क्या नेपाल में हस्तक्षेप कर रहा है भारत?

    • Author, अमृता शर्मा और तेस यिन ली
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

नए संविधान को लेकर नेपाल में बढ़ती हिंसा पर भारत ने चिंता जताई है. भारत की इस चिंता पर नेपाली मीडिया और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया हुई है.

नेपाल के तराई के इलाक़ों में पिछले कुछ दिनों से <link type="page"><caption> जारी प्रदर्शन</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/international/2015/09/150922_nepal_trai_protest_ra" platform="highweb"/></link> में अब तक 46 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

भारत सरकार ने सोमवार को नेपाल में अपने राजदूत को दिल्ली बुलाकर <link type="page"><caption> विचार-विमर्श किया</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2015/09/150922_india_calls_ambassador_from_nepal_for_urgent_talks_dil" platform="highweb"/></link>.

नेपाल के प्रमुख अख़बार इस पर नाराज़गी जताते हुए इसे भारतीय हस्तक्षेप के उदाहरण के रूप में देख रहे हैं.

गंभीर समस्या

नेपाल के जनकपुर में नए संविधान को लेकर प्रदर्शन करते लोग.

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अख़बार कांतिपुर लिखता है, ''निश्चित रूप से संविधान लिखते समय हमारे देश में गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं. हमें इन समस्याओं का समाधान करना होगा.''

अख़बार कहता है, ''इस परिदृश्य में एक पड़ोसी देश का आना या उसे हमारी आंतरिक समस्याओं और चुनौतियों के समाधान के लिए आमंत्रित करना स्वीकार्य नहीं है.''

नेपाल

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अंग्रेज़ी के अख़बार 'दी काठमांडू पोस्ट' ने अपनी संपादकीय में लिखा है, ''दिल्ली के लिए यही अच्छा होगी कि वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए किसी सीमा रेखा को पार करता हुआ ना दिखे. हो सकता है उसके लिए यह मुश्किल हो कि वह कुछ राजनीतिक दलों के साथ अपने राजनयिक संबंध और एक ध्रुवीकृत समाज के कुछ तबक़ों का समर्थन खो दे.''

अंग्रेज़ी के ही एक अन्य अख़बार 'ला रिपब्लिका' में छपी एक ख़बर के मुताबिक़ नेपाल के पूर्व राजनयिक भारत की इस प्रतिक्रिया को अनुचित मानते हैं.

अमरीका में नेपाल के पूर्व राजदूत शंकर शर्मा के हवाले से अख़बार ने लिखा है, ''अगर भारत ख़ुद को अपने पड़ोसी देशों को नियंत्रित करने में लगा देता है तो इस तरह के क़दम से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में ग़लत संदेश जाएगा.''

अख़बार 'दी राइजिंग नेपाल' कहता है, ''भारत ने अभी तक नए संविधान का समर्थन नहीं किया है, जो कि तराई में अशांति बढ़ने के रूप में परेशानियों को आमंत्रित करेगा.''

नेपाल क नए संविधान के साथ राष्ट्रपति रामबरन यादव.

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नेपाल के बहुत से लोग सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रिया जता रहे हैं.

ट्विटर पर 22 सितंबर को बहुत देर तक हैशटैग #बैकऑफ़इंडिया ट्रेंड कर रहा था. इस हैशटैग के साथ 1 लाख 80 हज़ार से अधिक ट्वीट किए गए.

तराई में जारी हिंसा की वजह से राजधानी काठमांडू और दूसरे प्रमुख शहरों में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है.

नेपाल ईंधन के लिए भारत पर निर्भर है. बहुत से ट्रक ऑपरेटर प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हो रही हिंसक झड़पों की वजह से नेपाल जाने से डर रहे हैं.

ईंधन की आपूर्ति

2014 अगस्त में नेपाल के दौरे पर मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री सुशील कोइराला से मुलाक़ात की.

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इमेज कैप्शन, 2014 अगस्त में नेपाल के दौरे पर मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री सुशील कोइराला से मुलाक़ात की.

नेपाल में ट्विटर इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों ने भारत पर जान-बूझकर ईंधन की आपूर्ति रोकने का आरोप लगाया है.

वहीं कुछ लोग पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति रोकने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यापार की नैतिकता पर विचार करने को कह रहे हैं. उनका कहना है ''हम ईंधन ख़रीद रहे हैं, भीख नहीं मांग रहे हैं''.

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करते नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला और अन्य नेता.

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मंगलवार को 10 हज़ार से अधिक ट्वीट में नरेंद्र मोदी और भारतीय प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल @narendramodi और @pmoindia को टैग किया गया.

कुछ लोगों ने उनसे साफ़-साफ़ कहा है कि वे नेपाल की संप्रभुता के मुद्दे पर दख़ल देना बंद करें.

भारत और भारतीय

एक ट्वीट में कहा गया है, ''मेरे लोग, मेरा मधेस, मेरा तराई, मेरी समस्या, मेरा नेपाल, मेरा संविधान, मेरा गर्व. भारत वापस जाओ.''

नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए नई दिल्ली में प्रदर्शन करते नेपाली.

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वहीं @nawarang ने ट्वीट कर कहा है, ''हमें कम करके न आंकें. पहले आपने हमेंं फुसलाने की कोशिश की. फिर हमे धमकी दी? हम अपने देश को अपने तरीक़े से चलाएंगे.''

हालांकि ट्विटर पर कुछ नेपालियों का कहना है कि उनका ग़ुस्सा भारत सरकार से है भारतीयों से नहीं.

ट्विटर हैंडल @sushprj से सुष्मिता ने ट्वीट किया, ''प्रिय भारतीयों, हम आपके ख़िलाफ़ नहीं हैं, हम भारतीय राजनीति के ख़िलाफ़ है, जो कि हमारे आंतरिक मामलों में दख़ल देने की कोशिश कर रही है."

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