तुर्कीः हज़ारों सड़कों पर, अमरीका की संयम की सलाह

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तुर्की में तख़्तापलट की नाकाम कोशिश के बाद, इस्तांबुल समेत कई शहरों में लोकतंत्र के समर्थन में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं.

राष्ट्रीय ध्वज फहराते, गीत गाते हुए इस्तांबुल और अंकारा की सड़कों पर लोग राष्ट्रपति रेचप तैयप अर्दोआन के प्रति समर्थन जता रहे हैं.

इंस्ताबुल का मुख्य चौराहा नारों से गूंज रहा है. लोग चिल्ला रहे हैं, 'सैनिकों को न तो अपनी जमीन छीनने देंगे और न ही लोकतंत्र.'

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आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक तख़्तापलट में आम लोगों और पुलिस सहित 161 लोग मारे गए हैं, जबकि 104 सैनिकों की मौत हुई है. घायलों की संख्या 1,440 है.

उधर अमरीका ने तुर्की से कहा है कि तख्तापलट की नाकाम कोशिश के बाद तुर्की की सरकार संयम बरते.

फ़तहुल्लाह गुलेन

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने कहा है कि अमरीका के इस घटना से जुड़े होने के दावे नैटो के दोनों सहयोगियों के रिश्ते ख़राब कर सकते हैं.

राष्ट्रपति रेचप तैयप अर्दोआन ने तख़्तापलट के लिए अमरीका में रहने वाले 75 वर्षीय धर्म प्रचारक फ़तहुल्लाह गुलेन को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके प्रत्यर्पण की मांग की है.

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हालांकि फ़तहुल्लाह गुलेन ने इस तख़्तापलट में किसी भी भूमिका से इंकार किया है.

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तुर्की में कुछ जनरलों समेत हज़ारों सैन्य अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया है.

सरकारी मीडिया के मुताबिक 2,745 जजों को हटाया गया है, इनमें तुर्की की उच्चतम अदालत के जज भी हैं.

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