करोड़ों के स्टार्टअप बना-चला रही औरतें

इमेज स्रोत, Courtesy Hind Hobeika
- Author, ब्रुक एंडरसन
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
लेबनान की राजधानी बेरूत से शुरू हुई स्टार्टअप, रेसिपी वेबसाइट शाहिया 2014 में तब सुर्खियों में आई जब उसे जापानी साइट कुकपैड ने 1.35 करोड़ डॉलर में खरीदा.
शाहिया वेबसाइट पर 15 हज़ार रेसिपी हैं और ये अरबी में रेसिपी की 'सबसे बड़ी डिजिटल लाइब्रेरी' है.
लेकिन शाहिया की सीईओ हाला लाबाकी को अपने पुरूष निवेशकों को बार-बार, हर क़दम, हर फ़ैसले पर स्पष्टीकरण देना पड़ा.
ये कंपनी मूल रूप से घरेलू महिलाओं के लिए थी और पुरूषों को बार-बार इसके फ़ायदों के बारे में समझाना पड़ता था.
हाला लाबाकी कहती हैं, "हमारे सामने पुरानी मान्यताओं को बदलने की चुनौती थी. फैसले लेने वाले खाना नहीं बनाते, यहां तक कि पैसा लगाने वाली कुछेक महिलाएं है और वो भी खाना नहीं बनाती थीं. इसलिए उन्हें इस बात को समझने में मुश्किल हो रही थी कि ये स्टार्टअप फ़ायदेमंद है. कुछ के लिए तो फ़ूड कल्चर महिलाओं के लिए हैं और आपकों एक अलग श्रेणी में रख दिया जाता है."
पुरुषों को प्राथमिकता
लाबाकी के मुताबिक उनके दो कारोबारी पार्टनर पुरुष थे और उन्हें प्रयास से निवेशकों को समझाने में बहुत मदद मिली. ऐसा इसलिए क्योंकि कारोबार में मामले में मध्य पूर्व में महिलाओं के मुकाबले में पुरूषों को ज़्यादा गंभीरता से लिया जाता है.
STY38384302बमों से छलनी ग़ज़ा में कमाल करती ये औरतें !बमों से छलनी ग़ज़ा में कमाल करती ये औरतें !युद्ध, तबाही, पाबंदियां के बीच इन औरतों का स्टार्टअप्स लगाने का जज़्बा.2015-04-21T22:11:04+05:302015-04-22T16:18:07+05:302015-04-22T16:39:39+05:302015-04-22T16:39:38+05:30PUBLISHEDhitopcat2
लेकिन ये सब अब बीते दिनों की बात है. शाहिया मध्य पूर्व में कारोबार में महिलाओं की कामयाबी की मिसाल बन चुकी है.
शाहिया का यूज़र बेस प्रति माह करीब 35 लाख विज़िटर्स का है, जिसमें से 40 फीसदी लोग सऊदी अरब के हैं. इसकी वेबसाइट पर 15 हज़ार रेसिपी का विवरण मौजूद है.

इमेज स्रोत, AFP
मध्य पूर्व के देशों में लेबनान अपेक्षाकृत खुली सोच वाला इलाका है और यहां महिलाओं के लिए कहीं ज्यादा मौके हैं. लेकिन मध्यपूर्व के देशों में कारोबार करना और उसे बढ़ाना बेहद मुश्किल काम है, ख़ासकर महिलाओं के लिए.
क्या क्या है चुनौतियां
सबसे बड़ी चुनौती कंपनी का रूढ़िवादी समाज और देशों में विस्तार करने की है. को दकियानूसी समाज में फैलाने की होती है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार को फैलाने से पहले उन्हें पुरुषों की संचालित कंपनियों से फंडिंग लेनी पड़ती है और ये भी सुनिश्चित करना पड़ता है कि ये पुरूष उन्हें गंभीरता से लें.

बेरुत स्थित संयुक्त राष्ट्र की शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति की संस्था (यूनिसेफ़) की कंसल्टेंट दिमा दाबोउस कहती हैं, "क्रिएटिविटी और स्मार्ट एंड टेक्नीकल स्किल के बजाए कनेक्शन और नेटवर्किंग से कारोबार कामयाब या नाकाम होते हैं."
यहां कंपनियों में महिलाओं की मौजूदगी बेहद कम है और इनका काम से बाहर कोई सामाजिक नेटवर्किंग का दायरा भी नहीं है. दाबोउस कहती हैं कि महिलाओं के कुछ समूह हैं तो लेकिन वे सक्रिय नहीं हैं.
दाबोउस कहती हैं, "पुरुष की सामाजिक नेटवर्किंग होती है. वे काम के घंटों से अलग बाहर भी एक दूसरे से मिलते हैं. महिलाओं को इसके लिए खुद के स्तर पर कोशिश करनी होती है."
होबिका का चश्मा
पांच साल पहले हिंद होबिका ने ऐसा चश्मा बनाया जो तैराकी के दौरान तैराक के हार्ट रेट को मापता था. उन्होंने अपने चश्मे को दोहा के रियलटी टीवी शो 'स्टार्ज़ ऑफ़ साइंस' में पेश किया.
लेकिन जब तक होबिका ने तीसरा स्थान हासिल नहीं किया, तब तक माने शो को होस्ट करने वाले पुरुष एंकर उनके साथ पर्दे पर दिखने को तैयार ही नहीं थे..
STY38482033कैसे बदल रहे हैं सऊदी औरतों के हालात? कैसे बदल रहे हैं सऊदी औरतों के हालात? सऊदी अरब में पाबंदियों के बावजूद कामकाजी महिलाओं की संख्या बढ़ी.2015-04-28T13:49:20+05:302015-04-30T18:40:55+05:302015-04-30T18:40:55+05:302015-04-30T18:40:55+05:30PUBLISHEDhitopcat2
होबिका बताती हैं, "वे मुझसे बात करने को लेकर उत्साहित नहीं थे. होस्ट एंकर दूसरे पुरुष प्रतियोगियों से ज्यादा बात कर रहे थे, मैं तो एकदम कटा हुआ महसूस कर रही थी."

