भूकंप से हिल गई है नेपाली अर्थव्यवस्था

नेपाल भूकंप

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    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, काठमांडू से

मिनट भर आए विनाशकारी भूकंप ने नेपाल के विकास को वर्षों पीछे धकेल दिया है.

पहले ही ग़रीबी से जूझ रहे इस राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को एक लंबे समय तक विदेशी मदद और प्रवासी नागरिकों द्वारा भेजे गए धन पर निर्भर रहना पड़ सकता है.

वजह है मूलभूत सुविधाओं, सड़कों, बिजली परियोजनाओं और स्कूलों को असाधारण क्षति पहुंचना.

मिसाल के तौर पर, शिक्षा के क्षेत्र में नेपाल ने पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व तरक्क़ी की थी और प्राइमरी स्कूल जाने वाले बच्चों में 98% बढ़त देखी गई थी.

अब हालत ये है कि 12 ज़िलों में ही क़रीब 1500 स्कूल ढह गए हैं.

अरबों डॉलर की ज़रूरत

नेपाल के वित्त मंत्री

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इमेज कैप्शन, नेपाल के वित्त मंत्री-राम शरण महत

नेपाल के वित्त मंत्री राम सरण महत ने बीबीसी को बताया, "स्कूल और अस्पतालों के अलावा जो हज़ारों सरकारी इमारतें धराशाई हो गईं उनके पुनर्निर्माण में अरबों डॉलर खर्च होंगे".

पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में राजनीतिक स्थिरता आई थी और पर्यटन क्षेत्र दोबारा अपने पैर जमा रहा था.

एशियन डेवेलपमेंट बैंक के मुताबिक़ नेपाल में सात प्रतिशत नौकरियां पर्यटन से जुड़ीं होतीं हैं और देश की अर्थव्यवस्था में इसका हिस्सा आठ प्रतिशत है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ वर्ष 2014 में क़रीब 800,000 पर्यटक नेपाल आए थे और इस त्रासदी के बाद अगर से संख्या आधी भी हो गई तो पर्यटन क्षेत्र ख़स्ता हाल हो जाएगा.

राम गुरुंग काठमांडू शहर के बीचोबीच एक ढाबा चलाते हैं और उनके ढाबे में पिछले नौ दिनों में सिर्फ 13 ग्राहक आए हैं.

ख़स्ताहाल पर्यटन क्षेत्र

नेपाल भूकंप

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इमेज कैप्शन, राहत सामग्री के लिए लगी लंबी लाइन

उन्होंने बताया, "नेपाल के युवा पहले से ही विदेशों में जा कर बस रहे थे और ये रुझान अब ज़्यादा बढ़ेगा. लेकिन अगर नेपाल में फैक्टरियां नहीं लगेंगी और टूरिस्ट ही नहीं आएँगे तो हम तो भूखे ही मर जाएंगे".

नेपाल योजना आयोग के पूर्व प्रमुख शंकर शर्मा मुताबिक़ देश विकास के मामले में कई वर्ष पीछे चला गया है.

उन्होंने कहा, "विकास की सभी परियोजनाएं ठप्प समझिए क्योंकि पिछले 30-40 वर्षों में बने अस्पताल, स्कूल और सड़कों पर अब दोबारा पहले से ज़्यादा पैसा ख़र्च करना पड़ेगा"

पिछले पांच वर्षों में नेपाल के कई ज़िलों में हाइड्रो पावर परियोजनाएं लगाई गईं थीं और अभी अनुमान भी नहीं लगाया जा सका है कि उनमें किस हद तक बर्बादी हुई है.

विदेशी मदद भी नाकाफ़ी

नेपाल

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इमेज कैप्शन, नेपाल में पहुंचे अमरीका के विमान

वर्ष 2013 में नेपाल में प्रति व्यक्ति सालाना आय का औसत 694 अमरीकी डॉलर था जिसके चलते वो बुर्किना फासो और माली से भी ग़रीब माना जाता है.

पिछले वर्ष देश की अर्थव्यवस्था भी सिर्फ़ चार प्रतिशत ही बढ़ी जो पड़ोसी भारत से लगभग आधी है.

शंकर शर्मा के अनुसार, भूकंप के बाद देश में विदेशों से आ रही आर्थिक मदद भी पुनर्निर्माण में कम पड़ सकती है.

राजनीतिक दल पिछले कई वर्षों से नए संविधान के प्रारूप को लेकर मतभेद में फंसे रहे हैं लेकिन अब उन्हें उसके आगे सोचने की ज़रुरत है.

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