क्या रंग देखकर बदलता है आपका मूड?

इमेज स्रोत, Thinkstock

    • Author, क्लाउडिया हैमंड
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

हम अपने घरों की दीवारों के रंग के बारे में घंटों सोचते हैं कि कौन सा रंग हमारे मूड के लिए सही रहेगा.

डॉक्टर भी सर्जरी के दौरान सफ़ेद रंग के कपड़ों, पट्टी और बैंडेज का इस्तेमाल करते हैं ताकि एक सफ़ाई का भाव जगे. फॉस्ट फूड की दुकानें चमकीले रंगों की होती हैं- लाल या फिर पीले. और कुछ जेल की कोठरियों की दीवारें गुलाबी होती हैं ताकि क़ैदी को ज़्यादा ग़ुस्सा नहीं आए.

ऐसा लगता है कि हम ये जानते हैं कि कौन सा रंग क्या काम करता है. मोटे तौर पर लगता है कि लाल रंग हमें एक दम चौंकाता है जबकि नीला रंग हमें शांत रखता है. कई तो इसे तथ्य भी मानते हैं लेकिन सवाल ये है कि क्या रंग हमारे मूड को उसी तरह बदलते हैं जैसा हम जानते हैं.

वैज्ञानिक शोध के नतीजे मिश्रित हैं और कई बार पहले की आवधारणाओं को चुनौती देते हैं. लाल रंग के बारे में सबसे ज़्यादा अध्ययन हुआ है, इसकी तुलना ज़्यादातर नीले या फिर हरे रंग से की जाती है.

STY37931149प्रकाश से भी तेज़ गति से होगी बात?प्रकाश से भी तेज़ गति से होगी बात?सौर मंडल के बाहरी क्षेत्र या मार्स से पृथ्वी पर तत्काल संदेश पाना होगा संभव?2015-03-23T22:47:10+05:302015-03-26T14:12:35+05:302015-03-31T14:22:11+05:302015-03-31T14:22:09+05:30PUBLISHEDhitopcat2

कुछ अध्ययन बताते हैं कि लाल रंग का सामना करने पड़ लोग अपने काम को नीले या फिर हरे रंग की तुलना में बेहतर ढंग से अंजाम देते हैं. हालांकि कुछ अध्ययन में इसके ठीक विपरीत नतीजे भी मिले हैं.

रंग का व्यवहार पर असर

ऐसा क्यों होता है, इसे समझने के लिए हमें जानना होगा कि यह काफ़ी हद तक हमारी कंडिशनिंग पर निर्भर करता है.

इमेज स्रोत, Thinkstock

मतलब अगर आप किसी ख़ास रंग के इर्द-गिर्द ज्यादा रहे हों तो आपका अपना व्यवहार उस ख़ास रंग से प्रभावित होने लगता है. मसलन, स्कूली जीवन में आपके टीचर लाल रंग की स्याही से आपकी गलतियों को मार्क करते रहे हैं तो लाल को आप खतरे से जोड़कर दखते हैं. ज़्यादातर ज़हरीले फल लाल होते हैं.

वैसे ही नीले रंग को सौम्यता से जोड़कर देखते हैं क्योंकि समुद्र और आकाश का विस्तार सौम्यता और शांति का एहसास कराते हैं. समुद्र और आकाश दोनों का रंग नीला ही है.

हालांकि अपवाद भी हैं. जैसे टीचर स्कूलों में 'वेल डन' भी लाल रंग से लिखते हैं और रास्पबेरी फल भी लाल ही होता है. ऐसे में ज़ाहिर है कि अलग अलग लोग अलग अलग रंगों से विभिन्न लगाव महसूस करते हैं. लेकिन इसका आपके व्यवहार पर असर बेहद अलग मसला है.

STY37638112उनको नीला, मुझे पीला क्यों दिखता है?उनको नीला, मुझे पीला क्यों दिखता है?क्या आप वही नीला देख रहे हैं जो मैं देख रहा हूँ. रंगों का राज़..2015-03-04T21:38:55+05:302015-03-12T17:33:37+05:302015-03-12T19:19:34+05:302015-03-12T19:19:32+05:30PUBLISHEDhitopcat2

2009 में ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी में इस मामले पर विस्तृत शोध हुआ. शोधकर्ताओं ने नीले, लाल और एक न्यूट्रल रंग के कंप्यूटर स्क्रीन का इस्तेमाल किया और उन स्क्रीनों पर लोगों से अलग अलग काम करवाए.

