यमन में सैनिक कार्रवाई रोकने की 'सराहना'

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ईरान ने यमन में बमबारी अभियान ख़त्म करने के सऊदी अरब के फ़ैसले को 'सकारात्मक' कदम बताया है.
यमन से शिया हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के नेतृत्व में सेनाएं पिछले कुछ दिनों से हवाई हमले कर रहीं थीं.
सऊदी अरब, ईरान पर हूती विद्रोहियों की मदद करने के आरोप लगाता रहा है, जबकि ईरान ने बार-बार इन आरोपों का खंडन किया है.
'सकारात्मक क़दम'
ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावेद ज़रीफ़ ने कहा कि सऊदी अरब के इस क़दम के बाद बातचीत और यमन में तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है.

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सऊदी अरब गठबंधन के एक प्रवक्ता ने कहा कि अब ज़ोर यमन संकट का राजनीतिक समाधान निकाले जाने पर होना चाहिए, लेकिन उन्होंने कहा कि जब भी आवश्यकता होगी सैन्य बल का इस्तेमाल होगा.
सऊदी अरब से शरण ले चुके अब्द राब्बुह मंसूर हादी ने समर्थन के लिए सऊदी सरकार का आभार जताया था. लेकिन एक महीने तक यमन में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ बमबारी के बावजूद हादी निर्वासित ही रहे और यमन की राजधानी सना पर हूती विद्रोहियों का क़ब्ज़ा बरकरार है.
इससे पहले, सऊदी अरब के सरकारी टेलीविज़न ने कहा था कि यमन में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ बमबारी अभियान को खत्म कर दिया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि गठबंधन के ‘ डिसाइसिव स्टॉर्म’ अभियान ने अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने में सफलता पा ली थी.
गठबंधन सेना ने यमन में हूती विद्रोहियों को रोकने के लिए लगभग एक महीने तक हवाई हमले किए. मंगलवार को ही ताज़ा हवाई हमलों में लगभग 30 लोग मारे गए जिनमें कई आम नागरिक थे.
अब 'रिस्टोरिंग होप'

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अब यमन में ‘रिस्टोरिंग होप’ नाम से एक नया कार्यक्रम चलाया जाएगा. इसका लक्ष्य होगा यमन की समस्या का राजनीतिक हल खोजना और अपने देश में सुरक्षा व चरमपंथ विरोधी गतिविधियों पर ध्यान देना.
जनवरी में यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह के समर्थन वाली सेना के सहयोग से हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर कब्ज़ा कर लिया था.
तब से यमन में हालात संकटपूर्ण बने हुए थे. विद्रोहियों ने राष्ट्रपति अब्दुर्बुह मंसूर हादी को नज़रबंद कर लिया था.

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लेकिन राष्ट्रपति हादी मार्च के अंत में देश से बाहर निकलने में सफल हुए.
बीबीसी संवाददाता एलन जॉनस्टन का कहना है कि बहुत से पर्यवेक्षक इस दावे पर सवाल उठाएँगे कि गठबंधन सेना को बड़ी जीत मिली है क्योंकि विद्रोही पीछे नहीं हटे हैं.
संवाददाता के मुताबिक विद्रोही अब भी कई मोर्चों पर बने हुए हैं.
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