रिटायरमेंट के बाद शादी की सोच रहे हैं?

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इन दिनों पश्चिमी देशों में एक नया चलन देखने को मिल रहा है. ये चलन है रिटायरमेंट के बाद शादी का. लोग साठ की उम्र में नया जीवनसाथी चुन रहे हैं. उनके साथ जीने के वादे कर रहे हैं.
ब्रिटेन के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वहां साठ की उम्र में शादी करने वाले मर्दों की तादाद 25 फ़ीसदी तक बढ़ गई है. वहीं साठ या इससे ज़्यादा की उम्र के बाद शादी करने वाले महिलाओं की संख्या में 21 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा देखा गया है.
वहीं अमरीका के सरकारी आंकड़े भी यही कहानी कहते हैं. इनके मुताबिक़ 55 से 64 की उम्र के लोग, जिनकी शादी पहले हो चुकी होती है, वो दोबारा शादी करते हैं. वहीं 65 से ज़्यादा की उम्र के लोगों में से आधे दोबारा शादी कर रहे हैं.
उम्र के इस दौर में शादी करना कई मुश्किलें खड़ी कर सकता है. लेकिन, आप बेहतर समझदारी और तैयारी से इन चुनौतियों से आसानी से निपट सकते हैं.
इसमें सबसे बड़ी दिक़्क़त पैसे की साझेदारी और ज़िम्मेदारियों का बंटवारा होता है. आख़िर दोनों ही जीवनसाथी उम्र के उस दौर में शादी कर रहे होते हैं, जब उनके बच्चे और पोते-पोतियां होते हैं. उनके पास अच्छी ख़ासी संपत्ति जमा होती है. फिर विरासत का मसला भी सुलझाना होता है.
वॉशिंगटन के फाइनेंशियल प्लानर होवार्ड प्रेसमैन कहते हैं कि उम्र के साठवें दशक में शादी का फ़ैसला इमोशनल होकर नहीं करना चाहिए. बल्कि, किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले ठोस तरीक़े से प्रैक्टिकल चीज़ों को देखना चाहिए.

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सबसे पहले तो ये समझना चाहिए कि शादी के बाद आपकी जो संपत्ति है उस पर क्या असर पड़ेगा. आपकी कमाई में किसी और का भी साझा होगा. आपकी संपत्ति पर आपके साथी का भी हक़ होगा. हालांकि शादी का फ़ैसला लेते वक़्त लोग ये नहीं सोचते. मगर होना ये चाहिए कि पैसे के मामले पर सबसे पहले विचार कर लेना चाहिए.
शादी से पहले तैयारी को पूरा वक़्त दें. इस शादी से आपके परिवार पर क्या असर पड़ेगा, ये बात ठीक से समझ लें.
लोग अक्सर एक दूसरे की ख़्वाहिशों का ख़याल तो करते हैं, मगर ये नहीं सोचते कि आख़िर वो अपनी संपत्ति की साझेदारी कैसे करेंगे.
उम्र के इस दौर में लोग कभी भी गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं. इस हालत में आपके पैसे को लेकर फ़ैसले का हक़ आपके जीवनसाथी का ही होगा.
लेकिन अगर आप ये चाहते हैं कि जीवनसाथी से ज़्यादा आपके बच्चों, पोते-पोतियों का आपके पैसे पर हक़ हो, तो उन्हें ही अपना पावर ऑफ एटॉर्नी बनाएं.
अपने होने वाले जीवनसाथी से इस बारे में खुलकर चर्चा कर लें. हो सकता है कि शादी से पहले पैसे की बात करना ख़राब लगे. लेकिन शुरू में ही सारी बातें सुलझा लेने से आगे की ज़िंदगी आपकी ही आसान होगी.
बुढ़ापे में शादी करनी है, तो इलाक़े के क़ानूनों को भी समझना ज़रूरी है. आपकी संपत्ति की विरासत का मसला, नए क़ानूनी पचड़े में न फंसे, इसके लिए आपको स्थानीय क़ानूनों की समझ ही नहीं, अच्छे से जानकारी होनी चाहिए.
कुछ वक़्त साथ गुज़ारने के बाद हो सकता है कि लोग अपनी संपत्ति को आधा-आधा बांटने की सोचें. इस बारे में क़ानून क्या कहता है, ये बात पहले से जान लेनी ज़रूरी है.