लाल स्क्रीन पर लोगों ने मेमोरी, प्रूफ़ रीडिंग, डिटेल हासिल करने संबंधी टॉस्क को बेहतर ढंग से पूरा किया. वहीं नीली स्क्रीन वाले लोगों ने क्रिएटिव कामों को बेहतर ढंग से अंजाम दिया. शोधकर्ताओं के मुताबिक लाल रंग की स्क्रीन के साथ लोगों ने डर के चलते सावधानी पूर्वक काम किया.

बैकग्राउंड का असर नहीं

इमेज स्रोत, Thinkstock

जबकि नीले रंग वाली स्क्रीन पर काम करते वक्त लोगों ने कहीं ज्यादा रचनात्मकता से काम किया. शोधकर्ताओं ने पाया कि रंग और व्यवहार का संबंध काफी हद तक दिमाग से संचालित होता है.

हालांकि इन नतीजों के व्यवहारिक प्रयोग पर भी टीम एकमत नहीं है. उदाहरण के लिए क्या टास्क को देखकर कमरे का रंग बदलवाना चाहिए, नई ड्रग्स के साइडइफेक्ट की जांच कर रही टीम के लिए दूसरे रंग की दीवार होनी चाहिए और क्रिएटिव ब्रेनस्ट्रॉमिंग के लिए नीला रंग.

STY37790434इंटरनेट की जान कहाँ बसती है?इंटरनेट की जान कहाँ बसती है?हमारी निर्भरता इंटरनेट पर बढ़ रही है. क्या ये कभी पूरी तरह ठप हो सकता है?2015-03-14T19:29:46+05:302015-03-16T15:51:36+05:302015-03-16T16:10:51+05:302015-03-16T16:10:50+05:30PUBLISHEDhitopcat2

व्यवहारिक तौर पर ये संभव नहीं दिखता. दफ़्तर और क्लासरूम में कभी आप क्रिएटिव होना चाहते हैं और कभी आपका ध्यान दूसरी चीजों पर लग सकता है.

हालांकि 2014 में जब इसी प्रयोग को कहीं ज्यादा बड़े समूह के साथ अपनाया गया तो रंग के बैकग्राउंड का कोई असर नहीं पड़ा. पहले ये प्रयोग महज़ 69 लोगों के साथ अपनाया गया था.

स्विट्ज़रलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ़ बासेल के ओलिवर जेनस्काउ ने एक अध्ययन किया था. इसमें उन्होंने अपने साथियों को प्रेटज़ल्स (मीठा खाद्य पदार्थ) की प्लेट खाने की दी और कहा कि इसका टेस्ट बताने के लिए वे जितना चाहें उन्हें खाने को कहा.

इमेज स्रोत, Thinkstock

इसमें से प्रत्येक छह में से एक आदमी को परिणाम से बाहर रखा गया क्योंकि अपने प्रेटज़ल्स दूसरों के साथ शेयर करके खा रहे थे. जब लोगों को ये बताया गया, उसके बाद लाल रंग एक बार फिर चेतावनी के तौर पर उभरा. जिन लोगों की प्रेटज़ल्स की प्लेट लाल थी, उन्होंने कम प्रेटज़ल्स खाए.

जारी है प्रयोग

लेकिन इसी प्रयोग को एपालाचेन स्टेट यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं ने अपनाया तो वहां एकदम विपरीत परिणाम मिले. लाल प्लेट में जिन्होंने प्रेटज़ल्स लिए उऩ्होंने ज़्यादा खाया.

ज़ाहिर है रंग के असर का अध्ययन इतना आसान नहीं है. ये भी संभव है कि हम जैसा उम्मीद करते हैं, रंग का वैसा प्रभाव नहीं होता हो.

