जहाँ शहरी आबादी अंडरग्राउंड ही रहती है

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- Author, केरान नैश
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
बेरनाडेट रॉबर्ट्स के तीन बेडरुम वाला घर किसी दूसरे घर जैसा ही है - लॉउंज, डाइनिंग एरिया और किचन. लेकिन ये एक सामान्य घर नहीं है, क्योंकि रॉबर्ट्स का ये घर ज़मीन के अंदर बना हुआ है.
वो अकेली नहीं हैं. दरअसल, उनके शहर कोबर पेडी की 80 फ़ीसदी आबादी ज़मीन के नीचे पत्थरों को काटकर बनाए घरों में ही रहती है.
कोबर पेडी दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड से 846 किलोमीटर दूर स्थित है, जो दूधिया रंग की पत्थर की खानों और वहां बनी अंडरग्राउंड बस्ती के लिए मशहूर है.
जब शहर के ऊपर ज़मीन पर औसत तापमान 50 डिग्री सेल्सियस होता है तो भूमिगत मकानों के अंदर तापमान 23 से 25 डिग्री सेल्सियस होता है.
एक शताब्दी पहले, यहां खानों में काम करने वालों ने पाया कि ज़मीन के नीचे तापमान तो बढ़िया रहने लायक है और लोग भूमि के नीचे ही रहने लगे.

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रॉबर्ट्स के मुताबिक, "यह एक तरह से एयर कंडीशंड मकान में आने जैसा होता है."
भूमिगत शहर की बात क्यों?
दुनिया के कई हिस्सों में अलग वजहों से भूमिगत रहने का चलन बढ़ रहा है. 2050 तक दुनिया की दो तिहाई आबादी शहरों में रहने लगेगी.
ज़्यादातर शहरों में जगह की कमी, संरक्षित इलाके और दूसरी वजहों से एक स्तर से अधिक निर्माण नहीं हो पाएगा. ऐसी स्थिति में भूमिगत रहने का विकल्प मौजूद होगा.
सिंगापुर, बीजिंग, मैक्सिको सिटी, हेलसिंकी....कई जगहों में या तो लोग पहले ही अंडरग्राउंड रह रहे हैं या फिर वहाँ ऐसी सुविधाएँ बनाने का प्लान बन रहा है.

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सिंगापुर का उदाहरण सामने है. दुनिया की सबसे घनी आबादी वाले सिंगापुर में महज़ 710 वर्ग किलोमीटर में 55 लाख लोग रहते हैं.
सिंगापुर स्थित सेंटर फॉर अर्बन अंडरग्राउंड स्पेस के जोहू इंगजिन कहते हैं, "सिंगापुर में ज़मीन की कमी की समस्या भूमिगत निर्माण से खत्म हो सकती है."
सिंगापुर में इन दिनों अंडरग्राउंड साइंस सिटी के निर्माण पर काम चल रहा है. इसके तहत ज़मीन से 30 से 80 मीटर नीचे करीब तीन लाख वर्ग मीटर के दायरे में शहर बसाने की योजना है.
माना जा रहा है कि इस योजना से करीब 4200 कामकाजी लोगों को घर मुहैया कराया जाएगा.
मैक्सिको सिटी- पुरातात्विक धरोहर वजह

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मैक्सिको सिटी की समस्या दूसरी है. वहां पुरातात्विक संरक्षण के चलते ज़्यादा भवन नहीं बनाए जा सकते हैं.
यही वजह है आर्किटेक्ट फ़र्म बीएनकेआर आर्किटेक्चरा ने ज़मीन की 300 मीटर की गहराई में पिरामिड जैसी इमारत बनाने का प्रस्ताव रखा है.
इस प्रस्तावित इमारत में करीब 5000 लोग रह सकते हैं. इन मकानों की छतों और टैरेस पर प्राकृतिक रोशनी भी मिलेगी क्योंकि ऊपर में विशाल ग्लास की छत लगाई जाएगी.
निचले तलों को फ़ाइबर ऑपिटक्स के ज़रिए रोशनी उपलब्ध कराई जाएगी.
बीजिंग- लाखों भूमिगत मकानों में
चीन की राजधानी बीजिंग में मकान के गहराते संकट को देखते हुए लोग भूमिगत निर्माण शुरु कर चुके हैं.

