ऑरलैंडो हमले के बाद अमरीका में उठे तीन सवाल

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
अमरीकी शहर ऑरलैंडो के एक नाइट क्लब में हुई गोलीबारी में क़रीब 50 लोगों की मौत के बाद अमरीकी लोग अब तीन बातों पर बहस कर रहे हैं.
पहली बात यह है कि फ़ोर्ट हूड, सैन बर्नारडिनो और ऑरलैंडो की गोलीबारी में शामिल लोग पढ़े-लिखे थे, अच्छे परिवार से आते थे, अच्छी नौकरी कर रहे थे और अमरीका में वो तरक़्क़ी कर रहे थे.
लेकिन फिर भी वो किस वजह से चरमपंथ की ओर जा रहे हैं?
बहस इस बात को लेकर है कि कितना मुश्किल है, ऐसे लोगों को रोक पाना जो केवल एक सोच से प्रभावित होकर हमले करते हैं.

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दूसरी बात जिस पर लोग बहस कर रहे हैं, वह है बंदूक. अमरीका में बहुत आसानी से कोई भी व्यक्ति बंदूक ख़रीद सकता है.
लोगों का कहना है कि अकेले दम पर हमला करने वालों को रोकना मुश्किल होगा. उनसे पूछताछ में कुछ नहीं निकल पाएगा. लेकिन अगर बंदूक को लेकर नियम कड़े होंगे तो उनके हाथों में बंदूकों को पहुंचने से रोका जा सकता है.
मीडिया में भी बंदूकों को लेकर बहस शुरू हो गई है. न्यूयॉर्क डेली न्यूज़ अख़बार ने अपने पहले पन्ने पर हेडिंग लगाई है, ''एनआरए सिक जेहाद''.
इस तरह अख़बार ने नेशनल राइफल एसोसिएशन पर हमला बोला है.
राष्ट्रपति बराक ओबामा अमरीका में गन कल्चर को क़ाबू करना चाहते हैं, लेकिन उनकी ऐसी कई कोशिशें अमरीकी कांग्रेस में नाकाम हो चुकी हैं.

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तीसरी बात यह है कि समलैंगिक समुदाय को लेकर भी अमरीका में बहस चल रही है. यहां एक बहुत बड़ा तबक़ा है, जो समलैंगिकता को धर्म के ख़िलाफ़ मानता है, समलैंगिकों से नफ़रत करता है.
उसका मानना है कि ऐसे लोगों को सबक़ सिखाया जाना चाहिए. ऑरलैंडो की गोलीबारी में एक ऐसे ही नाइट क्लब को निशाना बनाया गया जहां समलैंगिक पुरूष जाते हैं.
संदिग्ध हमलावर की पहचान 29 साल के उमर मतीन के रूप में हुई है. वो ऑरलैंडो के दक्षिण में सेंट लुसी काउंटी के फ़ोर्ट पियर्स शहर का रहने वाला था. वो पुलिस कार्रवाई में मारा गया.
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने भाषण में समलैंगिकों के अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता जताई है.

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राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गोलीबारी की इस घटना को 'दर्जनों बेगुनाह लोगों का भीषण नरसंहार' बताया है.
व्हाइट हाउस से जारी एक बयान में उन्होंने कहा, "शूटिंग की ये घटना आतंक की कार्रवाई है, नफ़रत की कार्रवाई है."
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