ईरानः फिर आगे बढ़ेगी समझौते की समयसीमा?

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अमरीका ने ईरान से कहा है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौते को लेकर सोमवार तक की समयसीमा को बढ़ाने पर विचार करे.
अधिकारियों के मुताबिक़ अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ से विएना में बातचीत के दौरान यह प्रस्ताव रखा.
अमरीका ने ईरान के उस सुझाव का भी खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि दोनों पक्ष आशिंक राजनीतिक समझौते के क़रीब पहँच गए हैं.
अमरीकी टीवी चैनल एबीसी से साक्षात्कार में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, "मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूँ कि यदि प्रमाणिक समझौता होता है और यह सुनिश्चित करता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने में सक्षम नहीं है तो मैं न सिर्फ़ कांग्रेस को बल्कि अमरीकी लोगों को भी यह समझा पाउंगा कि समझौता करना ही सही था."
अंतिम बड़ा प्रयास

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वहीं ब्रितानी विदेश मंत्री फ़िलिप हेमंड ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय वार्ताकार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए सोमवार सुबह अंतिम बड़ा प्रयास करेंगे. हेमंड ने कहा कि सोमवार की समयसीमा समाप्त होने से पहले फ़ासले कम करना ही वार्ताकारों का उद्देश्य है.
उन्होंने कहा, "हम सभी समझौता करने पर ही केंद्रित हैं लेकिन मैं किसी को झूठी उम्मीद नहीं देना चाहता. हमारे बीच अभी भी बड़े फ़ासले हैं और कई मुश्किल और जटिल मुद्दों से निपटना है."
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते को लेकर अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी और ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ के बीच कई दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन फ़ासले अभी बाक़ी हैं.
सऊदी अरब भी चिंतित
रविवार को अमरीकी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री सऊद अल फ़ैसल सी भी मुलाक़ात की.
सऊदी अरब वार्ता में शामिल नहीं है लेकिन खाड़ी क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को लेकर चिंतित ज़रूर है.
वहीं ईरान में रविवार को विएना में जारी वार्ता के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति हसन रूहानी पर पश्चिमी देशों के आगे झुकने के आरोप लगाए.
ईरान में भी लोग समझौते को लेकर आश्वस्त नहीं है.

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लोग भी नाउम्मीद
तेहरान में एक महिला ने कहा, "यह मामला इतना जटिल है कि मुझे कोई उम्मीद नहीं है. मुझे लगता है कि वार्ता को फिर से आगे बढ़ा दिया जाएगा, जबकि लोग इसके उलट चाहते हैं. हम सभी लोग चाहते हैं कि उनके बीच जल्द ही समझौता हो क्योंकि हम बार-बार वार्ता के टाले जाने से तंग आ चुके हैं."
विश्व के छह शक्तिशाली देश ईरान से संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध हटाने के बदले में ईरान से अपना परमाणु कार्यक्रम ख़त्म करने की माँग कर रहे हैं.
अमरीका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ़्रांस, रूस और चीन परमाणु हथियार न विकसित करने को लेकर ईरान से पुख़्ता आश्वाश्न चाहते हैं.
ईरान हमेशा से कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम नागरिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए हैं.
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