दहकते ज्वालामुखी से बने 14 लैंडस्कैप

इमेज स्रोत, alamy
- Author, जेन पाल्मर
- पदनाम, बीबीसी अर्थ
ज्वालामुखी में विस्फोट हो सकता है, वो हमेशा जलता दिख सकता है और मुरझाया भी हो सकता है. तीनों ही स्थितियों में ज्वालामुखी ख़ूबसूरत लैंडस्कैप बनाते हैं. दुनिया भर में फैले ऐसे ही 14 लैंडस्कैप पर एक नज़र-
सल्फ़र का नीला धुंआ
इंडोनेशिया के पूर्वी जावा में स्थित है कावा ईजेन ज्वालामुखी. 2600 मीटर ऊँचे ज्वालामुखी के शीर्ष पर इसका मुहाना है. सल्फ़ूरिक एसिड की झील 200 मीटर गहरी है.
जब इससे लावा निकलता है तो तेज़ तापमान से सल्फ़ूरिक गैसों का तापमान भी बढ़ता है. फिर ये गैसें हवा में मौजूद ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही नीला धुंआ बनाती हैं. इससे ऐसा लगाता है कि नीला लावा ज्वालामुखी ने निकल रहा है.
माउंड्स ऑफ़ मड

इमेज स्रोत, Mark Ireland CC
इसे दलदल के अंदर का ज्वालामुखी भी कह सकते हैं. पृथ्वी के अंदर की गैस जब पृथ्वी की कमज़ोर सतह को तलाश लेती है तो वहां निकलने की कोशिश करती है. उस दबाव के चलते पृथ्वी की सतह पर दलदल जैसी स्थिति बनती है.
पूर्वी अज़रबैजान ऐसी दलदलीय ज्वालामुखी का घर है. दुनिया भर के एक हज़ार दलदलीय ज्वालामुखी में एक तिहाई यहीं स्थित हैं. ज्वालामुखी का शीर्ष पृथ्वी से 700 मीटर की ऊंचाई तक स्थित होता है और 10 किलोमीटर के दायरे में भी फैला हो सकता है. इनमें से ज़्यादातर 400 मीटर की ऊंचाई पर होते हैं.
आम ज्वालामुखी के उलट यह ठंडा होता है, लेकिन यह भी उतना ही खतरनाक होता है. इसकी चपेट में आने के बाद इंसान का दम घुट जाता है.
बेसॉल्ट (बाजालत) कॉलम

इमेज स्रोत, alamy
जब ज्वालामुखी पिघलने के बाद ठंडा होना शुरू होते हैं तो लावा भी जमने लगता है और उसमें दरारें भी आने लगती हैं.
कई बार लावा कॉलम के आकार में लंबवत जमने लगता है. मतलब कूलिंग सरफ़ेस पर ये कॉलम एकदम खड़े नजर आते हैं.
स्टैच्यू ऑफ़ लव
लाखों साल पहले तुर्की के गोरेम के निकट ज्वालामुखी के विस्फोट से काफ़ी ज़्यादा लावा निकला. समय के साथ धूप-पानी के पड़ने से लावा की परत में कई मीनार जैसी बनावट खड़ी हो गईं.

इमेज स्रोत, alamy
इसे चिमनी भी कह सकते हैं. इसका आकार पुरुष लिंग की तरह है. इसी वजह से तुर्की के कापाडुकिया को लव वैली के नाम से भी जाना जाता है.
स्नाइडर कोन्स
ज्वालामुखी के विस्फोट के दौरान ज्वालामुखी से निकली गैसें सभी दिशा में फैलती हैं. लेकिन जहां पर सुराख होता है उस दिशा में तेजी से लावा बाहर निकलता है.

इमेज स्रोत, alamy
कई बार लावा इतने दबाव के साथ बाहर निकलता है कि उससे लावा फाउंटेन बन जाता है. इससे निकलने वाला लावा कई बार 500 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाता है.
लावा के नीचे आने से पहले ही वह जमने लगता है. इस दौरान आक्सीजन के संपर्क से और आद्रता के चलते ये लाल रंग के हो जाते हैं.
लावा ट्यूब्स

इमेज स्रोत, CC 2.0
ज्वालामुखी के विस्फोट से निकलने वाला लावा कई चैनलों में बाहर निकलाता है. प्रत्येक चैनल के लावा का ऊपरी हिस्सा छत्त की तरह हो जाता है और जल्दी से जमने लगता है. लेकिन निचले हिस्से से लावा का प्रवाह होता रहता है.
ताज़ा लावा के आने से वो और आगे बढ़ता है और जमने से अछूता रहता है. लावा ट्यूब्स के नहीं होने से लावा ज्वालामुखी के मुहाने पर ही जम जाता है.
हायड्रोथर्मल फ़ील्ड्स
उत्तर-पूर्व इथियोपिया के डालोल ज्वालामुखी के आसपास का दृश्य बेहद शानदार है. सफ़ेद, गुलाबी, लाल, पीला, हरा, स्लेटी और काले साल्ट से भरा इलाका.

