चीन: ई-कॉमर्स के सहारे मंदी से मुक़ाबला

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- Author, जेफ़ ली
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
चीन की सरकार मंदी से जूझती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने की तैयारी में है.
चीन के मंत्रिमंडल ने मई में देश के इंटरनेट ढांचे में 182 अरब अमरीकी डॉलर (11,644 अरब रुपए) के निवेश का ऐलान किया.
सरकार मानती है कि इस रणनीति से अर्थव्यवस्था में उछाल आएगा.
इस साल के शुरुआती तीन महीनों में चीन की अर्थव्यवस्था में वृद्धि की दर बीते छह साल में सबसे कम है.
धीमी रफ़्तार

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चीन में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है, लेकिन, ज्यादातर उपभोक्ता लंबे वक्त से धीमी और महंगी इंटरनेट सेवा पर निर्भर रहने को मजबूर हैं.
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च गुणवत्ता वाली सस्ती इंटरनेट सेवा मिलना तब तक मुमकिन नहीं है जब तक बाज़ार से सरकारी कंपनियों का एकाधिकार खत्म न हो.
वो मानते हैं कि चीन के ई-कॉमर्स की नई योजना की उम्मीदें इसी बात पर टिकी हैं.
सुधार की राह

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चीन की सरकार ने भरोसा जताया है कि अधिक केबलों और शक्तिशाली सर्वरों के जरिए पूरे देश की इंटरनेटसेवा में सुधार होगा.
इस साल की शुरुआत में ऐसे उपायों का एलान किया गया जिससे पारंपरिक उद्योग अपने कामकाज में इंटरनेट के इस्तेमाल को बढ़ाने को प्रेरित हों और उत्पादक अपने उत्पादों के जरिए उन्नत और प्रगतिशील उपकरणों पर ध्यान दें.
सरकार की ओर से 16 मई को जारी बयान में कहा गया, "बेहतर इंटरनेट सेवा से निवेश, नए तरीके के उद्योगों और आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा. इससे देश की प्रगति को स्थिरता मिलेगी, सुधारों को प्रोत्साहन मिलेगा, अर्थव्यवस्था का ढांचा ठीक होगा और लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा."
इंटरनेट के ढांचे में सुधार के एलान के बाद कई मीडिया केंद्रों ने इसके प्रति समर्थन जाहिर किया.
उन्होंने बताया कि इसके जरिए किस तरह से उपभोक्ता के बर्ताव में बदलाव आएगा और नई कंपनी बनाने की दिशा में आर्थिक रुकावटें कम होंगी.
कैसे होगा सुधार?

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लेकिन, अब भी चीन की इंटरनेट सेवा के सुधार के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है.
अमरीकी कंपनी अकामाई ने 2014 के आखिर में जारी अपनी तिमाही रिपोर्ट में कहा कि इंटरनेट स्पीड की वैश्विक रैंकिंग में चीन 199 देशों में 82 वें नंबर पर है.
रिसर्च फर्म प्वाइंट टॉपिक के मुताबिक चीन के उपभोक्ता अपनी मासिक कमाई का 13.5 फ़ीसदी इंटरनेट सुविधा हासिल करने पर खर्च करते हैं जबकि अमरीका और ब्रिटेन जैसे देशों में ये रकम तीन फ़ीसदी से भी कम है.
व्यापार में रोड़ा

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चीन के लोकप्रिय समाचार पोर्टल नेटईज़ के संस्थापक विलियम डिंग कहते हैं कि इस लागत का सीधे तौर पर ऑनलाइन सेवा की लोकप्रियता पर असर होता है.
डिंग कहते हैं, " हमारे लिए सस्ती और बेहतर इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराना बेहद अहम है. खासकर तब जबकि मांग तेज़ी से बढ़ रही है."
अध्ययन बताते हैं कि ज्यादा लागत की वजह से कंपनियां भी ऑनलाइन व्यवसाय की इच्छुक नहीं दिखतीं.
इंटरनेट की खराब सेवा के लिए चीन की सख्त सेंसरशिप को और सरकारी कंपनियों के एकाधिकार को जिम्मेदार बताया जाता है.
फिलहाल, चीन में लैंडलाइन और मोबाइल बाज़ार पर तीन कंपनियों चाइना टेलीकॉम, चाइना मोबाइल और चाइनना यूनिकॉम का दबदबा है. तीनों कंपनियों पर सरकार का नियंत्रण है.
इंटरनेट की सेवा देने वाली बाकी कंपनियां इन तीन में से किसी एक से बैंडविड्थ लेती हैं.
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