चीनी अखबारों में मिठास की कमी

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- Author, हिउ मिन ली
- पदनाम, बीबीसी मॉनीटरिंग
चीन के अख़बार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा पर लगातार लिख रहे हैं. कुछ लोग इसे दोनों देशों की बढ़ती नज़दीकी के रूप में देख रहे हैं तो कुछ नरेंद्र मोदी की कूटनीति पर संदेह जता रहे हैं.
कुछ अखबारों ने ये भी टिप्पणी करते हुए लिखा है कि मोदी घरेलू माहौल को बेहतर बनाने के बजाए विदेशी निवेश पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं.
<link type="page"><caption> बीजिंग न्यूज़</caption><url href="http://www.huaxia.com/zk/sszk/wz/2015/05/4409234.html" platform="highweb"/></link> के एक लेख में मोदी की चीन यात्रा को बहुत ही 'सफल और सुखद' बताते हुए कहा गया है कि इस यात्रा ने दोनों नेताओं के बीच निजी संबंध मज़बूत किए हैं.
लेकिन इस यात्रा पर कुछ अख़बारों की रुख थोड़ा अलग है.

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<link type="page"><caption> ग्लोबल टाइम्स</caption><url href="http://www.globaltimes.cn/content/922106.shtml" platform="highweb"/></link> अखबार से बात करते हुए शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के साउथ एशिया डाइरेक्टर झाओ गानचेंग ने कहा है कि अमरीका, रूस, जापान और चीन जैसी ताक़तों के साथ सहयोग के ज़रिए मोदी बिना कोशिश किए बड़ी ताक़तों के साथ कूटनीतिक संबंध बनाने की कोशिश में हैं.
मोदी को सलाह
सोमवार को प्रकाशित रिपोर्ट में एक तरह से मोदी को सलाह दी गई है कि भारत को ज़्यादा से ज़्यादा विदेशी निवेश की ज़रूरत है क्योंकि सरकार के पास विकास कार्यों के लिए पैसे की कमी है.
रिपोर्ट के मुताबिक मोदी साल भर से विदेश यात्राएं कर रहे हैं और इस बीच कुछ बेहतर कूटनीतिक परिणाम भी सामने आए हैं, लेकिन सबसे बड़ी सीख ये है कि कैसे देश के घरेलू वातावरण को निवेशकों के अनुकूल बनाया जाए.
'द डेली' के संपादकीय में इससे कुछ अलग राय रखी गई है. मंगलवार को प्रकाशित इस संपादकीय में पश्चिमी देशों की आशंकाओं को दूर करने के लिए दोनों देशों को साथ काम करने की सलाह दी है.

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सरकारी अख़बार <link type="page"><caption> चाइना डेली</caption><url href="http://www.chinadaily.com.cn/opinion/2015-05/19/content_20755574.htm" platform="highweb"/></link> ने मोदी से ‘ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को लागू करने की अपील की है.
विकास एजेंडे की सराहना
तोंग्जी विश्वविद्यालय के ज़ोग ज़ेनमिंग और जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के वाल्टर एंडरसन ने अख़बार में संयुक्त रूप से एक लेख लिखा है. इसमें मोदी के विकास एजेंडे की तुलना पूर्व चीन के नेता डेंग शियोपिंग से की है.
इस लेख में कहा गया है, ''मोदी चीन के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को मज़बूत बनाने में सहयोग के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, हालांकि अभी भी दोनों देशों को रणनीतिक मोर्चों पर कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.''
लेख में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच मुख्य अड़चन सीमा समस्या और पड़ोसियों के विवाद हैं. मसलन चीन के साथ जापान और भारत के साथ पाकिस्तान के संबंध.
लेख इस टिप्पणी के साथ ख़त्म होता है: ''जैसे ही मोदी 'ऐक्ट ईस्ट' पॉलिसी को लागू करने के लिए कदम उठाते हैं, ऐसा लगता है चीन इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीति संबंध मज़बूत करने के लिहाज़ से एक बेहतरीन अवसर के रूप में लेगा.''
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