इमेज स्रोत, Courtesy Hala Labaki
अब 26 साल की हो चुकीं होबिका को कम उम्र के चलते भी नुकसान झेलना पड़ा. वे कहती हैं, "जब आप युवा हों और कम उम्र के हों, तो आप को गंभीरता से नहीं लिया जाता."
होबिका अब अपने उत्पाद और कारोबार के सिलसिले में बेरुत के साथ-साथ अमरीका के सैन फ्रांसिस्को में भी रहती हैं. उन्हें मध्य पूर्व और पश्चिमी कारोबारी जगत में तालमेल बिठाने के लिए काफी कुछ सीखना पड़ रहा है.
होबिका ने बताया, "लोगों को मैनेज करना मेरे लिए सबसे मुश्किल भरा काम रहा है. मैंने ये काम पहले नहीं किया. ये ख़ास ध्यान रखना पड़ता है कि लोग आहत ना हों. होबिका के मुताबिक अरब देशों में अपने से कम उम्र के लोगों से फीडबैक लेने का चलन नहीं है.
माया की ब्रैंडिंग एजेंसी
बेरूत की माया कारानोउह सीईओ हैं ब्रैंडिंग एजेंसी टीएजी ब्रैंड्स की. उन्होंने 15 साल पहले अपना काम शुरु किया था. तब उनकी चुनौती का उनके महिला होने से कोई संबंध नहीं था. वो चुनौती थी औसत व्यवस्थाओं, मूलभूत ढांचे के अभाव और उद्योग धंधे में वहां के लोगों का ज़्यादा अनुभव न होने की.

इमेज स्रोत, AFP
जब माया ने आठ साल पहले खाड़ी देशों में अपना कारोबार फैलाना शुरू किया तब उन्हें इन देशों में महिलाओं की सांस्कृतिक मान्यताओं का पूरा ध्यान रखा. वे मज़ाक में कहती हैं कि पूरी शरीर ढकने वाला बुर्का पहनने के चलते कुछ सप्ताह के लिए वे अपनी फैशन सेंस ही खो बैठीं थीं.
माया कहती हैं, "मैं भी स्त्री अधिकारों की समर्थक हूं, लेकिन मैं एक कारोबारी महिला भी हूं. मुझे नियमों का उल्लंघन किए बिना उनके आसपास काम करना होता है."
वे इलाके की महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कोशिशें करती हैं - माताओं को काम पर रखकर उन्हें लचीले वर्किंग आवर्स देती हैं.
राना की 'इंजीनियरिंग' वर्कशाप
लेबनानी उद्यमी राना चमाटेली ने युवाओं को विज्ञान के क्षेत्र में आकर्षित करने के लिए 2009 में 'द लिटिल इंजीनियर' नाम से वर्कशाप देनी शुरू की थीं. अब उनका काम लेबनान, कतर और लीबिया में फैला हुआ है.
अब वे ब्रिटेन से शुरूआत कर, अपना काम पश्चिमी देशों में फैलाना चाहती हैं. उनकी सबसे बड़ी चुनौती अपने कर्मचारियों की नियुक्ति है.
STY38295218समाज की भलाई के साथ संभव है कारोबार समाज की भलाई के साथ संभव है कारोबार कारपोरेट कंपनियां अपने कारोबार को बढ़ावा देने के लिए इस रणनीति को अपना रही हैं.2015-04-15T20:58:56+05:302015-04-16T22:08:05+05:302015-04-16T22:08:05+05:302015-04-16T22:08:05+05:30PUBLISHEDhitopcat2
शिकागो के एयरपोर्ट से उन्होंने स्काइप इंटरव्यू के जरिए बताया, "अगर आप महिला है और कोई फ़ैसला करती हैं, तो पहली प्रतिक्रिया यही होगी कि ये सही नहीं हैं. ये हमेशा होता है. ये संस्कृति में है लेकिन इसे बदलने की ज़रूरत है."
ये बात अपनी जगह सही है कि कारोबारी दुनिया में महिलाओं की मौजूदगी को बढ़ाने के लिए अभी काफी कुछ किए जाने की ज़रूरत है.
बावजूद इसके, डाटा एनालिटिक्स की वेबसाइट स्टार्टअप कंपास के मुताबिक मध्य पूर्व के आईटी उद्यमियों में 35 फ़ीसदी महिलाएं जबकि ग्लोबल स्तर पर ये आंकड़ा 10 फीसदी है.
राना चमाटेली कहती हैं, "कुछ लोग बदलाव स्वीकार नहीं करते, लेकिन उद्यमी के तौर पर आप एक ही जगह रुक नहीं सकते हैं."
<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/capital/story/20150506-lebanons-women-pioneers" platform="highweb"/></link> यहाँ पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> आप यहां</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> क्लिक कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












