'एवरेस्ट भी भूकंप से थर-थर काँप रहा था'

सीमा गोस्वामी
    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नेपाल से

नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक होटल में ये युवती थोड़ी परेशानी में दिखी.

वह लंगड़ा कर चल रही थी और कमज़ोरी के चलते उसका मुँह लटका हुआ था.

दरअसल सीमा गोस्वामी माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने की मंशा से आईं थीं लेकिन अब जान बच जाने की बात करतीं हैं.

हरियाणा के कैथल की रहने वाली सीमा और उनके चार पर्वतारोही साथी नौ अप्रैल को एवरेस्ट के बेस कैंप पहुंचे और उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई.

सीमा ने बताया, "25 अप्रैल को हमारी योजना एवरेस्ट पर चढ़ाई शुरू करने की थी. लेकिन मौसम ख़राब होने के कारण हम लोग नाश्ता करके अपने टेंट में चले गए. उसके कुछ ही देर बाद ज़मीन और टेंट दोनों हिलने लगे. बाहर निकल कर देखा सब कुछ हिल रहा था. एवरेस्ट तो थर-थर काँप ही रहा था लेकिन दूसरी तरफ से बर्फ़ की आंधी भी आ रही थी".

तबाही का मंज़र

एवरेस्ट बेस कैंप

इमेज स्रोत, AP

सीमा गोस्वामी चिल्लाते हुए अपने टेंट में भागी और उनके साथी अपने टेंटों में जा कर पेट के बल लेट गए.

करीब पांच मिनट तक बर्फ़ की आंधी के बाद इन लोगों बाहर निकल कर देखा तो पूरा बेस कैंप तबाह हो चुका था.

उन्होंने बताया, "पूरे बेस कैंप में लोगों के शव दिख रहे थे. किसी के हाथ पैर अलग हो गए थे और कुछ के सिर चट्टानों से टकरा कर पिचक गए थे".

सीमा और उनके साथी पूरे एक दिन तक बेस कैंप में छुपे रहे और अगले दिन उन लोगों के नीचे के लिए अपना सफ़र शुरू किया.

एवरेस्ट बेस कैंप

इमेज स्रोत, AP

तीन दिन तक ट्रेक करने के बाद सीमा और उनके साथी लोकला पहुंचे जहाँ से भारतीय वायु सेना के एक हेलीकॉप्टर ने उन्हें काठमांडू पहुंचाया.

नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप में अभी तक लगभग 6,500 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है और सैंकड़ों लापता हैं.

काठमांडू और दूर-दराज़ के इलाकों के अलावा माउंट एवरेस्ट के इलाके में भी भूकंप के चलते जान-माल को भारी नुकसान हुआ है.

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