ग्रीस कर्ज़ नहीं चुका पाया, अब आगे क्या?

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यूरोज़ोन के वित्त मंत्री ने मंगलवार को ग्रीस के बेलआउट को दोबारा आगे बढ़ाने से मना कर दिया. इससे पहले ग्रीस ने कहा था कि वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) से लिए गए कर्ज़ की 160 करोड़ डॉलर की क़िस्त चुकाने में असमर्थ है.

2001 के बाद ग्रीस ऐसा अकेला देश है जिसने कर्ज़ डिफॉल्ट किया है. इससे पहले 2001 में ज़िम्बॉब्वे आईएमएफ़ को कर्ज़ की क़िस्त नहीं चुका पाया था.

प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी ईमेल में कहा गया है, “ग्रीस सरकार ने अपनी वित्तीय जरूरत पूरी करने और इसके साथ ही कर्ज़ के सरलीकरण के लिए यूरोपियन स्टेबिलिटी मैकेनिज़्म (ईएसएम) के सामने दो साल के समझौते का प्रस्ताव रखा है.”

जनमत संग्रह पर नज़र

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बयान में कहा गया है, 'ग्रीस सरकार आख़िरी समय तक यूरोज़ोन के अंदर व्यावहारिक समाधान ढ़ूंढने की कोशिश करती रहेगी.”

ग्रीस में आर्थिक सहायता के लिए खर्च में कटौती और करों में बढ़ोतरी की शर्तों पर रविवार को जनमत संग्रह कराया जाएगा.

<link type="page"><caption> ग्रीस की ना यानी 'यूरोज़ोन से बाहर'</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/international/2015/06/150629_greece_eurozone_financial_crisis_adg" platform="highweb"/></link>

ग्रीस के प्रधानमंत्री एलेक्सिस त्सिप्रास ने आशंका जताई है कि ग्रीस को यूरोज़ोन से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा.

क्या हैं चार विकल्प

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तो दुनिया को जीतने वाले सिकंदर का देश ग्रीस अब किस राह पर चलेगा?

1- ग्रीस यूरोज़ोन के देशों, आईएमएफ़ और यूरोपियन सेंट्रल बैंक से बातचीत कर रहा है- बातचीत कामयाब रही तो ग्रीस यूरोज़ोन में बना रहेगा. हालाँकि ये इतना आसान नहीं है, क्योंकि ग्रीस को अपने साथ बनाए रखने के लिए उसके हिस्से का कर्ज़ यूरोज़ोन के देशों को भरना होगा, और इसके लिए उन्हें अपनी-अपनी संसदों से मंज़ूरी चाहिए होगी.

2- दूसरी संभावना है कि ग्रीस खर्च में कटौती और करों में बढ़ोतरी की शर्तों पर ‘हाँ’ कहे. लेकिन यहाँ भी पेच है. सत्ताधारी वामपंथी पार्टी सिरिज़ा लोगों से जनमत संग्रह में ना पर मोहर लगाने की अपील कर रही है. संभावना ये भी है कि अगर जनमत संग्रह हां में आता है तो प्रधानमंत्री त्सिप्रास इस्तीफ़ा दे सकते हैं.

एलेक्सिस त्सिप्रास

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3- अगर जनमत संग्रह का नतीजा ना निकलता है तो बहुत संभावना है कि ग्रीस यूरोज़ोन का हिस्सा न रहे. यानी ग्रीस को अपनी राष्ट्रीय मुद्रा अपनानी होगी. इसका स्पष्ट अर्थ है कि ग्रीस में आर्थिक अनिश्चितता के लंबे दौर की शुरुआत.

4- एक और संभावना है कि कुछ शर्तों के साथ ग्रीस यूरोज़ोन से बाहर निकले. तब ये संकट को कुछ कम तो करेगा, लेकिन खत्म नहीं. लोग अपनी मुद्रा बदलवाने के लिए बैंकों की तरफ दौड़ेंगे.

कई बाधाएं

<link type="page"><caption> ग्रीस संकट गहराया, बैंकों पर ताले</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/international/2015/06/150628_greece_banks_to_remain_close_adg" platform="highweb"/></link>

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एक बड़ा और अहम सवाल है. यदि ग्रीस यूरोज़ोन से बाहर न जाने पर अड़ जाए तो क्या होगा?

यूरोज़ोन से किसी सदस्य देश को निकालने की कोई प्रक्रिया निर्धारित नहीं है.

हाँ वे संधियों में बदलाव कर सकते हैं, लेकिन ये भी आसान नहीं है और कई देशों को इसके लिए अपने-अपने देशों में जनमत संग्रह करवाने होंगे.

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