इस बार कम सिख पहुँच पाए पाकिस्तान

बलकार सिंह, पंजा साहब गए भारतीय सिख

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    • Author, उरूज जाफरी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

पाकिस्तानी सूबे पंजाब के शहर हसन अब्दाल के गुरुद्वारे पंजा साहब आए भारतीय सिख यात्री बैशाखी मेले में इबादतों और लंगर में ख़ासे मगन थे.

गुरु ग्रंथसाहब की पात सुनकर नीले चोले में एक बुज़ुर्गवार अभी बाहर निकले ही थे कि मैंने उनके बारे में जानना चाहा.

वो बोले, "मैं बलकार सिंह हूँ और सरहद पार फ़िरोजपुर से आया हूँ. उमर 70 है और पिछले तक़रीबन 15 बरसों से दर्शन को आता हूँ."

पंजा साहब पाकिस्तान स्थित एक प्रमुख सिख तीर्थ है. भारत समेत दुनियाभर के सिख यहाँ हर साल दर्शन और पूजा करने आते हैं.

स्थानीय पत्रकारों के मुताबिक़ हर साल क़रीब 5,000 यात्री यहाँ आते थे. लेकिन इस साल सुरक्षा कारणों से क़रीब 1500 से 2000 यात्री ही आए.

ये पूछने पर कि अकेले आए हैं या बाल बच्चे भी साथ हैं, बलकार सिंह मेरी आँखों में झांकते हुए बोले, 'ब्रह्मचारी हूँ.'

पंजा साहब सिखों का मशहूर तीर्थस्थान है और इसका संबंध गुरूनानक से है.

'कोई ख़ास मन्नत नहीं'

पाकिस्तान के पंजा साहब में सिख

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हर साल पंजा साहब आने के बारे में पूछे जाने पर बलकार सिंह कहने लगे, "मेरी कोई ख़ास मन्नत तो नहीं है बस हर बरस यही माँगता हूँ कि अच्छी उमर बीत जाए और हमारा परिवार गुरु नानक जी से जुड़ा रहे."

उन्होंने बताया, "बंटवारे से पहले हम ज़िला क़ुसूर के ग़रीब गाँव ख़ानगर के रहने वाले थे तब हमारे माँ बाप बैशाखी के मेले पर हर बरस यहाँ ज़रूर आया करते थे."

पाकिस्तान के अनुभव पर वो बोले, "लोग यहाँ बहुत अच्छे हैं बस हमारे तुम्हारे मंत्री अच्छे नहीं."

बैशाखी मेले के आख़िरी दिन सभी यात्री पंजा साहब का पूरा मज़ा उठा लेना चाहते हैं.

कहीं लोग पात सुन रहे थे, कहीं बच्चे बड़े स्नान में मसरूफ़ थे और कहीं लोग लंगर खुलने का इंतज़ार कर रहे थे. जगह-जगह यात्रियों के लिए दुकानें भी सजी थीं.

दो ख़्वाहिशें

पाकिस्तान के पंजा साहब में सिख

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करपाल सिंह और उनकी पत्नी सुरिंदर कौर इंग्लैंड से आए हैं. करपाल सिंह के पूर्वज वर्ष 1929 में जालंधर से तंज़ानिया चले गए थे.

करपाल सिंह की पैदाइश तंज़ानिया की है जबकि उनकी पत्नी जालंधर की ही हैं.

वे दोनों पहली बार पंजा साहब के दर्शन को पाकिस्तान आए हैं. करपाल सिंह बोले, "दर्शन के साथ ही दिल में पाकिस्तान आने की भी ख़्वाहिश थी. मेरी दोनों ख़्वाहिश पूरी हो गईं."

करपाल और सुरिंदर को पाकिस्तान में लाहौर और पेशावर के गुरुद्वारे तो बहुत अच्छे लगे मगर पंजा साहब के इंतज़ाम से वो ज़्यादा ख़ुश नहीं थे.

दोनों को एक ही शिकायत थी कि सफ़ाई का माक़ूल इंतज़ाम नहीं.

सुरक्षा का इंतज़ाम

पाकिस्तान पुलिस की फ़ाइल फ़ोटो

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इमेज कैप्शन, पाकिस्तान पुलिस (फ़ाइल फ़ोटो).

पंजा साहब के अंदर कई सौ पुलिस वाले अपनी ड्यूटी कर रहे थे. पाकिस्तान में सुरक्षा के हालात की वजह से इस बार बैशाखी मेला लगवाना पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की हुकूमत के लिए बड़ी चुनौती थी.

हालांकि हमने भारत से आए जितने यात्रियों से बात की, सबका कहना था कि उन्होंने ख़ुद को यहाँ बिल्कुल महफ़ूज़ पाया और उन्हें अपने धार्मिक रस्मों को पूरा करने में कोई दिक्क़त नहीं हुई.

विदेशों के अलावा पाकिस्तानी सिख तीर्थ यात्री भी यहाँ काफ़ी संख्या में आते हैं. पाकिस्तान के सिंध और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में बड़ी संख्या में सिख रहते हैं.

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