हज यात्रियों की संख्या सीमित करने की ज़रूरत?

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सऊदी अरब के मक्का में गुरुवार को भगदड़ मच गई थी जिसमें हज के लिए गए 700 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

आख़िर ऐसी क्या कमियां रहीं जिसकी वजह से यह हादसा हुआ.

बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने सऊदी अरब के प्रमुख अख़बार 'अरब न्यूज़' के संपादक सिराज वहाब से बात की और इस हादसे के कारण जानने की कोशिश की.

बातचीत के अंश

क्या हज के लिए जगह छोटी पड़ रही है?

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हज के लिए मुख्य जगह है मीना शहर. यह एक सीमित क्षेत्र है और धर्म के अनुसार जो लोग हज करने आते हैं उन्हें इसी क्षेत्र में रहना होता है. मुश्किल यह कि आप इस जगह में कोई विस्तार नहीं कर सकते.

ऐसे में किसी ना किसी को यह फ़ैसला लेना होगा कि दुनियाभर के जो मुसलमान हज के लिए आते हैं, उन्हें एक निश्चित कोटा दिया जाए.

इतनी भीड़ कैसे इकट्ठी हो जाती है?

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हर मुल्क में हर एक हज़ार मुस्लिम पर एक को हज करने का कोटा मिलता है. ऐसे में अगर भारत में 18 करोड़ मुसलमान हैं तो 1.80 लाख मुसलमानों को हज करने का कोटा मिलेगा.

लेकिन मुसलमानों की जनसंख्या बढ़ती जा रही है और साथ ही कोटा भी. लेकिन उसके हिसाब से यहां जगह बहुत कम है.

यहां बहुत ज़्यादा लोगों को नहीं रखा जा सकता. इसलिए भारत और पाकिस्तान से जो हाजी आते हैं उनमें से कई को मीना से कुछ दूरी पर रखा जाता है.

इस वजह से इनमें से कई नाराज़ भी हो जाते हैं क्योंकि धर्म के अनुसार उन्हें मीना में ही ठहरना होता है. ऐसे में यह एक बहुत बड़ी चुनौती है.

जगह क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है?

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अगर यहां बहुत बड़ा मैदान होता या फिर यहां कुछ नया निर्माण किया जाता तो बात कुछ और ही होती. लेकिन मीना एक पहाड़ी इलाका है.

यह इलाका दो पहाड़ों के बीच में है. ऐसी स्थिति में यहां ज़्यादा कुछ बदलना भी मुमकिन नहीं है.

ऐसे में ज़ाहिर है कि अगर समझदारी से काम नहीं लिया गया तो आने वाले समय में मुश्किलें और भी बढ़ेंगी.

प्रमुख चुनौती क्या है?

यहाँ बड़ी राजनीतिक चुनौती है. इस बात को तय करना होगा कि यहां अधिकतम कितने लोग आ सकते हैं और उतने ही लोगों को आने की अनुमति दी जाए.

लेकिन इसके लिए यहां की सरकार को दुनियाभर के लोगों को अपना पक्ष समझाना होगा.

खुद हिन्दुस्तान में डेढ़ लाख लोग हैं जिन्होंने पिछले तीन साल में हज के लिए आवेदन किया है लेकिन अभी तक वो नहीं आ पाए हैं. सिर्फ 1.36 लाख ही आ पाए हैं.

क्या तैयारी में कुछ कमी रह गई थी?

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इससे पहले 2006 में भी भगदड़ हुई थी. ये भगदड़ कंकड़ मारने वाली जगह पर हुई थी.

कंकड़ मारने वाली जगह बहुत छोटी थी जिसके चलते हादसा हुआ. उसमें एक नीचे का तल था और एक ऊपर का तल था.

इस हादसे में क़रीब 300 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद इस कॉम्पलेक्स को पांच मंजिल का बना दिया गया. उसमें बाहर निकलने और अंदर आने के कई रास्ते बनाने के साथ कई उम्दा इंतज़ाम किए गए.

लेकिन गुरुवार का हादसा जहां हुआ शायद अधिकारियों को उसकी आशंका ही नहीं थी कि यह हादसा हो सकता है. वो इसकी कल्पना ही नहीं कर पाए.

अब अगले साल भी लोग यहां बड़ी संख्या में फिर से पहुंचेंगे ऐसे में उन्हें इन ग़लतियों को दूर करना होगा.

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