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सिर्फ़ शादी ही नहीं, तलाक़ और मौत की सूरत में संपत्ति के बंटवारे के क़ानून भी अलग जगहों पर अलग-अलग होते हैं.
फिर बुजुर्गों को जो सरकारी मदद मिलती है वो शादी की सूरत में बंद भी हो सकती है. अमरीका के कई राज्यों में ऐसे नियम हैं कि कोई बुजुर्ग अकेले रहता है तो उसे सरकारी मदद मिलेगी. मगर वो साठ की उम्र के बाद शादी कर लेता है तो सरकार के ऊपर उसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं होगी.
तो बेहतर होगा कि साठ की उम्र के बाद शादी करने से पहले आप स्थानीय क़ानूनों को अच्छे से समझ लें. इस मामले में किसी फाइनेंशियल प्लानर की मदद लेना ज़्यादा बेहतर विकल्प है.
फिर ये समझना भी ज़रूरी है कि दो लोगों की आमदनी और संपत्ति एक होने की वजह से आपके ऊपर कितनी टैक्स देनदारी बढ़ेगी या घटेगी? क्योंकि आपकी आमदनी दो गुनी होगी, तो आप पर टैक्स भी बढ़ेगा. ये कितना होगा, इसका पता भी लगा लें.
किसी विवाद से बचने के लिए बेहतर होगा कि शादी से पहले ही एक समझौता कर लें. इसमें ये तय कर लें कि किसी विवाद या अलगाव की सूरत में किसके हिस्से में कितनी रकम और क्या संपत्ति आएगी. इससे दिमाग़ी सुकून भी मिलेगा और शादी न चलने की सूरत में आसानी से अलगाव भी हो जाएगा.
अपनी संपत्ति को आप अपने गुज़रने के बाद किन लोगों को देना चाहते हैं, इस बारे में फ़ैसला शादी से पहले ही लेना बेहतर होगा. वरना शायद आप अपने मन की न कर पाएं. क्योंकि फ़ैसला लेने की प्रक्रिया में आपका जीवनसाथी भी शामिल होगा. ये ज़रूरी नहीं कि उसकी राय आपसे मिलती ही हो.

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अच्छा होगा कि अपनी वसीयत और संपत्ति के काग़ज़ात तैयार करा लें. ताकि किसी विवाद की सूरत में ये सिरदर्द भी ख़त्म रहे. ज़रूरी नहीं कि आप नई शादी से होने वाले बच्चों को ही अपनी संपत्ति में से हिस्सा दें.
ये भी हो सकता है कि आप अपनी पहली शादियों से हुए बच्चों को ही विरासत सौंपें. तो ये फ़ैसले भी शादी से पहले लेने ज़रूरी हैं.
अगर ऐसा नहीं करते हैं तो किसी एक की मौत की सूरत में उसकी संपत्ति दूसरे जीवनसाथी को मिलेगी. फिर मरने वाले के पहले के बच्चे इस पर विवाद खड़ा करेंगे. अच्छा रहेगा इस विवाद को शादी से पहले ही ख़त्म कर दिया जाए.
हालांकि फ्रांस जैसे कुछ देशों में बच्चों को ही विरासत में हिस्सा मिलता है. क़ानूनन उन्हें अपने मां-बाप की संपत्ति में से तयशुदा हिस्सा मिलता है. भले ही उनके मां-बाप के दूसरी शादी से बच्चे हो गए हों. फ्रांस के क़ानून के मुताबिक़, दूसरी शादी की सूरत में नए जीवनसाथी का हक़ मारा जाता है.
शादी के बाद भी आपको कुछ करने की ज़रूरत है. जैसे अपने बैंक खातों और बीमा पॉलिसी की पड़ताल करना. उसमें आपने किसे नॉमिनी बनाया हुआ है. ये भी देख लें.
शायद आपको कुछ बदलाव करने की ज़रूरत महसूस हो. अगर लगता है कि आपको नॉमिनी बदलने की ज़रूरत है तो ऐसा फ़ौरन कर डालें. अगर संपत्ति को कुछ हिस्सों में बांटने की ज़रूरत है, तो वो भी अपने नए जीवनसाथी के साथ मिल-बैठकर तय कर लें.

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ये सब काम करने से पहले अपने परिवार के साथ बैठकर बातचीत करना बेहतर होगा. शादी से पहले ऐसा करना ज़्यादा मुनासिब होगा. लेकिन अगर शादी से पहले नहीं हो पाता, तो शादी के फ़ौरन बाद ये काम कर लें. ताकि आपके बच्चों को पता चल सके कि आपके पैसों का, आपकी संपत्ति का क्या हो रहा है. उन्हें भरोसे में लेंगे तो आपकी टेंशन ही कम होगी. शायद आपके बच्चों के मन में कुछ सवाल हों, तो उनकी शंकाएं भी दूर हो जाएंगी.
कोशिश यही करनी चाहिए कि परिजनों से खुलकर, सच-सच बात कहें और सुनें. अगर कोई क़ानूनी अड़चन है तो उस बारे में भी बच्चों को बता देना चाहिए. आप आगे चलकर कुछ करने का इरादा रखते हैं तो उस मामले में भी बच्चों को भरोसे में लेना बेहतर होगा.
तभी आप बुढ़ापे में शादी का लुत्फ़ ले सकेंगे.
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