193 देशों, 834 जगहों की यात्रा...अब कहां?

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- Author, डेव सेमिनारा एवं एली कॉब
- पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
दुनिया में सबसे ज़्यादा देशों और जगहों की सैर करने वाले डोनल्ड पेरिश ने ऐसा क्यों और कैसे किया?
अमरीका के डोनल्ड मॉल्टबाइ पेरिश जूनियर को 30 साल पहले इच्छा हुई की अपने देश के सभी 50 राज्यों के सैर करें. बस फिर क्या था? वे इस काम में जुट गए और जब ये लक्ष्य पूरा हुआ तो पेरिश ने संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 देशों की यात्रा की योजना बनाई.
193 देशों की यात्रा कोई मामूली योजना नहीं थी. चार साल पहले जब पेरिश मंगोलिया गए, तो उन्होंने अपने इस लक्ष्य को भी पूरा कर लिया. तब वे 66 साल की हो चुके थे.
अचरज की बात तो यह है कि डोनल्ड न तो बहुत धनी व्यक्ति हैं, न वो ट्रैवलिंग सेल्समैन हैं, न ही उन्हें किसी कंपनी ने केवल इसी काम पर लगा रखा है....
ऐसा कैसे संभव हुआ?
पेरिश दुनिया के हर भौगोलिक क्षेत्र की यात्रा कर चुके हैं.

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वो लिस्ट बहुत लंबी है जहाँ जहाँ पेरिश गए हैं. अमरीका के 50 राज्य, फ्रांस के 27 इलाके, चीन के 32 प्रांत, रुस के 83 राजनीतिक सबडिविजन, भारत के 28 राज्य, अर्जेंटीना के 23 प्रांत, जर्मनी के 16 राज्य, इटली के 20 इलाके, स्पेन के 19 सामुदायिक स्वायत्ता वाले इलाके और कई अन्य जगहें.
लेकिन उनका देश दुनिया की यात्राएं करने का शगल अब भी खत्म नहीं हुआ. वे बताते हैं, "मैंने तय किया कि मैं हर जगह जाऊंगा. लेकिन हर जगह से क्या मतलब होता है, इसलिए मैंने पहले अमरीका के ही 50 राज्यों को चुना, फिर 193 देशों को."
दुनिया भर के ट्रैवलरों के लोकप्रिय ट्रैवलर सेंचुरी क्लब के मुताबिक पृथ्वी में हर जगह घूमने का मतलब है 324 देशों या इलाक़ों की सैर करना, जो हर जगह को समेट लेते हैं. वहीं दूसरे क्लब मोस्ट ट्रैवल्ड पीपल के मुताबिक ऐसी जगहों की संख्या 875 है जबकि द बेस्ट ट्रैवल्ड के मुताबिक दुनिया को 1281 जगहों में बांटा जा सकता है.
हर जगह की यात्रा
मोस्ट ट्रैवल्ड पीपल साइट ने पेरिश को सबसे ज्यादा यात्रा करने वाले शख्स के तौर पर चुना है. वे इस साइट की 875 जगहों की सूची में 841 जगहों पर जा चुके हैं.
वे जिन जगहों पर नहीं जा पाए हैं, वो एक तरह से निर्जन क्षेत्र हैं जैसे दक्षिण प्रशांत महासागर में अमरीकी द्वीप जार्विस, ब्राजील के उत्तरी पूर्वी तट पर फैले 15 द्वीप और अन्य ऐसे ही ठिकाने.

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अब पेरिश 70 साल के हो चुके हैं. लेकिन वो अब भी पतले दुबले और ऊर्जा से भरे नज़र आते हैं. वे फिटबिट डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, जो उन्हें ये बताता है कि वे प्रत्येक दिन कितने कदम पैदल चले हैं. वे अपनी कमीज में हमेशा एक कलम भी रखते हैं. शिकागो के बाहरी इलाके में अपने घर के पास बने पार्क में बैठकर उन्होंने अपनी यात्राओं के बारे में बताया.
यात्रा ही पैशन
पेरिश कहते हैं, "ऐसा नहीं हुआ कि 10 साल की उम्र में मुझे ख्याल आया कि एक दिन दुनिया भर की सैर करेंगे. मैं बहुत व्यवस्थित हूं और मुझे मुश्किल समस्याओं का हल तलाशना अच्छा लगता है."
वे इन दिनों एमटीपी साइट की उन 34 जगहों की यात्रा की योजना बना रहे हैं, जहां वे नहीं जा पाए हैं. इनमें से ग़ज़ा पट्टी औऱ ग्वातनामो बे तक तो वो नहीं जा पाएंगे. राजनीतिक वजहों से इन्हें यात्रियों के लिए बंद कर दिया गया है और कुछ ऐसी जगहें हैं जहां जाना काफी खर्चीला है.
पेरिश कहते हैं, "अगर मैं अमीर होता है, तो दस लाख डालर का यॉट खरीदता और इन जगहों पर चला जाता. लेकिन मैं अमीर नहीं हूं."
अपनी बात को साबित करने के लिए वे अपनी पुरानी कार की ओर इशारा करते हैं जो 15 साल पुरानी एक्यूरा है और 1.4 लाख मील से ज़्यादा चल चुकी है.
पेरिश कहते हैं, "कुछ लोग पैसे कपड़ों और कारों पर खर्च करते हैं. मैं घूमने फिरने पर खर्च करता हूँ."
साल में 6 महीने यात्रा

