फ़्रांस में मोदी की बातों पर संदेह

नरेंद्र मोदी फ़्रास में

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    • Author, वैजू नरावने
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, पेरिस

नरेंद्र मोदी के दौरे के पहले यहाँ मीडिया में बेहद कम कवरेज था. मैं इस बात से हैरान हूँ. सिर्फ़ एक यो दो अख़बारों में ही इस पर ख़बरें हैं.

मोदी की यात्रा सही मायनों में शुक्रवार को शुरू होगी तो शायद उन्हें शुक्रवार से कुछ जगह मीडिया में मिले.

यहां के लोग इस दौरे को बेहद कम अहमियत दे रहे हैं. इसकी बड़ी वजह ये है कि फ़्रांस की सबसे ज़्यादा दिलचस्पी रफ़ाएल सौदे में है.

ख़ासकर यहाँ की मीडिया को इस सौदे में दिलचस्पी थी.

लेकिन राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलांद ने कह दिया है कि इस दौरे के दौरान इस सौदे पर न बात होगी और न ही कोई घोषणा.

इसके बाद मोदी के दौरे में लोगों की रुचि एकदम ख़त्म हो गई है.

इसका मतलब यह नहीं की ये दौरा भारत के लिए महत्वपूर्ण नहीं है.

नरेंद्र मोदी

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इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ़्रांस पहुँच चुके हैं.

गुरुवार को रफ़ाएल सौदे का प्रबंधन कर रही एक कंपनी के सेमिनार में मैंने भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान के बारे में बताया.

इस दौरान मैंने महसूस किया कि फ्रांस भारत के साथ व्यापार तो बहुत करना चाहता है लेकिन फ़्रांस के लोगों के मन में भारत को लेकर शक़ और सवाल हैं.

बड़ी-बड़ी बातें

लोग पूछ रहे थे, "मोदी कहते तो हैं कि हम अफ़सरशाही कम करेंगे, नज़रिया बदलेंगे लेकिन क्या वे ऐसा कर पाएंगे?"

कई कंपनियों के निदेशक, जो इस सेमिनार में आए थे. उनका कहना था कि उन्होंने मेक इन इंडिया की वेबसाइट देखी है, पूरी जानकारियाँ ली हैं लेकिन फिर भी उनके मन में संदेह है. उनका कहना था कि भारत की अफ़सरशाही कंपनियों की मदद करने के बजाए रास्ते में रोड़े अटकाती है.

औद्योगिक जगत के लोगों का कहना था कि नरेंद्र मोदी का विज़न तो सही है लेकिन वो इसे पूरा कर पाएंगे या नहीं इसे लेकर उनके में सवाल है.

उनका कहना था, "भारत में लोगों को बड़ी-बड़ी बातें तो करनी आती हैं लेकिन काम नहीं. उत्पादन के लिए जो अनुशासन चाहिए वो भारत के बजाए चीन में मिलता है."

फ़्रांस इस बात को स्वीकार कर रहा है कि भारत का बाज़ार बड़ा होगा लेकिन वो इस पर फ़ैसला नहीं ले पा रहा है कि भारत के बाज़ार में कब दाख़िल हुआ जाए.

रफ़ाएल विमान

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इमेज कैप्शन, भारत और फ़्रांस के बीच रफ़ाएल विमान सौदे पर बातचीत जारी है.

अडानी समूह का निवेश

किस इंडस्ट्री में निवेश किया जाए यह भी फ़्रांस के लिए पहेली ही बना हुआ है .

मोदी की फ़्रांस यात्रा के दौरान बड़ी घोषणा सिर्फ़ अडानी समूह के फ़्रांस में निवेश को लेकर ही अपेक्षित है.

रफ़ाएल के साथ विमान सौदे या अरेवा के साथ परमाणु संयंत्रों को लेकर सौदे की उम्मीद बेहद कम ही है.

ओलांद और मोदी की कोशिश ये होगी कि अगले पाँच साल में पाँच से आठ बिलियन यूरो की किस तरह से साझेदारी, निवेश या अदला-बदली हो सकेगी.

फ़्रांस के पास रेलवे और ट्रांसपोर्ट की काफ़ी उन्नत तकनीक है. फ़्रांस भारत को अपनी यह तकनीक बेचने की कोशिश कर सकता है.

लेकिन भारत अब सिर्फ़ तैयार उत्पाद ख़रीदने के बजाए टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र में ज़्यादा इच्छुक है.

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