बाज़ार में धूम मचाते 'चीनी अंडे' और रेड वाइन

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- Author, विरगेनी मैनगिन
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
क्या आप जानते हैं कि दुनिया में खाने का सबसे महँगा आइटम क्या है? और इसका चीन से क्या संबंध है?
दुनिया का सबसे महँगा फ़ूड आइटम है कैवियार जो गिनेस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार (बेलुगा मछली का कैवियार) लगभग 34000 डॉलर (क़रीब 21 लाख़ रुपए) प्रति किलो का बिका था.
कैवियार स्टर्जियन समेत ख़ास किस्म की मछलियों के अंडे हैं जो खाए जाते हैं. आम तौर पर इसकी कीमत 6000 से 10,000 डॉलर प्रति किलो तक होती है.
पहले तो ये मछलियां ब्लैक सी और कैस्पियन सी में ही पाई जाती थीं और बीस साल पहले तक ईरान और रूस कैवियार के सबसे बड़े उत्पादक-निर्यातक थे.
लेकिन इन मछलियों को अब कई अन्य जगहों पर झील में भी पाला जा रहा है. 'मेइ इन चाइना' के टैग वाले मछली के अंडों ने तेज़ी से दुनिया के बाज़ार में जगह बनाई है.
2006 के बाद से इस बाज़ार में तेज़ी से पैर पसार रहा चीन इन अंडों का सबसे बड़ा उत्पादक बनने जा रहा है.

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यही नहीं, वाइन के मामले में भी चीन बहुत तेज़ी से आगे बढ़ा है और दुनिया में रेड वाइन का सबसे बड़ा कंज़्यूमर है. इसी के साथ वह रेड वाइन के उत्पादन में भी दुनिया में छठे नंबर पर पहुँच गया है.
उत्पाद का 70 फ़ीसदी निर्यात
अब ये 'चीनी अंडे' दुनिया भर के थ्री स्टार रेस्तरां के मैन्यू में शामिल हैं.
चीन के होटलों और रेस्तरां में लग्ज़री फूड की आपूर्ती करने वाली कंपनी गूरमे फ़ाइन फ़ूड्स के जीएम जिर्जियो ब्रांडिनेली बताते हैं, "पांच साल पहले, इन अंडों का स्वाद कीचड़ जैसा था. लेकिन इसके उत्पादकों ने गुणवत्ता का स्तर बढ़ाया है. बीते दो-तीन सालों से ये काफ़ी बेहतर हो गया है."
इटली के बाज़ार में मछली के अंडे अरिस्टोक्रेट ब्रांड के नाम से बिकते हैं. ये चीन से मंगाए गए अंडों ही हैं जिनमें इतालवी नमक मिलाया जाता है.
चीनी अंडों की नज़र प्राथमिक तौर पर विदेशी बाज़ारों पर ही है, इसलिए उत्पादन का 70 फ़ीसदी हिस्सा निर्यात किया जाता है.

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लेकिन चीन में अमीर लोगों की बढ़ती संख्या के कारण इस हिस्सेदारी में कमी की संभावना है.
ब्रांडिनेली बताते हैं, "बाज़ार उसी दिशा में बढ़ रहा है."
वाइन बाज़ार में भी चीन की पैठ
शराब के बाज़ार में भी चीनी उत्पाद अपनी जगह मज़बूत कर रहे हैं. 2008 में पहली बार एक चीनी वाइन ब्रांड को बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला था.
दुनिया भर के वाइन क्रिटिक चीन पहुंच गए और ये जानने की कोशिश करने लगे चीन में अगली वाइन कौन सी बन रही है.
चीन के विशालकाय वाइन बाज़ार को देखते हुए विदेशी वाइन निर्माता मसलन रेमी कोइन्त्रू, मोएत ए शांदोन और एलवीएमएच जैसे ब्रांड चीन के स्थानीय वाइन निर्माताओं के साथ हाथ मिलाए हैं. इनकी नज़रें चीनी उपभोक्ताओं पर हैं.

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चीन दुनिया में रेड वाइन का सबसे ज़्यादा खपत वाला देश है.
ये कहना है बॉरडॉ स्थित वाइन इंडस्ट्री कन्फ्रेंस एक्सपोर्टर वेनएक्सपो का, जिसके मुताबिक चीनी मध्य वर्ग एक दशक से भी कम समय में वाइन पीना सीख गए हैं.
चीन में वाइन को कोक में मिलाकर पीने वाले अब नहीं हैं.
वैसे चीनी उपभोक्ता अभी भी फ्रेंच और इटैलियन वाइन पीना पसंद करते हैं लेकिन उपभोक्ताओं में चीनी ब्रांड तेज़ी से जगह बना रहे हैं.
इन्हीं ब्रांड्ज़ में से एक ग्रेस विनयार्ड है जिसकी स्थापना 1997 में हुई थी.
2002 में जब इसके संस्थापक की बेटी जूडी लाइसनर ने इसका काम संभाला तो कंपनी को नया लेबल बना दिया जिसकी वाइन आपको चीन और हांगकांग के रेस्तरां में खूब मिलेगी.
मोएत ए शांदोन ने 2014 में चीनी उपभोक्ताओं के लिए ख़ास ब्रांड बाज़ार में पेश किया, 150 युआन यानी करीब 1500 रुपये की क़ीमत पर. समय के साथ चीनी शराब का बाज़ार और बढ़ेगा.
बीजिंग स्थित वाइन कंसल्टिंग फ़र्म ड्रैगन फ़ीनिक्स के सह संस्थापक एडवर्ड राग कहते हैं, "समय के साथ चीनी शराब की गुणवत्ता बेहतर होगी. हालांकि वाइन बनाने वाले मैटेरियल से लेकर शराब बनाने की यूनिट में साफ़ सफ़ाई की समस्या है. लेकिन यहां भी गुणवत्ता वाली वाइन शराब मौजूद हैं."
<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/capital/story/20150605-can-made-in-china-become-a-luxury-label" platform="highweb"/></link> यहाँ पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>
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