निर्णायक दौर में परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता

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ईरान के 'विवादित' परमाणु कार्यक्रम पर ईरान और छह शक्तिशाली देशों के बीच बातचीत तेज़ हो गई है.
मंगलवार को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते को लेकर समयसीमा समाप्त होने से पहले स्विट्ज़रलैंड के लोज़ान में विदेश मंत्रियों की गहन वार्ता जारी है.
पश्चिमी देशों का कहना है कि वे ईरान की परमाणु बम बनाने की क्षमताओं को सीमित करना चाहते हैं.
लेकिन अभी इस बात को लेकर गतिरोध बना हुआ है कि ईरान को किस हद तक उन्नत परमाणु शोध करने की अनुमति दी जाएगी और समझौता होने की स्थिति में कितनी जल्दी ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएंगे.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हो रही वार्ता में अमरीका, फ़्रांस, जर्मनी, रूस, चीन और ब्रिटेन के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं.
अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्ष एक-एक करके मुद्दे सुलझाने पर राज़ी हो गए हैं लेकिन अहम बिंदुओं पर गतिरोध बरक़रार है.
परमाणु बम से 'दूर'

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ब्रितानी विदेश मंत्री फ़िलिप हेमंड ने वार्ता में शामिल होने से पहले समझौता होने की उम्मीद ज़ाहिर करते हुए कहा, "हम यहाँ हैं क्योंकि हमें विश्वास है कि समझौता हो सकता है. समझौते का होना सभी के हितों में है. लेकिन ये समझौता ऐसा होना चाहिए जो परमाणु बम को ईरान की पहुँच से दूर कर दे."
वहीं जर्मनी के विदेश मंत्री फ्रैंक वॉल्टर स्टीनमायर ने कहा, "फिलहाल सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है लेकिन अभी भी चीज़ें बदल सकती हैं क्योंकि मतभेद नहीं सुलझ पाए हैं. अगले कुछ घंटों में बात आगे बढ़ेगी. मैं किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर सकता."
12 सालों से गतिरोध

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वार्ता से पहले ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने कहा था कि ईरान ने समझौते के लिए राजनीतिक फ़ैसला ले लिया है और इस वार्ता से नतीजे निकलने के सभी संकेत दिख रहे हैं.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच पिछले 12 साल से गतिरोध बरक़रार है.
इससे पहले भी इस मुद्दे पर कई दौर की वार्ताएं नाकाम रहीं थीं.

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच सदस्य देश और जर्मनी चाहते हैं कि ईरान परमाणु बम न बना पाए.
मध्य पूर्व में इसराइल इस समझौते के ख़िलाफ़ है. इसराइल ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करने की चेतावनियां भी देता रहा है.
रविवार को इसराइल की संसद में बोलते हुए प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इस समझौता को इसराइल के लिए भयावह बताते हुए कहा था कि ईरान को रोका जाना चाहिए.
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