मिस्र: कोर्ट के फ़ैसले से संकट में चुनाव

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मिस्र की सर्वोच्च अदालत ने चुनाव क़ानून के एक हिस्से को असंवैधानिक क़रार दिया है, जिससे इस महीने के शुरू में होने वाले संसदीय चुनावों में देरी हो सकती है.
यह फ़ैसला क़ानून के उस अनुच्छेद से जुड़ा है जिसमें चुनावी ज़िलों का विभाजन शामिल है.
मिस्र 2012 में अदालत के एक फ़ैसले में मुख्य संसद को भंग करने के बाद से देश बिना मुख्य संसद के चल रहा है.
राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी को अपदस्थ किए जाने के बाद सेना ने जुलाई 2013 में इस स्थित से निकलने का आख़िरी तरीक़ा चुनाव सोचा था.
अल सीसी की योजना

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22-23 मार्च से शुरू होने वाले इन चुनावों को कई चरणों में कराने की योजना बनाई गई थी.
पूर्व सेना प्रमुख अब्दुल फ़तह अल सीसी को मई 2014 में राष्ट्रपति चुन लिया गया था.
सीसी ने दिसंबर में निर्वाचन क्षेत्रों के क़ानून को मंज़ूरी देते हुए 567 संसदीय सीटें ली थीं जिनमें 420 पर केवल एक ही उम्मीदवार को चुनावी मुक़ाबले में उतारा जाना था.
120 का आवंटन पार्टी सूचियों के अनुसार होना था और 27 सीटें राष्ट्रपति द्वारा सौंपी जानी थी.
अब सीसी समर्थकों के नई संसद पर हावी होने की आशंका है.
अदालत में याचिका दायर करने वाले वकील ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा अपने मौजूदा रूप में यह क़ानून मतदाताओं का पूरा प्रतिनिधित्व नहीं करता था.
राष्ट्रपति सीसी ने कहा है कि चुनाव क़ानून को एक महीने में फिर से तैयार किया जाएगा.
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