अफ़ग़ानिस्तान में 6 तालिबान लड़ाकों को फांसी

फांस की सज़ा

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अशरफ़ ग़नी के 2014 में राष्ट्रपति बनने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में पहली बार छह तालिबान क़ैदियों को फांसी दी गई है.

राष्ट्रपति के महल से कहा गया है कि इन लोगों ने नागरिक और सार्वजनिक सुरक्षा के ख़िलाफ़ गंभीर अपराध किए थे.

पिछले महीने राजधानी काबुल में हमलों में 64 लोगों की मौत के बाद राष्ट्रपति ग़नी ने तालिबान को कड़ा जवाब देने का वादा किया था.

उन्होंने कहा था कि तालिबान लड़ाकों को क़ानून के तहत सज़ा दी जाएगी जिसमें फांसी भी शामिल है.

अफ़ग़ान टीवी के मुताबिक जिन्हें फांसी दी गई उनमें से दो क़ैदी 2011 में राष्ट्रपति बुरहानुद्दीन रब्बानी की हत्या में शामिल थे.

राष्ट्रपति दफ्तर के प्रवक्ता के मुताबिक जिन्हें फांसी दी गई है उन्हें कानून के तहत चलाए गए मुक़दमे में दोषी पाया गया.

तालिबान

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इस बीच, तालिबान ने हेलमंद प्रांत के मुख्य शहर लश्कर गाह में पुलिस नाके पर हमला किया है.

तालिबान ने दो नाकों पर हमला कर 15 सुरक्षा अधिकारियों की हत्या करने का दावा किया है. लेकिन पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ में 14 लड़ाकों की मौत हुई है.

अफ़ीम की खेती तालिबान के लिए आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत है.

पिछले हफ्ते एक अमरीकी जनरल ने अफ़ीम की बम्पर फ़सल की आशंका जताते हुए कहा था कि इससे हमलों में बढ़ोतरी हो सकती है.

तालिबान अफ़गानिस्तान सरकार के साथ होने वाली शांति वार्ता से भी पीछे हट चुका है.

तालिबान का कहना है कि जब तक देश से विदेशी सेना नहीं हटेगी तब तक वो शांति वार्ता में शामिल नहीं होगा.

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