क्या चैटिंग ऐप ने ईमेल की जगह ले ली है?

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    • Author, कैथरीन लॉसन
    • पदनाम, बिज़नेस रिपोर्टर

अपने बॉस के साथ फ़ेसबुक पर दोस्त बनना या सहकर्मियों के साथ दफ़्तर में ही चैटिंग आजकल खासी लोकप्रिय है.

कॉर्पोरेट ईमेल के ख़ौफ़ से बचने का भी यह रास्ता बनता जा रहा है.

दफ़्तर में आपसी संचार को आसान बनाने के लिए चैटर, स्लैक, यैमर और साथ ही फ़ेसबुक जैसे चैटिंग ऐप का इस्तेमाल हो रहा है.

रिसर्च कंपनी- मार्केट्स एंड मार्केट्स के मुताबिक़ सोशल सॉफ़्टवेयर का बाज़ार वर्ष 2019 में मौजूदा करीब 330 खरब से बढ़कर 528 खरब रुपए हो जाएगा.

यह बात सही है कि आंतरिक संचार के लिए 20 साल पहले ही कंपनी अस्तित्व में आ गई थी, लेकिन मोबाइल के अनुकूल मैसेजिंग एप की बाढ़ आने से इसकी जगह अब मोबाइल ने ले ली है.

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जनवरी 2015 में फेसबुक ने अपना नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म फेसबुक एट वर्क लांच किया था और अब उन्होंने हाल फिलहाल में इससे जुड़ा चैट एप वर्क चैट लांच किया है.

ऐसा लगता है कि फेसबुक अपने डेढ़ खरब यूजर्स की बदौलत कॉरपोरेट मार्केट के साथ-साथ निजी क्षेत्रों पर भी काबिज होना चाहता है.

फेसबुक ने हेनकेन, लैगार्देरे और हूटसूट सहित छोटी-बड़ी 300 कंपनियों के साथ अनुबंध किया है.

फेसबुक का अबतक का सबसे बड़ा करार रॉयल बैंक ऑफ़ स्कॉटलैंड (आरबीएस) के साथ हुआ है.

आरबीएस में डिजाइन के डायरेक्टर केवीन हैनले का कहना है कि यह अलग-अलग व्यापारिक गतिविधियों के साथ एक साथ काम करने में मददगार है.

उनका कहना है, "फेसबुक एट वर्क अधिक पारदर्शी, कामकाजी और सहयोगात्मक संस्कृति के विकास में एक प्रमुख भागीदार है."

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दुनियाभर में फेसबुक के साथ सहभागिता के मामलों को देखने वाली जूलियन कोडोरनु का कहना है कि फेसबुक सिर्फ संचार का माध्यम नहीं बल्कि उत्पादकता बढ़ाने वाला माध्यम भी है.

फेसबुक एट वर्क आम फेसबुक की ही तरह काम करता है.

अब सवाल उठता है कि क्या संचार के इन नए तरीकों ने ईमेल की उपयोगिता वाकई ख़त्म कर दी है?

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आलोचक कहते हैं कि ईमेल एकतरफा संचार का माध्यम है. भेजने वाले को यह नहीं पता चलता कि भेजा गया संदेश कितना प्रासंगिक है या उसे कितना समझा गयाय इसी तरह ईमेल पाने वाले अपना काफी वक्त अनचाहे ईमेल छांटने में लगाते हैं.

दफ्तरों के अंदर संचार में सोशल मीडिया ऐप के इस्तेमाल से जुड़ी एक बड़ी समस्या है जिसे लेकर कंपनियां अपने फैसले पर एक बार फिर से विचार कर सकती हैं.

वो समस्या है डेटा के सुरक्षा से जुड़ी हुई. क्या सेवा प्रदान करने वाली कंपनियां संवेदनशील व्यापारिक बातचीत का रिकॉर्ड अपने पास रख रही हैं.

सेफ हार्बर समझौते को यूरोपियन यूनियन की ओर से खारिज करने का मतलब यह है कि कंपनियां यह नहीं मान सकती हैं कि अमरीकी सेवा प्रदाता कंपनियां पर्याप्त सुरक्षा प्रदान कर रही हैं.

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