इमेज स्रोत, alamy
ऊपर ज्वालामुखी के मुहाने से निकलता गर्म झरना....यहां औसतन तापमान हमेशा 30 डिग्री से ज्यादा रहता है. यहां के क्रिस्टल अलग अलग आकार और साइज के होते हैं.
वोलकेनिक बम

इमेज स्रोत, CC 2.0
जब ज्वालामुखी फटता है तो बड़े पैमाने पर लावा निकलता है. जमीन पर टकराने से पहले ये लावा जम सकता है. ये बम जैसे आकार में भी जम सकता है जो काफी दूरी तय करके गिरता है और जमीन पर गिरने के बाद तेज़ी से लुढ़कता है.
ये किसी तोप के गोले जैसा होता है. यह पांच से छह मीटर डायमीटर का हो सकता है. इस ज्वालामुखी का लावा प्रति सेकेंड 200 से 400 मीटर की रफ़्तार से चलता है. ये 'वोलकेनिक बम' ज्वालामुखी से पांच किलोमीटर दूर तक पहुंच सकते हैं.
लावा डोम्स
अगर पर्याप्त दबाव पैदा नहीं हुआ तो लावा ज्वालामुखी के मुहाने के पास जमा हो जाता है. यह लावा काफ़ी मोटा होता है और दूर तक नहीं जा पाता.

इमेज स्रोत, scott
कई बार ये कई किलोमीटर की चौड़ाई में भी होते हैं. ज्वालामुखी के फटने का दबाव, ज़मीन की सतह और लावा की स्पीड पर इनका आकार निर्भर करता है.
लावा लेक
कई बार जब ज्वालामुखी का मुहाना सक्रिय होता है तो लावा मुहाने पर झील जैसी आकृति ग्रहण कर लेता है.

इमेज स्रोत, alamy
कई बार ये एकदम पिघलते हुए हो सकते हैं और कई बार ठोस रुप में भी हो सकते हैं. बिना ठोस लावा वाली झील का बनाना मुश्किल है लेकिन ऐसे पांच ज्वालामुखी दुनिया भर में स्थित हैं.
यहां लावा हर वक्त जलती या फिर पिघली हुई स्थिति में नजर आता है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो का नायमुरागिरा ज्वालामुखी ऐसा ही है.
आग का दरिया
ज्वालामुखी के सक्रिय होने के बाद लावा तेज़ी से रिसता है. इस दौरान अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को लावा नष्ट कर देता है. हालांकि इसकी गति इतनी धीमी होती है कि इंसान वहां से आसानी से दूर जा सकते हैं.

इमेज स्रोत, alamy
डरहम यूनिवर्सिटी के अर्थ साइंस के प्रोफ़ेसर जॉन डेविडसन कहते हैं, "अगर आप हवाई द्वीप समूह की बात करें तो लोग वहां ज्वालामुखी को सक्रिय होते और लावा को अपने घर की ओर आते देखते हैं और कार में बैठकर दूर चले जाते हैं."
हालांकि कई बार ये मुश्किल भरा हो सकता है और लावा तेज़ गति से भी दूरी तय करके मुश्किल में डाल सकता है. माना जाता है कि ज्वालामुखी का लावा तेज ढलान पर 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फैल सकता है.
काल्डेरा

इमेज स्रोत, usgs
जब ज्वालामुखी का मुहाना बड़ा होता है तो उसे काल्डेरा करते हैं. ओरेगन स्थित माउंट माज़मा का ज्वालामुखी 7700 साल पहले सक्रिय हुआ और धीरे धीरे इसका मुहाना 10 किलोमीटर तक चौड़ा हो चुका है.
589 मीटर गहरा ये ज्वालामुखी अमरीका का सबसे गहरा और दुनिया का सातवां सबसे गहरा ज्वालामुखी है.
पिलो लावा

इमेज स्रोत, cc 2.0
ज्वालामुखी से निकलने वाला ये लावा जब तकिए के आकार का हो, तो उसे ही पिलो लावा कहते हैं. चौंकिए नहीं, तकिए के आकार का लावा कई बार बेड के आकार का भी हो सकता है.
गर्म लावा जब बाहर की परत में पानी के संपर्क में आता है तो गर्म लावा के ऊपर ग्लासीय परत बन जाता है लेकिन कुछ ही देर में लावा किसी बैलून के फूटने की भांति फूट कर कई मीटर तक उछल जाता है.
मिड अटलांटिक रिज और जुयान डि फूका रिज के ज्वालामुखियों में लावा का ऐसे निकलना आम बात है.
तैरते झांवां पत्थर

इमेज स्रोत, alamy
जब कोई बड़ा जलीय ज्वालामुखी सक्रिय होता है तो लावा तेज़ी से जमता है. इसमें कई बार ऐसे पत्थर बन जाते हैं जो काफी छिद्रयुक्त होते हैं, इतने हल्के कि पानी पर आसानी से तैर सकें.
न्यूज़ीलैंड के केरमाडेक द्वीप स्थित हावरे सीमाउंट ज्वालामुखी 2012 में सक्रिय हुआ तो इससे निकले झांवां पत्थर 400 किलोमीटर के दायरे में तैरते पाए गए.
<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/earth/story/20150330-14-stunning-volcano-creations" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी अर्थ</caption><url href="http://www.bbc.com/earth" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












