नेपालः मुर्दाघरों में शवों की बढ़ती संख्या

नेपाल भूकंप में मारे गए लोग
    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नेपाल से

काठमांडू के बीचो-बीच बने त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग अस्पताल का एक हिस्सा भूकंप में ख़ासा क्षतिग्रस्त हुआ है.

नुक़सान से बच गए इस हिस्से में देश का सबसे बड़ा शवगृह है.

यहां शवों को बचा कर रखने में काफ़ी दिक्कत आ रही है, क्योंकि उनकी तादाद बढ़ रही है और गुज़रते समय के साथ उनके रख रखाव में ज़्यादा संसाधन लग रहे हैं.

इमारत के बाहर एक मेज़ पर शवों से बरामद की गईं चीज़ें छोटे प्लास्टिक पैकेटों में रखी गई हैं और शवों पर डाले गए नंबर से इन्हें पहचाना जा सकता है.

दूर दराज़ से आने लगे शव

प्रकाश

बगल में एक बड़ा बोर्ड लगा है, जिस पर अंदर के शवों की तस्वीरें लगीं हैं.

इसमें बच्चे, बूढ़े और जवान सभी शामिल हैं.

शवगृह का संचालन कर रहे अधिकारियों में से एक प्रकाश ने बताया कि अब शव दूर-दराज़ के इलाक़ों से भी आने शुरू हो गए हैं.

उन्होंने बताया, "यहां वही शव लाए जा रहे हैं जिनकी शिनाख्त नहीं हो सकी है. लांगतांग से सुबह ही छह शव आए हैं, जिसमें चार विदेशी हैं और दो नेपाली. इस समय 46 शव अंदर हैं और मेरा अंदेशा है कि संख्या बढ़ती जाएगी."

मुश्किल होती शवों की पहचान

मारे गए लोगों के अवशेष

इस शवगृह में सुबह से लेकर शाम तक विदेशी दूतावासों के अधिकारी शवों की शिनाख़्त करने आते रहते हैं.

मंगलवार को अमरीकी, ऑस्ट्रेलियाई, फ्रांस और जर्मनी दूतावासों के अधिकारी अपने उन नागरिकों की तस्वीरें लेकर अंदर जा रहे थे जो गुमशुदा हैं.

ज़्यादातर को निराशा ही हाथ लगी. कुछ ऐसे भी मिले जो अपने मित्रों-रिश्तेदारों की तलाश में एक-एक कर सभी शवगृहों के चक्कर लगा रहे थे.

बेंजामिन सेतियाबुदी

इंडोनेशिया के बेंजामिन सेतियाबुदी अपने तीन मित्रों की तलाश में एक हेलिकॉप्टर किराए पर लेकर लांगतांग तक हो आए हैं.

उन्होंने कहा, "मुझे पूरी आशंका है कि यह तीनों ज़िंदा नहीं बचे हैं. लेकिन मुझे यह भी डर है कि हमें उनके शव कभी भी न मिलें. लांगतांग में मैंने जो देखा है उसे बयान ही नहीं किया जा सकता."

अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यही है कि जिन शवों की शिनाख़्त नहीं हो पा रही है उनका दाह-संस्कार कब किया जाए.

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