धुर दक्षिणपंथ की तरफ़ बढ़ता यूरोप

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    • Author, रनवीर नायर
    • पदनाम, पेरिस से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

ब्रिटेन के चुनावी नतीजों में यूकिप को कई सीटें हासिल हुई हैं. जो हाल के दिनों में यूरोपीय संघ में रूढ़िवादी और धुर दक्षिणपंथी पार्टियों की बढ़ती साख का एक और उदाहरण है.

ब्रिटेन में सरकार कंज़रवेटिव पार्टी की बनी है. मुख्य विपक्षी दल लेबर पार्टी को लगातार दूसरी बार हार का मुंह देखना पड़ा लेकिन पिछले कुछ वर्षों से संघ के अधिकांशतर सदस्य देशों की आर्थिक स्थिति ख़राब रही है, बेरोज़गारी और ग़रीबी बढ़ती गई है.

ठीक उसके साथ दक्षिणपंथी दलों का बोलबाला बढ़ रहा है.

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फ़्रांस, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी, हॉलैंड, ग्रीस और इटली जैसे देशों में हुए विभिन्न चुनावों में चरम दक्षिणपंथी पार्टियों ने अभूतपूर्व जीत हासिल की.

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फ्रांस में मैरीन ले पेन के नेतृत्व में फ्रंट नेशनेल (एफएन) ने यूरोपीय संसद और फ्रांस के स्थानीय चुनावों में रिकॉर्ड विजय पाई.

यूरोपीय संसद के लिए एफएन ने फ्रांस की एक तिहाई सीटें जीतीं और राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद की सोशलिस्ट पार्टी को तीसरे स्थान पर धकेल दिया.

उसी समय दूसरे यूरोपीय देशों में, ख़ासकर ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, ब्रिटेन और ग्रीस में भी धुर दक्षिणपंथी पार्टियों ने काफ़ी बढ़त पाई है.

इन नतीजों से चिंतित कुछ समीक्षकों ने कहा है कि शायद यूरोप फिर 1930 जैसी स्थिति में पहुंच गया है, जिस कारण जर्मनी की नाज़ी पार्टी का उत्थान हुआ था और एडोल्फ़ हिटलर जैसे नेता को चुना गया.

आर्थिक हालात

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यूरोप की बिगड़ी आर्थिक स्थिति और बढ़ते हुए आप्रवासन के कारण इन पार्टियों के सितारे बुलंद हुए हैं.

फ्रांसुआ ओलांद ने जनवरी में इन पार्टियों की जीत को यूरोप के लिए एक ख़तरा बताया और इटली के पूर्व राष्ट्रपति जियॉर्जियो नेपोलितानो ने कहा कि इटली के लिए सबसे बड़ा ख़तरा वो समूह हैं जो इटली को यूरोज़ोन से बाहर ले जाना चाहते हैं.

धुर दक्षिणपंथी दल, चाहे वो ब्रिटेन की यूकेआईपी हो, जर्मनी की एएफ़डी या फ्रांस की एफएन, यूरोपीय संघ की शक्ति को कम करना चाहते हैं और कुछ तो अपने देशों को यूरोज़ोन और यूरोपीय संघ से भी बाहर ले जाना चाहते हैं.

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पेरिस में एक राजनीतिक समीक्षक क्रिस्टोफ गिले कहते हैं, “इन दलों की सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण ये है कि कुछ साल पहले अमरीका की आर्थिक स्थिति यूरोप से कहीं ज़्यादा बदतर थी. लेकिन अब जहां अमरीका की हालत काफ़ी सुधर गई है, वहीं यूरोप बहुत मुश्किल दौर में हैं और फ्रांस की बेरोज़गारी अब रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गई है.”

आप्रवासन

उन्होंने कहा, “यूरोप में अवैध रूप से लाखों लोग हर साल आते हैं जिससे यूरोपीय जनता को ये लगता है कि इन्हीं अवैध आप्रवासियों के कारण उनकी नौकरियां ख़तरे में हैं. उनके हालात इतने ख़राब हैं.”

पिछले दो दशकों में यूरोप में जो आप्रवासन हुआ है उसमें एक बहुत बड़ी तादाद में उत्तरी और उप सहारा अफ़्रीका से आए हुए मुसलमान हैं. इतने बड़े आप्रवासन से यूरोप का सामाजिक संतुलन बिगड़ गया है और इस बात को धुर दक्षिणपंथी पार्टियों ने एक राजनीतिक मुद्दा बनाया है और यूरोपीय नागरिकों में एक तरह से डर पैदा किया है.

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पिछले कुछ दिनों से इटली के दक्षिणी तट पर आते हुए अवैध आप्रवासन के सैलाब ने इस मुद्दे को और भी ऊपर ला खड़ा किया है.

यूरोपीय संघ ने इस मुद्दे पर कई बैठकें की हैं, लेकिन यहां के लोगों को भरोसा नहीं है कि यूरोप की सरकार इस बारे में कुछ निर्णायक क़दम उठा सकेगी और ना ही वो उनकी आर्थिक दशा में कुछ बदलाव कर पाएगी.

ऐसी परिस्थिति में आने वाले दिनों में भी रूढ़िवादी और धुर दक्षिणपंथी पार्टियों का बोलबाल बना रहेगा.

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