नेपाल में राहत, एवरेस्ट जैसी चुनौती!

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    • Author, जस्टिन रौलेट
    • पदनाम, दक्षिण एशिया संवाददाता, बीबीसी

नेपाल में भूकंप से भारी तबाही हुई है और अब प्रभावित दुर्गम इलाकों में राहत पहुँचाना सबसे बड़ी चुनौती है.

शनिवार को आए भूकंप में मरने वालों का आंकड़ा 6621 तक पहुँच गया है और नेपाल सरकार का कहना है कि अब किसी के ज़िंदा बचे होने की संभावना नहीं है.

नेपाल पहाड़ों का देश है और माउंट एवरेस्ट समेत दुनिया की दस सबसे ऊंची चोटियों में से आठ यहां पर हैं.

हेलिकॉप्टर से मदद

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जब मैंने भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टर से प्रभावित इलाकों को देखा तो मुझे इसकी साफ़ झलक मिली कि भूकंप पीड़ितों तक मदद पहुंचाना कितना मुश्किल है.

भूकंप की आपदा के बाद ये हेलिकॉप्टर मदद लेकर पहली बार नेपाल के दूरदराज के प्रभावित इलाके में जा रहा था.

बोरोंग बर्फीले पहाड़ों से घिरा हुआ है जो हिमालय की तलहटी पर बसा हुआ है. कुछ मिनटों के लिए हेलिकॉप्टर ने तबाह हुए गांव के चक्कर काटे ताकि हमें उतरने के लिए जगह मिल सके, लेकिन हेलिकॉप्टर दवाइयां, खाने के पैकेट और प्लास्टिक की चादरें वहां नहीं उतार पाया.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक पांच लाख लोग खुले में सो रहे हैं.

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इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक पांच लाख लोग खुले में सो रहे हैं.

आख़िरकार पायलट ने राहत सामग्री को धान के खेतों में फेंकने का फ़ैसला लिया. इनमें से कुछ सामान बर्बाद हो गया तो कुछ ढलानों से लुढ़कता चला गया, फिर भी गांव वाले ये रसद पाकर काफी खुश दिखाई दिए.

जब रसद हेलिकॉप्टर से उतारी जा रही थी, तभी हमने हेलीकॉप्टर से कूदकर प्रभावितों से बात करने का फ़ैसला किया.

'सिर छिपाने की जगह नहीं'

एक व्यक्ति ने मुझे बताया कि इस गांव का हर मकान तबाह हो चुका है और उनके पास न ही सिर छिपाने के लिए कोई जगह है और खाने का भी बहुत कम सामान बचा है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार नेपाल में लगभग पांच लाख लोग खुले में सो रहे हैं और बीमारियां देश को घेर सकती हैं.

नेपाल में अब मौसम भी राहत कार्यों में बाधा डाल रहा है. मॉनसून की बारिश कभी भी शुरू हो सकती है.

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