बिकिनी आयलैंड निवासी क्यों जाना चाहते हैं अमरीका

द्वीप

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    • Author, मैट मैक्ग्राथ
    • पदनाम, पर्यावरण संवाददाता, बीबीसी न्यूज़

समंदर के बढ़ते जलस्तर के कारण बिकिनी आईलैंड के 1,000 निवासियों ने अमरीका में बसाए जाने के लिए आवेदन किया है.

ये वही निवासी हैं, जिन्हें क़रीब 70 साल पहले परमाणु बम के परीक्षण के लिए मूंगे की चट्टानों वाले बिकिनी एटोल द्वीप से अमरीका ने हटा दिया था.

उन्हें मार्शल द्वीपों में से एक पर बसाया गया लेकिन यहां अब विशाल ज्वार और तूफ़ान आने लगे हैं.

यहां के निवासियों ने वॉशिंगटन से ट्रस्ट के फ़ंड की शर्तों में बदलाव करने को कहा है ताकि उन्हें अमरीका में बसने की इजाज़त मिल सके.

साल 1946 में अमरीका बिल्कुल अलग-थलग पड़े प्रशांत महासागर में बिकिनी एटोल पर परमाणु हथियारों का परीक्षण करना चाहता था इसलिए इसके सैकड़ों निवासियों को वहां से हटा दिया गया था.

इसके बाद यहां 23 परीक्षण किए गए जिनमें अमरीका के सबसे बड़े हथियार ब्रावो हाइड्रोजन बम का परीक्षण भी शामिल था.

परमाणु परीक्षण

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इन निवासियों को अमरीकी सरकार के साथ हुए एक समझौते के तहत बनाए गए पुनर्वास फ़ंड के तहत 1948 तक मार्शल शृंखला के किली द्वीप पर बसाया गया.

इस फ़ंड को द्वीप पर उनके लिए घर बनाने के लिए ख़र्च किया गया. लेकिन अब निवासी कह रहे हैं कि ऊंची लहरों के समय उनके घर तक में पानी भर जाता है.

साल 2011 में यहां भीषण बाढ़ आई थी और इस साल भी बाढ़ ने काफ़ी नुक़सान किया.

द्वीप के नीचे नमक का जमाव बढ़ रहा है जिससे खेती और पानी की आपूर्ति को ख़तरा पैदा हो गया है.

इस साल की शुरुआत में द्वीप के रनवे प पूरी तरह पानी भर गया था.

मार्शल आयलैंड्स के विदेश मंत्री टोनी डी ब्रम का कहना है, “बिकिनी के लोग हमारे पास आए थे और इस ट्रस्ट फ़ंड को केवल द्वीप पर ही नहीं बल्कि अमरीका में बसने के लिए इस्तेमाल किए जाने के प्रस्ताव को अमरीका के पास भेजने के लिए कहा था.”

समंदर

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उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण किली द्वीप रहने लायक़ नहीं रह गया है, इस आधार पर अपील भेजी गई है.

अमरीका के गृहमंत्रालय ने द्वीप निवासियों का समर्थन किया है और अब वो एक विधेयक कांग्रेस में लाने जा रहे हैं.

अमरीका और इन निवासियों के बीच हुए समझौते के तहत किसी भी निवासी को अमरीका में किसी भी समय तक रहने, काम करने और अध्ययन करने की इजाज़त है.

मार्शल द्वीप की सरकार का कहना है कि बिकनी द्वीप के निवासियों का अनुभव दिखाता है कि वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन को लेकर एक नए समझौते की ज़रूरत है.

सरकार का मानना है कि जलवायु परिवर्तन को लेकर अगले महीने के अंत में पेरिस में शुरू होने वाले वैश्विक सम्मेलन में कोई नई समझौता हो जाएगा.

इस द्वीप के लिए एक प्रमुख बात ये है कि समझौते में कहा गया है कि तापमान वृद्धि को उद्योग पूर्व स्थिति से 1.5 डिग्री सेल्सियस के नीचे ही रखा जाएगा.

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