संयुक्त राष्ट्र: दोषी अधिकारियों पर मुक़दमा चले

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अमरीकी सीनेट ने देश की ख़ुफ़िया संस्था सीआईए को 9/11 के बाद 'बर्बर' तरीकों से पूछताछ का दोषी ठहराया है

सीनेट की रिपोर्ट में कहा गया है कि सीआईए ने देश को बर्बर तरीकों के ज़रिए पूछताछ के बारे में गुमराह किया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूछताछ बहुत ही ख़राब ढंग से की गई और इसके ज़रिए जो जानकारी जुटाई गई वो भरोसे के काबिल नहीं थी.

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया में संयुक्त राष्ट्र ने अमरीका से कहा है कि दोषी अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जाए.

संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि बेन एमरसन ने कहा कि रिपोर्ट से साफ़ है कि बुश प्रशासन के दौरान नीतियां इस तरह से बनाई गईं जिससे अधिकारों का उल्लंघन हुआ.

'अमरीकी हितों को नुकसान'

राष्ट्रपति ओबामा पहले कह चुके हैं कि पूछताछ के तरीके उनके अनुसार यातनाएं थीं.

ओबामा ने कहा है कि पूछताछ के ये तरीके उनके आगे के कार्यकाल में नहीं अपनाए जाएँगे क्योंकि इनसे विदेशों में अमरीकी हितों को ख़ासा नुकसान हुआ.

उधर सीआईए के निदेशक जॉन ब्रेनन ने ज़ोर देकर गलतियों के बावजूद अल क़ायदा के संदिग्धों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल किए गए तरीकों से हमले रुके और जानें बचीं.

बुश के समय सौ से पूछताछ

सीनेट की यह रिपोर्ट यूं तो 6000 पन्नों ज़्यादा की है लेकिन केवल 480 पन्ने ही गोपनीयता की सूची से बाहर हैं.

इस रिपोर्ट के कौन से हिस्से सार्वजनिक किए जाएं इस बात पर बहुत खींचातानी हुई.

ओबामा ने राष्ट्रपति बनने के बाद 2009 में इस तरह के पूछताछ कार्यक्रमों पर रोक लगा दी थी.

राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के कार्यकाल में सीआईए ने अल क़ायदा के करीब 100 संदिग्ध चरमपंथियों से पूछताछ की थी.

इस पूछताछ में कैदियों के सिर को पानी में डुबोना, उन्हें बेइज़्ज़त करना और सोने ना देना जैसे तरीके शामिल थे.

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