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यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के स्पाशियल एनालिसिस लैब की निदेशक एन्नेटे किम ने चीन के अंदर भूमिगत निर्माण को जानने समझने के लिए बीजिंग में पूरा एक साल बिताया है.
उनके मुताबिक बीजिंग में 15 लाख से 20 लाख तक लोग भूमिगत रहते हैं. हालांकि वे कहती हैं कि कम से कम भी कर दें तो 10 लाख लोग भूमिगत मकानों में रहते हैं.
बीजिंग से हज़ार किलोमीटर दक्षिण में डेवलपरों ने शिमाओ वंडरलैंड इंटरकांटिनेंटल नाम से अंडरग्राउंड होटल तैयार करने की योजना पर काम कर रहे हैं.
शंघाई से 35 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम स्थित ये होटल 90 मीटर गहराई में होगा.
इसके डिज़ाइन निदेशक मार्टिक जोकमैन के मुताबिक ये मुश्किल योजना है. वे कहते हैं, "ऊपर से नीचे का निर्माण काम है. वाटर और सीवेज को उपर खींचना होगा."

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हालांकि ऐसे निर्माण के फ़ायदे भी हैं. खान की खुदाई वाले हिस्से के चलते यहां के पत्थर गर्मियों में गर्मी को सोख लेंगे और जाड़े में गर्माहट रीलीज करेंगे.
हेलसिंकी- दुकानें, ट्रैक, स्केटिंग रिंक..
फिनलैंड की राजधानी हेलसिंकी में भी तापमान के चलते भूमिगत निर्माण हो रहे हैं.
अधिकारियों ने 90 लाख क्यूबिक मीटर के क्षेत्र में सुविधाओं का ढांचा तैयार करना शुरू किया है, जिसमें दुकानें, रनिंग ट्रैक, आइस हॉकी स्केट रिंग और स्वीमिंग पूल शामिल हैं.

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शहर के अंडरग्राउंड मास्टर प्लान की लीड डिज़ाइनर इज़ा किविलाक्सो कहती हैं कि जाड़े के दिनों में अंडरग्राउंड घर ज़्यादा आरामदेह होते हैं.
उन्होंने कहा, "हेलसिंकी के मौसम को देखते हुए काम करना या फिर कॉफ़ी पीना अंडरग्राउंड ही बेहतर होता है, बरसात और जाड़े में बाहर भी नहीं निकलना पड़ता है."
तकनीकी तौर पर भूमिगत रहना तो संभव है, लेकिन क्या लंबे समय तक रहना संभव होगा?
अंडरग्राउंड रहना संभव?
मैक्सिको की अर्थ स्क्रैपर बिल्डिंग की इमारत की कामयाबी पर काफ़ी कुछ निर्भर होगा.
आम लोगों को ज़मीन के अंदर के अंधेरे और छोटी गुफाओं वाले घर से डर लगता है, उन्हें जिंदा दफ़न होने का डर भी सताता है.

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लेकिन मैक्सिको की इमारत में सूर्य की रोशनी के आने का प्रबंध किया गया है, तो इससे लोगों की धारना बदलने में मदद मिलेगी.
स्कैंडेवियन की रिसर्च संस्था के गुनार डि जेनसन के मुताबिक 3 फ़ीसदी लोगों में ज़मीन के नीचे रहने को लेकर काफी डर होता है. लेकिन उनके डर का सामाधान भी संभव है.
जेनसन दुनिया की चार सबसे लंबी सुरंग योजनाओं में काम कर चुके हैं. वे बताते हैं कि सुरंग के अंदर पाल्म के पेड़ और रास्ते में आकाश जैसा भ्रम बनाया जा सकता है.
वे कहते हैं, "आप अंधेरी सुरंग से गुज़रते हैं फिर अचानक से रोशनी में आ जाते हैं, जहां पेड़ पौधे भी हैं. आपको ब्रीदिंग स्पेस का एहसास होता है हालांकि तब भी हज़ार मीटर गहरी सुरंग में ही होते हैं जो पर्वतों से गुज़र रही है."
स्वास्थ्य पर असर?

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क्या इसका हमारे स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ेगा? सूर्य की रोशनी की कमी का असर नहीं होगा?
यूनिवर्सिटी ऑफ सर्दन कैलिफोर्निया के लॉरेंस पॉलिनक्स बताते हैं कि सूर्य की रोशनी की कमी से नींद, मूड और हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है और कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं, लेकिन वे ये भी कहती हैं कि अगर सूर्य की रोशनी कुछ समय के लिए और रुटीन में मिल जाए तो अंडरग्राउंड लंबे समय तक रहा जा सकता है.
एन्नेटे किम ने बीजिंग में इस तरह से लोगों को रहते हुए देखा है. वे कहती हैं, "भूमिगत मकानों में रहने वाले ज़्यादातर लोग वहां रात में सोने के लिए जाते हैं. ये उनका स्वीट होम जैसा नहीं होता."
वहीं सिंगापुर के आर्किटेक्ट जोहू जिंग कहते हैं, "लोग अंडरग्राउंड नहीं रह पाएं, इसकी कोई वजह नहीं है. ये जरूर है कि लोगों के अंडरग्राउंड रहने से पहले कई सुविधाओं को अंडरग्राउंड मुहैया कराना होगा."
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