ईरान परमाणु समझौता 'इतना क़रीब कभी नहीं था'

इमेज स्रोत, epa
ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने एक यूट्यूब संदेश में कहा है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक समझौता कभी इतना क़रीब नहीं था.
जवाद ज़रीफ़ का कहना है कि ये समझौता मध्य पूर्व में चरमपंथ से निपटने जैसी साझा समस्याओं से निपटने के नए रास्ते खोलेगा.
अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी कह चुके हैं कि समझौते को लेकर 'प्रगति हुई है', लेकिन अभी बहुत काम होना बाक़ी है.
इस बीच रूस के मुख्य वार्ताकार सेरगेई रयाबकोव ने कहा है कि समझौते का 90 प्रतिशत से ज़्यादा मसौदा तैयार है.
'दबाव और ज़बरदस्ती'

इमेज स्रोत, US DEPARTMENT OF STATE
सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और रूस के साथ जर्मनी के प्रतिनिधि ईरान से बात कर रहे हैं.
वो चाहते हैं कि ईरान अपनी संवेदनशील परमाणु गतिविधियों को कम करे ताकि वो परमाणु हथियार न बना पाए.
हालांकि ईरान हमेशा से कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं. लेकिन वो चाहता है कि उसके ऊपर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जाएं.
अब 7 जुलाई की नई समयसीमा तक समझौते पर सहमति बनाने का प्रयास हो रहा है.
ज़रीफ़ ने शुक्रवार को जारी वीडियो संदेश में परमाणु वार्ता में 'ज़बरदस्ती और दबाव' को बंद करना होगा.
उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करने के लिए तैयार है और 'ये वार्ता कभी भी स्थायी परिणाम के क़रीब नहीं रही है.'
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












