ब्रितानी सांसद चाहते हैं मोदी से सवाल

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ब्रिटेन के 20 से अधिक सांसदों ने संसद में प्रस्ताव रखा है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन कश्मीर में मानवाधिकार हनन का सवाल उठाएं.

एक दूसरे प्रस्ताव में 2002 गुजरात दंगों में मारे गए तीन ब्रितानी मुसलमानों के क़ातिलों को सज़ा न मिलने पर जवाब मांगने को कहा गया है.

हाउस ऑफ़ कॉमन्स

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ब्रितानी संसद के हाउस ऑफ़ कॉमन्स में 3 नवंबर को रखे गए अर्ली डे मोशन पर 14 सांसदों के हस्ताक्षर हैं.

मोदी हीथ्रो

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इसमें प्रधानमंत्री, विदेश और राष्ट्रमंडल मामलों के मंत्री और सरकार से मांग की गई है कि वह भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यात्रा के अनूठे मौके का फ़ायदा उठाकर उनके सामने कश्मीर का मुद्दा उठाएं.

प्रस्ताव में कैमरन से मोदी पर कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान और कश्मीर के लोगों के साथ मिलकर काम करने के लिए दबाव डालने को कहा गया है ताकि दशकों से जारी मानवाधिकार हनन, वैमनस्य, हमले और हिंसा को ख़त्म किया जा सके.

मोदी विरोध, सिडनी

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इस प्रस्ताव पर लेबर पार्टी के डेविड एंडरसन और दूसरे सासंदों, कंज़रवेटिव के फ़िलिप डेविस, स्टीवर्ट जैकसन और स्कॉटिश नेशनल पार्टी के मार्टिन डे, क्रिस लॉ, पॉल मोनेग़न और डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट नेशनल पार्टी के गाविन रॉबिन्सन, जिन शैनन और ग्रीन पार्टी की कैरोलाइन लुकास, सोशल डैमोक्रेटिक और लेबर पार्टी के मार्क डुर्कान के हस्ताक्षर हैं.

चार नवंबर को हाउस ऑफ़ कॉमन्स में रखे गए अर्ली डे मोशन 656 पर 12 सांसदों के हस्ताक्षर हैं.

इसमें कहा गया है कि ब्रिटेन में प्रवेश पर प्रतिबंध ख़त्म होने के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन आ रहे हैं. कहा गया है कि वो साल 2002 में गुजरात के मुख्यमंत्री थे.

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तब गुजरात में हुई सांप्रदायिक हिंसा में तीन ब्रितानी पर्यटक साकिल दाऊद, सईद दाऊद और मोहम्मद असवत की हत्या कर दी गई थी और इमरान दाऊद की हत्या की कोशिश की गई थी.

यह बहुत चिंता की बात है कि उन हत्याओं के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा नहीं दिलाई जा सकी है और इन हत्याओं की जांच और हत्यारों को सज़ा दिलाने की कोशिशों को बाधित और हतोत्साहित किया गया है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान, उन ब्रितानी नागरिकों के परिवारों की ओर से सरकार को जवाब लेना चाहिए. प्रस्ताव में विदेश और राष्ट्रमंडल मामलों के मंत्रियों और अधिकारियों से इंसाफ़ और हत्यारों को सज़ा सुनिश्चित करवाने के लिए काम करने करने को कहा गया है.

इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि सईद दाऊद के अवशेष ब्रिटेन में उनके परिवार के पास वापस लाना तय किया जाए ताकि वह शांति से रह सकें.

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