'आंख के बदले आंख' की सज़ा या इंतक़ाम ?

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- Author, बीबीसी ट्रेंडिंग
- पदनाम, क्या चर्चित है और क्यों?
सोशल मीडिया पर ईरान के कुछ यूज़र्स कुछ अपराधों की कड़ी सज़ा की पैरवी करते दिख रहे हैं. उनका कहना है कि तेज़ाब फेंकने वाले अपराधी को अंधा कर दिया जाए.
लोगों का कहना है कि इसकी सज़ा भी जुर्म की गंभीरता के अनुपात में होनी चाहिए.
ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक़ क़ोम शहर की एक घटना में एक व्यक्ति की आंख पर एसिड फेंकने वाले व्यक्ति की एक आंख जबरन निकाल दी गई थी.
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हालाँकि उस आदमी की दूसरी आंख भी निकाली जानी थी, लेकिन फिलहाल सज़ा टली हुई है.
अपराधी को दस साल की सज़ा भी दी गई है और पीड़ित के परिवार को मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है.
समाचार एजेंसी का कहना है कि देश में यह पहली बार हुआ है कि सज़ा के तौर पर किसी के आंख की रोशनी छीन ली गई है.
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस घटना की निंदा करते हुए सज़ा को 'बदले की क्रूर कार्रवाई' करार दिया है.
सोशल मीडिया

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संस्था से जुड़ी राहा बहेरिनी ने कहा, "यह सज़ा ईरान की क्रूर न्याय प्रणाली का पर्दाफ़ाश करती है और यह भी साफ हो गया है कि ईरान की सरकार मानवता की कद्र नहीं करती."
लेकिन बीबीसी की मॉनीटरिंग सेवा ने पाया कि बहुत से ईरानी लोग सोशल मीडिया पर इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं.
<link type="page"><caption> फ़ेसबुक पर परवाने अमिदी</caption><url href="https://www.facebook.com/shahrvandyar/photos/a.266672463388781.64672.157375150985180/854745701248118/?type=1&fref=nf" platform="highweb"/></link> लिखती हैं, "यह कोई हादसा नहीं था जिसे माफ़ कर दिया जाए. यह पूरी तरह से सोच-समझकर किया गया था, इसलिए सज़ा के तौर पर आंख के बदले आंख की बात बनती है."
निर्दोष पर हमला

एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, "एमनेस्टी इंटरनेशनल को उनकी बकवास करने दो. वे लोग कहां थे जब इस जानवर ने एसिड फेंक कर उस व्यक्ति को अंधा कर दिया था."
फ़ेसबुक यूजर मारी कूही कहती हैं, "मुझे हिंसा पसंद नहीं, लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशनल तब क्या करती जब ऐसे लोग निर्दोषों पर तेज़ाब फेंकते हैं?"
इंटरनेट पर एक अन्य व्यक्ति ने कहा, "इतना काफी नहीं है. जजों को अपराधी के चेहरे पर ही तेज़ाब फेंक देना चाहिए था."
बर्बर सज़ा

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इस फैसले ने ईरान की सोशल मीडिया और समाचार वेबसाइट पर बड़ी बहस छेड़ दी है. कई लोग ऐसे भी हैं जो इस फैसले की मुख़ालफत कर रहे हैं.
<link type="page"><caption> एक ट्विटर यूजर</caption><url href="https://twitter.com/alirezacrow" platform="highweb"/></link> ने कहा, "किसी का सिर कलम करने की इस्लामिक स्टेट की हरकत से यह सज़ा हज़ार गुना ज्यादा बर्बर है."
<link type="page"><caption> @Botri_dar_AB</caption><url href="https://twitter.com/botri_dar_ab" platform="highweb"/></link> ने ट्वीटर पर लिखा, "यह सरकार की निर्दयता की इंतेहा है."
उधर, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी अपने पक्ष का बचाव किया है. संस्था के प्रवक्ता नील डुर्किन ने कहा, "पीड़ित के अधिकार की पैरवी करने वाले लोग हमें गलत पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसा नहीं कि हम पीड़ितों की परवाह नहीं करते, हम उनकी परवाह करते हैं."
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