'पैगंबर के कार्टून पर बदले के ख़िलाफ़' हैं ब्रिटिश मुसलमान

मुसलमान नमाज़ अदा करते हुए

बीबीसी के लिए किए गए एक सर्वे के अनुसार ब्रिटेन में रहने वाले अधिकतर मुसलमान पैग़ंबर मोहम्मद के कार्टून प्रकाशित करने वालों के ख़िलाफ़ की गई हिंसक कार्रवाई का विरोध करते हैं.

इस सर्वे में यह भी संकेत मिले कि अधिकतर मुस्लिम पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ संघर्ष करने वालों से सहानुभूति नहीं रखते हैं.

ब्रिटेन में स्थित सर्वेक्षण और शोध करने वाली संस्था कॉमरेस के अनुसार इस सर्वे में हिस्सा लेने वाले 1000 मुसलमानों में से 27% ने फ़्रांस के हमले के पीछे मौजूद मक़सद से सहानुभूति जताई है.

दो-तिहाई हिंसा के ख़िलाफ़

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  • लगभग 80% का कहना था कि उन्हें पैग़ंबर मोहम्मद को दर्शाती तस्वीरें छापना अपमानजनक लगा था.
  • सर्वे में भाग लेने वाले दो तिहाई से भी ज़्यादा (68%) लोगों ने कहा कि इन्हें छापने वालों के ख़िलाफ़ हिंसक कार्रवाई किसी भी तरह सही नहीं ठहराई जा सकती.
  • 26 जनवरी से 20 फ़रवरी के बीच हुए इस सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि 32% ब्रिटिश मुसलमान पैगंबर का कार्टून छापने वाली फ़्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्डो पर हमले से बिल्कुल ताज्जुब में नहीं थे और न यहूदी सुपरमार्केट पर हमले से.
  • सर्वेक्षण के मुताबिक़ क़रीब आधे ब्रिटिश मुसलमानों को लगता है कि उन्हें अपने मज़हब के लिए भेदभाव का सामना करना पड़ता है और अब ब्रिटेन में उनके प्रति कम उदारता बरती जाती है.
  • लगभग आधे ये भी मानते हैं कि इस्लाम के प्रति पूर्वाग्रह के चलते ब्रिटेन में मुसलमान होना कठिन होता जा रहा है.

ब्रिटेन के लिए वफ़ादार

  • सर्वे में शामिल 95% ब्रिटिश मुसलमानों का कहना है कि वो ब्रिटेन के प्रति हमेशा वफ़ादार रहेंगे.
  • 93% का मानना है कि ब्रिटिश मुसलमानों को हमेशा ब्रिटेन के क़ानून का पालन करना चाहिए.
  • सर्वे में शामिल महिलाओं में से तक़रीबन 20% ब्रिटेन में ख़ुद को असुरक्षित महसूस करती हैं जबकि पुरुषों में केवल 10% को ऐसा लगता है.

कॉमरेस के कुछ सवाल

ब्रिटिश मुसलमान

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  • अगर मुस्लिम समुदाय का कोई व्यक्ति हिंसक गतिविधि की योजना बना रहा है तो मैं इसकी सूचना पुलिस को दूंगा/दूंगी - 94% सहमत
  • मैं आईएस और अल क़ायदा के लिए लड़ने वाले कट्टर समर्थक मुसलमानों को जानता/जानती हूं- 8% सहमत
  • जो मुस्लिम उलेमा मानते हैं कि पश्चिम के ख़िलाफ़ हिंसा सही है, उनका समर्थन किया जा सकता है - 49% सहमत
  • अगर मौक़ा मिले तो मैं अपने बच्चों को किसी मुस्लिम देश में पढ़ने भेजूंगा/भेजूंगी - 31% सहमत
  • मैं ग़ैर मुस्लिमों के मुक़ाबले मुसलमानों से संबंध रखना पसंद करूंगा/करूंगी - 13 फ़ीसदी सहमत
  • अगर मुमकिन होता तो मैं ब्रिटेन छोड़कर किसी और देश में रहने जाता/जाती - 14% सहमत

एक हज़ार से बात

ब्रिटिश मुस्लिम महिलाएं

बीबीसी टुडे की रिपोर्टर सीमा कोटेचा के मुताबिक़ इस्लाम शांति और प्यार का धर्म है हिंसा का नहीं, ऐसे विचार कई बार ब्रेडफ़ोर्ड में ज़ाहिर किए गए हैं.

सीमा कोटेचा का कहना है कि जिन एक दर्जन लोगों से उनकी बात हुई उनमें से बड़ी तादाद में लोगों का कहना था कि इस्लाम की कट्टरता वाली विचारधारा को अक्सर मीडिया में दिखाया जाता है और इससे वो नाराज़ हैं. उनके मुताबिक़ पूर्वाग्रहों के चलते वो ख़ुद को ब्रिटिश समाज से अलग-थलग पाते हैं.

एक नौजवान का कहना था कि ''इस देश में हम सबको चरमपंथियों की तरह देखा जाता है, मैं ब्रिटिश हूं लेकिन कई बार ऐसा लगता है कि ब्रिटेन मुझे मेरे मज़हब के चलते अपनाने को तैयार नहीं है. ''

सर्वे के दौरान बीबीसी ने क़रीब 30 लाख मुस्लिम आबादी वाले ब्रिटेन में एक हज़ार लोगों से बात की.

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