मैं 'स्कूल डायरी' नहीं बनूंगी!

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- Author, बीबीसी ट्रेंडिंग
- पदनाम, क्या है चर्चित और क्यों
स्कूल जाने वाले बच्चों के माता पिता के बीच होमवर्क, टेस्ट, रिज़ल्ट आदि के लिए व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल होने का चलन ख़ूब निकल पड़ा है.
लेकिन एक मां ने जब व्हाट्स-ऐप का 'पेरेंट्स चैट ग्रुप' छोड़ने का फैसला किया तो वह ऑनलाइन हिट हो गया. उनकी पोस्ट को सोशल मीडिया पर 50 लाख लाइक और 35,000 शेयर मिले. पर क्यों?
पहले पहल स्पेन की नोलिया को व्हाट्स-ऐप पेरेंट्स चैट ग्रुप में शामिल होने का आइडिया ज़बर्दस्त लगा.
नोलिया <link type="page"><caption> बीबीसी ट्रेंडिंग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/10/141018_pakistan_drunk_mullah_sk" platform="highweb"/></link> को बताती हैं, "मुझे अपनी बेटी की क्लास के दूसरे बच्चों के माता-पिता से जुड़ना, स्कूल की गतिविधियों, जानकारियों और महत्वपूर्ण इवेंट्स के अपडेट रखना अच्छा आइडिया लगा था."
वे कहती हैं. "बहुत व्यस्त होने के कारण स्कूल नहीं जा पाने वाले माता-पिता की तरह मेरे लिए समय बचाने का यह एक अच्छा विकल्प था."

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नोलिया चैट ग्रुप पर स्कूल की किताबों, होमवर्क और क्लास टेस्ट रिज़ल्ट जैसी बातें दूसरे पेरेंट्स से शेयर करने लगी थी. लेकिन धीरे धीरे उनकी शाम बर्बाद होने लगी, मोबाइल फ़ोन की मेमोरी बैठने लगी.
फुल-टाइम असिस्टेंड
एक दिन नोलिया की नौ साल की बेटी ने स्कूल से आकर बताया कि वह गणित का होमवर्क लिखना भूल गई है. उसने मां से कहा कि वह अपने <link type="page"><caption> व्हाट्स-ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/07/140707_hashtag_ramadan_trends_sk" platform="highweb"/></link> ग्रुप में मैसेज कर होमवर्क पूछ ले.
नोलिया तुरंत अपना मोबाइल ढूंढ़ने लगीं. लेकिन तभी एकदम से उनके कदम रुक गए.

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कहती हैं, "मैंने सोचा कि ये मैं कर क्या रही हूं. भीतर से आवाज़ आई कि अब बस करो ये सब."
इसका परिणाम ये हुआ कि नाराज बच्ची को अगले दिन खाली हाथ स्कूल जाना पड़ा और होमवर्क भूलने के परिणाम भी भुगतने पड़े.
वे बताती हैं कि इस तरह हम अपने बच्चों के फुल-टाइम पर्सनल असिस्टेंट बन गए हैं.
पहल की कमी

सोशल मीडिया में रुचि रखने वाले माता-पिता के बीच पेरेंटिंग, स्कूल और पढाई से जुड़े व्हाट्स-ऐप ग्रुप से जुड़ने का चलन बढ़ता ही जा रहा है.
वे बच्चों के पालन पोषण और पढाई-लिखाई के लिए सोशल मीडिया का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं.
नोलिया ने इसके बारे में अपने ब्लॉग पर लिखने का इरादा किया ताकि दूसरे अनजान माता-पिता को सचेत कर सकें.
वे कहती हैं, "मैं तो व्हाट्स-ऐप ग्रुप के कारण बेटी की स्कूल डायरी बन गई थी. मैंने होमवर्क को ना कहा, वापस स्कूल जाने को ना कहा, और बेटी की जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर लेने को ना कहा.

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वे मानती हैं कि होमवर्क करना बच्चों की जिम्मेदारी है. यदि वे इसमें असफल होते हैं तो उन्हें इसके परिणाम भी भुगतने देने चाहिए.
उन्होंने बीबीसी ट्रेंडिंग को बताया, "मैंने लिखना शुरू किया क्योंकि मैं अपनी बेटी और उस जैसे कई दूसरे बच्चों के सक्रिय नहीं होने के कारण चिंतित थी. ऐसे बच्चों में खुद से पहल करने की बजाय आदेश का पालन करने की आदत पड़ती जा रही है."
50 लाख लाइक और 35,000 शेयर
नोलिया ने अपने ब्लॉग पर पोस्ट "मैंने बेटी की स्कूल डायरी नहीं बनूंगी" लिखी जो ख़ूब चर्चित हुई.
उनके इस पोस्ट को दो घंटों में ही करीब 10,000 से 11,000 लोगों ने देखा. दो दिनों में इसे एक लाख लोगों ने पढ़ा और हफ्ते भर में करीब 50 लाख लोगों ने लाइक किया.

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उनकी पोस्ट को फेसबुक पर 35,000 बार शेयर किया गया.
यूजर ततिनति उनके ब्लॉग पर कमेंट करती हैं, "उम्मीद है कि इससे उन अभिभावकों को मदद मिलेगी जो अपने बच्चों के लिए सब कुछ करने के लिए तैयार रहते हैं."
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












