बुडापेस्ट रेलवे स्टेशन पर फंसे हैं शरणार्थी

रेलवे स्टेशन के बाहर जमा शरणार्थी.

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हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में एक रेलवे स्टेशन के आगे सैकड़ों शरणार्थी फंसे हुए हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि हंगरी ने यूरोप की तरफ़ जाने वाली अपनी ट्रेनों को बंद कर दिया है.

शरणार्थियों को यूरोप में घुसने से रोकने के लिए हंगरी ने यह क़दम उठाया है. उसका कहना है कि उसने केवल यूरोपीय संघ के क़ानून का पालन किया है.

हंगरी के इस स्टेशन से ट्रेनें ऑस्ट्रिया और जर्मनी की तरफ़ जाती थीं. अब यूरोप में शरण लेने की उम्मीद में आए शरणार्थी यहां फंसे हुए हैं.

फ़ैसले का बचाव

हंगरी सरकार के एक प्रवक्ता ने इस फ़ैसले का बचाव करते हुए ग्रीस पर नाराज़गी जताई. उन्होंने कहा कि ग्रीस ने हज़ारों शरणार्थियों को बिना किसी रजिस्ट्रेशन के यूरोप में घुसने दिया.

प्रदर्शन करते शरणार्थी.

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स्लोवेनिया के ब्लेड में हंगरी के विदेश मंत्री पीटर सियार्तो ने कहा कि यह साबित हो गया है कि कुछ यूरोपीय नेता यूरोपियन मूल्यों और हितों के ख़िलाफ़ काम कर रहे हैं. ख़ासतौर पर वहां जहाँ शरणार्थी समस्या है.

उन्होंने कहा कि उन देशों को बदनाम किया जा रहा है जो यूरोप में शरणार्थियों की बाढ़ रोकने के लिए काम कर रहे हैं. हंगरी के विदेश मंत्री ने यूरोपीय संघ की विशेष बैठक बुलाने की मांग की.

दुनिया के अलग-अलग देशों में जारी युद्ध और गृहयुद्ध की वजह से भाग रहे हज़ारों लोग उत्तरी यूरोप पहुँचकर शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं.

शरणार्थियों का प्रदर्शन

अपना रेलवे टिकट दिखाते शरणार्थी.

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यूरोप पर शरणार्थियों का दबाव इतना बढ़ गया है कि उसकी शरणार्थियों को सँभालने की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है.

इस बीच स्टेशन के बाहर शरणार्थी प्रदर्शन कर रहे हैं. एक शरणार्थी ने बीबीसी से कहा, ''कोई तो हमें बताए कि रास्ता क्या है. कोई भी हमारी हालत में हो सकता है. कृपया कोई तो रास्ता निकालिए."

बीबीसी के क्रिस मौरिस का कहना है कि यूरोपीय संघ के क़ानून के मुताबिक़ शरणार्थियों को यूरोप के उस देश में शरण मांगने की औचारिक कार्रवाई करनी होगी जहाँ वो सबसे पहले पहुंचे हैं. लेकिन यूरोप की सीमा पर मौजूद ग्रीस और इटली जैसे देशों का कहना है कि वो शरणार्थियों की बाढ़ के सामने काग़ज़ी कार्रवाई पूरी नहीं कर सकते है.

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