बावजूद इसके अमरीका, स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, पोलैंड, ऑस्ट्रिया और ब्रिटेन की जेलों की कई कोठरियां गुलाबी होती हैं. स्विट्ज़रलैंड में 20 फ़ीसदी जेलों और पुलिस स्टेशन में कम से कम कोठरी की दीवारें गुलाबी हैं.

STY37711022डॉक्टर की बातें भी बना सकती हैं बीमार डॉक्टर की बातें भी बना सकती हैं बीमार डॉक्टर चाहे तो अपनी बातों से आपको जल्द ठीक या फिर बीमार कर सकता है.2015-03-09T21:42:09+05:302015-03-10T22:28:37+05:302015-03-10T22:28:37+05:302015-03-10T22:28:37+05:30PUBLISHEDhitopcat2

इनका नाम अमरीकी नौसेना के दो अधिकारियों के नाम पर बाकर-मिलर पिंक रखा गया है. इन्होंने सबसे पहले जेल की दीवारों के गुलाबी रंग का होने पर पहली बार अध्ययन किया था.

इमेज स्रोत, Thinkstock

एक प्रयोग के तहत 1979 में कैदियों को नीला और गुलाबी कार्ड दिखा कर बाज़ुओं से ज़ोर लगाने को कहा गया. ये आंकने की कोशिश हुई कि वे कितना ज़ोर लगाते हैं. नीला कार्ड दिखाने पर उन्होंने ज़्यादा ज़ोर लगाया जबकि गुलाबी रंग का कार्ड दिखाने के बाद उन्होंने कम ज़ोर लगाया.

कार्ड दिखाकर ज़ोर-आज़माइश करने वाला पहले ही कार्ड दिखा रहा था. लेकिन इस प्रयोग से कोई सार्थक नतीजे नहीं निकले और ये नाकाम रहा.

कैदियों पर गुलाबी रंग का असर

2014 में जेनस्काऊ की टीम ने स्विट्ज़रलैंड की सबसे सुरक्षित जेल में इस प्रयोग को अपनाया. इस बार का प्रयोग कहीं ज्यादा व्यवस्थित था, 30 साल पहले हुए प्रयोग से बेहतर तरीके के साथ. इसमें कैदियों को गुलाबी रंग और ग्रे रंग की कोठरियों में रखा गया, छत्त सफ़ेद थी.

कैदियों के अधिकारियों को कैदियों के व्यवहार में ग़ुस्से के स्तर को मापने की ट्रेनिंग दी गई थी.

STY37392478आप छुट्टियों में बीमार तो नहीं होते?आप छुट्टियों में बीमार तो नहीं होते?छुट्टियों के दौरान बीमार होने की वजहों पर आई नई जानकारियां.2015-02-17T22:33:05+05:302015-03-03T13:07:02+05:302015-03-03T13:07:02+05:302015-03-03T13:07:02+05:30PUBLISHEDhitopcat2

इमेज स्रोत, Thinkstock

तीन दिन बाद दोनों रंग की कोठरियों के कैदी कम आक्रामक देखे गए. यहां भी दीवार के रंग का कोई असर नहीं दिखा. शोधकर्ताओं ने माना कि लंबे समय तक प्रयोग करते रहने से शायद बदलाव दिखे. इन शोधकर्ताओं को अभी भी मानना है कि गुलाबी रंग की दीवार से आक्रोश को कम करता है.

हो सकता है कि रंग का असर होता हो लेकिन इसके प्रभाव को अभी व्यवस्थित ढंग से समझा नहीं गया है. बेहतर शोध जरूर हो रहे हैं लेकिन पूरी तस्वीर के साफ़ होने में वक्त लगेगा.

जब तब वो हो, तब तक तो यही माना जाएगा कि घर की दीवारों का इंटीरियर डेकोरेशन आपकी पसंद और कलात्मक अभिरूचि को ही दर्शाता है.

<bold><italic>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20150402-do-colours-really-change-our-mood" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ़्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</italic></bold>

विशेष सूचना - इस कॉलम का कन्टेंट केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे डाक्टर की मेडिकल सलाह के विकल्प के तौर पर नहीं माना जा सकता. यदि कोई इसके आधार पर किसी मेडिकल नतीजों पर पहुँचता है तो बीबीसी इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं होगा.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href=" https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>