ्लोरिडा

नींद हमारे लिए उतनी ही ज़रूरी है, जितनी हवा पानी और खाना. अगर नींद पूरी ना हो तो इसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है.

जब हम अपने नेताओं को रात दिन काम करते देखते हैं तो ज़ेहन में सवाल उठता है कि ये सोते कब हैं? सोते हैं भी या नहीं?

अगर सोते हैं तो कितनी देर सोते हैं? अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा छह घंटे सोने की कोशिश करते हैं. हालांकि वो अक्सर इतनी नींद नहीं ले पाते.

अमरीका के ही पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का भी यही कहना है कि वो पांच से छह घंटे ही सो पाते हैं.

सवाल ये है कि इतना कम वक्त सोने से क्या इन नेताओं के काम पर इसका असर नहीं पड़ता?

सवाल ये भी है कि किसी इंसान को कितनी देर सोना चाहिए कि उसकी सेहत ठीक रहे?

न्यूरोलॉजिस्ट मानते हैं कि नींद हमारी सेहत और काम दोनों पर अपना असर डालती है.

बहुत कम ऐसे लोग हैं जो चार या पांच घंटे नींद लेकर ही दिन भर के काम निपटा लेते हैं.

डोनल्ड ट्रम्प

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लेकिन, ज़्यादातर लोगों को इससे ज़्यादा नींद लेने की ज़रूरत होती है. ताकि वो बेहतर ढंग से काम कर सकें.

नींद का हमारी सेहत पर क्या असर पड़ता है इस पर बहुत से तजुर्बे किये गए. पाया गया कि नींद हमारे दिमाग़ और सेहत पर गहरा असर डालती है.

अमरीकन 'एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन' और 'द स्लीप रिसर्च सोसाइटी' के मुताबिक़ अच्छी सेहत के लिए औसतन सात घंटे सोना ज़रूरी है.

जो लोग इससे कम सोते हैं वो अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करते हैं और देर-सवेर उन्हें इसके नतीजे भुगतने पड़ते हैं.

मोटे तौर पर नींद को दो हिस्सों में बांटा गया है. रैपिड आई मूवमेंट स्लीप और नॉन-रैपिड आई मूवमेंट.

रेपिड आई मूवमेंट नींद का वो दौर है जब हम गहरी नींद में होते हैं, जब हम ख़्वाबों की दुनिया में चले जाते हैं.

नींद का ये दौर हमारी याददाश्त को मज़बूत बनाने के लिए बेहद ज़रूरी है. नींद का दूसरा दौर होता है नॉन-रेपिड आई मूवमेंट स्लीप.

जानकारों ने नींद की इस स्टेज को और दो हिस्सों में बांटा है- लाइट स्लीप (N1और N2) और डीप स्लो स्लीप वेव (N3).

स्लो वेव स्लीप हमारे शरीर को सेहतमंद रखने के लिए ज़रूरी है.

नींद क्यों ज़रूरी?

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दिन भर काम करने के बाद शरीर के जो हिस्से सुस्त पड़ जाते हैं उन्हें फिर से तरो-ताज़ा बनाने के लिए आराम ज़रूरी है.

नींद के इस दौर में हमारे शरीर की कोशिकाओं को ख़ुद को ताज़ा दम करने का मौक़ा मिलता है.

यानी शरीर और दिमाग दोनों को सेहतमंद रखने के लिए अच्छी नींद का आना ज़रूरी है.

बढ़ती उम्र के साथ कमज़ोर होती याददाश्त पर भी बहुत से रिसर्च किए गए हैं.

ये पाया गया कि जो लोग अपनी नींद के साथ नाइंसाफ़ी करते हैं उनकी याददाश्त जल्दी कमज़ोर होती है.

दरअसल जब हम सो जाते हैं तब हमारा दिमाग जमा की गई बातों में कांट छांट करता है.

जो बातें काफ़ी पुरानी हो जाती हैं उन्हें साफ़ करके दिमाग की स्टोरेज मेमरी में जगह बनाता है.

कम नींद लेने से सेहत पर इसका घातक असर होता है. ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है. मोटापा बढ़ जाता है.

आप शुगर के मरीज़ हो जाते हैं. दिल का दौरा पड़ने का डर बढ़ जाता है.

नींद क्यों ज़रूरी?

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'द अमरीकन स्लीप फाउंडेशन' ने इस बारे में कई तजुर्बे किए हैं. इनमें से कई के नतीजे डराने वाले हैं.

एक रिसर्च के मुताबिक़ नींद पूरी ना होने की वजह से लोग अक्सर ड्राइव करते हुए बहक जाते हैं और हादसों को दावत देते हैं.

एक और रिसर्च में ये भी पाया गया है कि जो एथलीट भरपूर नींद लेते हैं, उनका परफॉर्मेंस बेहतर हो जाता है.

सभी खिलाड़ियों को पर्याप्त नींद दिलाई जा सके इसके लिए पेशेवर सलाहकार टीम में रखे जाते हैं.

आप कुछ छोटी-छोटी बातों का ख़याल रखकर अच्छी नींद लेने में कामयाब हो सकते हैं.

पहला, जब आपके पास काम ज़्यादा होता है तो उसे पूरा करने के लिए आप देर तक जागते हैं.

भले ही आपको नींद आ रही हो तब भी आप जागते हैं. नींद को खुद से दूर करने के लिए चाय-कॉफ़ी पीना शुरू कर देते हैं.

लेकिन ये सही नहीं है. दरअसल देर तक जागने के बाद आपका दिमाग़ थकने लगता है. वो आराम करना चाहता है.

नींद क्यों ज़रूरी?

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एडोनोसिन दिमाग में सोने की इच्छा को तेज़ करते हैं. लेकिन चाय-कॉफी में पायी जाने वाली कैफ़ीन, नींद की राह में रोड़े अटकाते हैं.

आपको नींद से दूर कर देते हैं. ऐसा मत कीजिए नींद आए तो फ़ौरन सो जाइए.

दूसरा, पॉवरनैप भी बहुत बार आपके लिए ज़रूरी और फ़ायदेमंद होती है.

दफ़्तर में जब नींद आ रही हो तो बीस-तीस मिनट की पावर नैप या झपकी आपके बड़े काम की होती है.

अमरीका के 'नेशनल स्लीप फ़ाउंडेशनट के मुताबिक़ कैनेडी से लेकर रीगन और जॉर्ज बुश तक, कमोबेश हर अमरीकी राष्ट्रपति, काम के दौरान झपकी लेते थे.

तीसरा, आज तकनीक का ज़माना है. आपके पास लैपटॉप है. स्मार्ट फोन हैं. ये आपको हर वक़्त उलझाए रखते हैं.

यहां तक कि कंपनी का काम ख़त्म करके आने के बाद भी घर से ही दफ़्तर का काम चलता रहता है.

कंपनी की तरफ से आपको ज़रूरी रिमाइंडर्स आते रहते हैं. आप मोबाइल और लैपटॉप पर मसरूफ़ रहते हैं.

नींद का ख़्याल नहीं करते. ये ग़लत बात है. आप काम के साथ ही अपनी नींद को भी बराबर की तरजीह दें.

क्योंकि अगर काम ज़रूरी है तो अच्छी सेहत भी ज़रूरी है. और अच्छी सेहत में नींद का बड़ा रोल है. सेहत अच्छी रहेगी तो ज़िंदगी भी खुशहाल रहेगी.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20160729-how-do-politicians-get-by-on-so-little-sleep" platform="highweb"/></link>, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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