'लादेन सिर्फ़ और सिर्फ़ अमरीकी कार्रवाई'

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
ओबामा प्रशासन ने जाने-माने खोजी पत्रकार सीमोर हर्ष के उस दावे को 'बेबुनियाद' करार दिया है जिसमें उन्होंने कहा है कि पाकिस्तानी फ़ौज को न सिर्फ़ ओसामा बिन लादेन के ख़िलाफ़ हुई अमरीकी कार्रवाई के बारे में पता था बल्कि उन्होंने इसमें अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए की मदद भी की थी.
वहीं सीमोर हर्ष ने अमरीकी मीडिया को दिए बयानों में कहा है कि उन्होंने ठोस जांच-पड़ताल और इसके परिणामों की पूरी समझ के साथ ये जानकारी सामने रखी है.
लंदन रिव्यू ऑफ़ बुक्स में प्रकाशित हर्ष की इस सनसनीख़ेज़ ख़बर पर प्रतिक्रिया देते हुए व्हाइट हाउस ने कहा कि हर्ष के दावे में "कई सारी ग़लतियां हैं और ये बिल्कुल बेसिरपैर हैं".
जानकारी

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व्हाइट हाउस के प्रवक्ता नेड प्राइस का कहना था, "जैसा कि हमने पहले कहा था, इस अभियान की जानकारी गिने-चुने अमरीकी अधिकारियों को थी. राष्ट्रपति ओबामा ने पहले ही ये निर्णय कर लिया था कि किसी और देश को इसकी जानकारी नहीं दी जाएगी और पाकिस्तानी हुकूमत को भी इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी."
उनका कहना था, "हम पाकिस्तान के साथ साझे अभियानों में अल क़ायदा के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते रहे हैं लेकिन ये कार्रवाई सिर्फ़ और सिर्फ़ एक अमरीकी कार्रवाई थी."
पुलित्ज़र पुरस्कार से सम्मानित सीमोर हर्ष अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं लेकिन उनके इस लेख की आलोचना इस बात पर हो रही है कि उन्होंने सिर्फ़ एक रिटायर्ड पाकिस्तानी अधिकारी और एक रिटायर्ड वरिष्ठ अमरीकी खुफ़िया अधिकारी की बातों को आधार बनाकर इतने बड़े आरोप लगाए हैं.
पुष्टि
अमरीकी मीडिया से बात करते हुए सीमोर हर्ष ने कहा है कि उन्होंने उस वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी की बातों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से अन्य कई खुफ़िया अधिकारियों से की है.
उन्होंने दावा किया है कि एक पाकिस्तानी ख़ुफ़िया अधिकारी ने ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में होने की बात अमरीकी दूतावास को बताई जिसके बाद उस अधिकारी को गुप्त रूप से वाशिंगटन ले आया गया है और उसकी पहचान बदलकर उसे ऐशो-आराम के साथ वाशिंगटन में नहीं जिंदगी दे दी गई है.

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हर्ष का कहना था, "पाकिस्तान में लोग उस अधिकारी का नाम जानते हैं और मैं भी जानता हूं लेकिन वो अभी बता नहीं सकता."
उनका ये भी कहना था कि ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में बेहद लोकप्रिय थे और पाकिस्तानी फ़ौज उन्हें सीधे तौर पर अमरीका के हवाले कर लोगों का ग़ुस्सा अपने सर नहीं लेना चाहती थी.
दावा
हर्ष का दावा है कि प्रारंभिक योजना के तहत ये कहा जाना था कि लादेन की मौत एक अमरीकी ड्रोन हमले में हुई और ये जानकारी भी ऐबोटाबाद की कार्रवाई के एक हफ़्ते बाद सार्वजनिक की जानेवाली थी.

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उनका कहना है, "ओबामा ने अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए उस करार को तोड़ दिया और कुछ ही घंटों बाद इसका एलान कर दिया और पाकिस्तानी फ़ौज को शर्मिंदगी के बावजूद ये कहना पड़ा कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता था."
हर्ष सीमोर से पहले न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार कार्लोटा गॉल ने भी अपनी किताब में ये बात कही थी कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई को ओसामा बिन लादेन के बारे में पता था.
वाशिंगटन के वूड्रो विल्सन थिंक टैंक में दक्षिण एशिया के जानकार माइकल कगलमैन ने भी हर्ष के दावे पर शंका ज़ाहिर करते हुए लिखा है कि उनके लेख में जिस वक्त सीआईए और आईएसआई लादेन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की योजना बना रहे थे वो ऐसा वक्त था जब दोनों देशों के रिश्ते रेमंड डेविस मामले को लेकर बेहद ख़राब थे.
उनका कहना है, "इस तरह की कहानियों में कई बार कुछ सच्चाई होती है लेकिन जिस तरह के सूत्रों का हवाला दिया है उन्होंने उससे लगता है कि इसमें काफ़ी नमक मिर्च लगाया गया है."
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