विस्थापितों की संख्या ने रिकॉर्ड तोड़ा

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संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों की एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनियाभर में युद्ध, संघर्ष या उत्पीड़न के कारण विस्थापित हुए लोगों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 83 लाख बढ़ी है.
सीरिया में चल रहे संघर्ष से सबसे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं.
संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों की एजेंसी यूएनएचसीआर के अध्यक्ष एंटोनियो गुतेरेस ने बीबीसी को बताया, "लोग यह समझते हैं कि मानवीय सहायता के लिए काम करने वाली संस्थाएं संकटों से निपट सकती हैं, लेकिन हक़ीकत यह है कि अब यह हमारे बस में नहीं हैं."
हज़ारों लोग बेघर

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गुतेरेस ने कहा कि पिछले साल हर दिन विस्थापित हो रहे लोगों की संख्या करीब 32 हज़ार थी, जो बढ़कर 2014 में 42500 हो गई है.
पिछले साल अपने ही देश में विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या तीन करोड़ 82 लाख थी.
यूक्रेन, नाइजीरिया और दक्षिण सूडान में चल रहे युद्ध के कारण यह संख्या बढ़ रही है.
सीरियाई संघर्ष के कारण 38 लाख शरणार्थी बने हैं तो 76 लाख विस्थापित लोग सीरिया में ही मौजूद हैं.
शरणार्थियों की सबसे बड़ी संख्या अफगानिस्तान और सोमालिया से आती है.
भूमध्यसागरीय संकट

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यूरोप में विस्थापितों की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है.
यूरोप के कई देश भूमध्यसागर पार कर आने वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या से जूझ रहे हैं.
यूरोस्टेट ने पिछले साल एक रिपोर्ट जारी की थी.
पिछले 12 महीनों में यूरोपीय देशों में पनाह मांगने वालों की संख्या-
यूएनएचसीआर ने कहा है कि जर्मनी में शरण मांगने वालों की संख्या सबसे ज़्यादा है.
रिपोर्ट लिखने वालों का कहना है कि उनके इस अध्ययन का अर्थ यह है कि दुनिया में 122 लोगों में से एक व्यक्ति या तो शरणार्थी है या आंतरिक विस्थापित है या दूसरे देशों में आश्रय चाहता है.
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