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पेरिश ने शादी नहीं की है और न ही उनका ऐसा करने का कोई इरादा है. उनके मुताबिक इस वजह से वे हर साल छह से ज़्यादा महीने यात्राएं करते रहे हैं. वे कहीं से कोई स्मृति चिन्ह नहीं लेकर आते. उनके घर में विश्व का एक नक्शा दिखाई देता है जो उनके लिए पैशन जैसा है.
देश दुनिया घूमने का ये सिलसिला 1965 में शुरू हुआ. तब वे टेक्सास में कॉलेज छात्र थे. एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत उन्हें जर्मनी के हानाउ में मेटल फैक्ट्री में काम मिल गया, तो वो पहली बार विदेश गए.
इसके बाद उन्हें बैल लेबोरेटरीज़ में काम किया. इलेक्ट्रानिक स्विचिंग सिस्टम विकसित करने के करियर में उनका विदेश यात्राओं का दौर शुरू हो गया. लेकिन तब वे साल में कुछ ही हफ्तों के लिए सैर के लिए जा पाते थे.
2001 में रिटायर होने के लिए बाद उन्होंने सैर सपाटे को ही अपने जीवन का उद्देश्य बनाया. पूरी दुनिया घूम चुके पेरिश से जब हमने पूछा कि सबसे पसंदीदा जगह कौन सी थी, तो उनका जवाब था - ''मेरे घर में मेरी ईज़ी चेयर.''
ईराक़, ईरान, अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा
वैसे दुनिया भर की सबसे ज्यादा यात्रा करने वालों में वही लोग हैं जिन्होंने शादी नहीं की है या फिर पत्नी से डायवोर्स हो चुका है.
पेरिश उन जगहों पर गए हैं, जिनके बारे में कल्पना ही की जा सकती है. ऐसी ही एक जगह दक्षिण अटलांटिक महासागर का ट्रिस्टन डा चून्हा है, जिसकी आबादी केवल 300 है.

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यहां दक्षिण अफ्रीका पहुंचने के बाद एक सप्ताह की नौका यात्रा के जरिए पहुंचा जा सकता है. यह द्वीप किरबाती गणराज्य का हिस्सा है. पेरिश बताते हैं, "हम जिन जगहों पर गए हैं वहां बहुत कम लोग जाना चाहेंगे."
पेरिश हर साल में कुछ महंगी यात्राओं पर खर्च करते हैं. वे दक्षिण अटलांटिक महासागर में पांच सप्ताह तक क्रूज यात्रा पर जा चुके हैं. इसके अलावा वे 2014 में चेचन्या में एक्स्ट्रीम ट्रैवल कांफ्रेंस की यात्रा कर चुके हैं.
77 साल के बॉब बोनिफस शिकागो में अलार्म सिस्टम कंपनी के मालिक हैं. एमटीपी साइट पर वे दुनिया के नंबर दो ट्रैवलर हैं. वे 2006 के बाद से पेरिश के साथ हर यात्रा पर जाते हैं. इन दोनों की मुलाकात 2006 में तब हुई थी, जब पेरिश ईरान, इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा पर गए थे.
बॉब बोनफिस कहते हैं, "मेरी तो आठ अलग चीजों में दिलचस्पी है. लेकिन डॉन तो केवल यात्राओं के बारे में ही सोचते हैं."
पासपोर्ट की 13 कापियां भर गईं
डोनल्ड पेरिश कहते हैं, "मैं जितना हो सकता है उतना दुनिया को ज़्यादा से ज़्यादा देखना चाहता हूं. इसलिए मेरा ध्यान यात्राओं पर लगा है."

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वैसे पेरिश पर इस बात का कोई असर नहीं है कि वे दुनिया के नंबर एक यात्री बने हुए हैं. वे कहते हैं, "अगर मेरा ये लक्ष्य होता तो मैं मुश्किल में पड़ जाता. कई लोग मुझसे उम्र में छोटे हैं, अनेक लोगों के पास पैसा भी ज़्यादा है."
वैसे उनकी यात्राओं में ट्रैवल साइट्स की सूचियों का अहम योगदान रहा है. उनके मुताबिक इससे व्यवस्थित तरीके से यात्राएं कर पाना संभव होता है. इस सूची का जिक्र करते हुए वे बताते हैं उन्हें इस के जरिए ही प्रशांत महासागर में क्लिपर्टन द्वीप का पता चला, इससे पहले उन्होंने उसका नाम भी नहीं सुना था.
इन यात्राओं के लिए वे अपने अमरीकी पासपोर्ट की 13 कापियों का पूरा इस्तेमाल कर चुके हैं. हर पासपोर्ट स्टांप और वीज़ा से भरा दिखता है. उन्होंने अब अपने पासपोर्ट पर एंट्री एवं एक्जिट स्टांप भी लगवाने शुरू किए हैं.
पेरिश अपनी यात्राओं के दौरान 400 यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स को भी देख चुके हैं. वे कहते हैं, "कोई यूनेस्को की पूरी लिस्ट की यात्रा नहीं कर सकता. वे हर साल 20 से 25 जगहों को इस सूची में शामिल कर लेते हैं. ऐसे में कुछ ना कुछ जगहें तो हर वक्त देखने के लिए बाक़ी रहेंगी."
<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/travel/bespoke/story/20150326-travel-pioneers/don-parrish/index.html" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी ट्रैवल</caption><url href="http://www.bbc.com/travel" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>
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