मोदी, रूहानी और शुभ्रांशु चौधरी साथ-साथ

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
नरेंद्र मोदी, ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी, विदेशी बंधकों का गला काटनेवाले जिहादी जॉन या फिर भारत के दूरदराज़ पिछड़े इलाकों को मोबाइल पोर्टल के ज़रिए जोड़ रहे शुभ्रांशु चौधरी के बीच शायद ही कुछ साझा हो.
ये सब लोग जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका फॉरेन पॉलिसी की तरफ़ से चुने गए 100 नामों की सूची में शामिल हैं.
इनमें से किसी ने दुनिया को झकझोरा है, किसी ने दहलाया है, किसी ने उम्मीद जगाई है, किसी ने मरहम लगाया है, किसी ने कुछ नया आविष्कार किया है लेकिन कहीं न कहीं दुनिया पर इनका असर हुआ है- अच्छा या बुरा.
अमित शाह भी शामिल

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पत्रिका के संपादक डेविड रॉथकॉफ़ का कहना है कि हर साल इस "ग्लोबल थिंकर्स" या विचारकों की लिस्ट के ज़रिए उनकी कोशिश होती है उन लोगों पर नज़र डालने की जिनकी सोच ने लाखों लोगों की ज़िंदगी पर असर डाला है.
उनका कहना है, "ये एक मंच है ग़ौर करने के लिए कि कौन या क्या है जो दुनिया को बदल रहा है और इसके कारण भविष्य का चेहरा कैसा होगा."
नरेंद्र मोदी के बारे में पत्रिका ने लिखा है कि उन्होंने अपनी जीत के बाद नारा दिया कि ये भारत की जीत है, अच्छे दिन आनेवाले हैं. लेकिन उनकी कुछ नीतियों को देखते हुए ये देखना होगा कि "उनकी बात कहां तक सही उतरती है".

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इसी लिस्ट में अमित शाह का भी नाम है. पत्रिका ने उनकी विवादास्पद पृष्ठभूमि की बात की है और साथ ही उन्हें मोदी की जीत का सूत्रधार कहते हुए तुलना जॉर्ज बुश के विवादास्पद सलाहकार कार्ल रोव से की है.
ग्रामीणों की आवाज़
बीबीसी के पत्रकार रह चुके शुभ्रांशु चौधरी को इस पत्रिका ने ग्रामीण भारतीयों को आवाज़ देने की कोशिश के तहत इस लिस्ट में शामिल किया है.
पत्रिका का कहना है कि छत्तीसगढ़ से बीबीसी के लिए रिपोर्टिंग करते हुए शुभ्रांशु चौधरी को एहसास हुआ कि वहां के आम लोग किसी विचारधारा के पीछे नहीं भाग रहे, वो अपनी आवाज़ दूर तक पहुंचाना चाहते हैं जिससे उन्हें गंभीरता से लिया जा सके.
और इसके लिए चौधरी ने सीजीनेट स्वर के नाम से एक मोबाइल ऑडियो पोर्टल की शुरूआत की. इस पर आम आदमी ख़बरों से तो जुड़ सकता ही है वो अपनी बात भी उस पर आसानी से रख सकता है.

उनका कहना है, "इस तरह के पुरस्कार हमारे काम को सामने लाने में मदद करते हैं. इससे शहरों में हमारी तरफ़ लोगों का ध्यान जाता है और ये काफ़ी अहम है क्योंकि हम शहरी और ग्रामीण कार्यकर्ताओं को भी जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं."
ग़ौरतलब है कि शुभ्रांशु चौधरी को मार्च में गूगल डिजिटल ऐक्टिविज़म अवार्ड भी मिला था और वो भी तब जबकि उनका मुकाबला दुनिया भर में शोहरत पानेवाले एडवर्ड स्नोडेन से था जिन्होंने अमरीकी दस्तावेज़ विकीलीक्स के ज़रिए लीक करके हंगामा मचा दिया था.
इस पूरी लिस्ट में भारत या भारतीय मूल के कम से कम दस लोग शामिल हैं.
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