स्वच्छता: मिशन अच्छा, नज़रिया भ्रामक

झाड़ू लगाते मोदी

थाईलैंड में भी भारत की तरह कई कारों में डैशबोर्ड पर अच्छी क़िस्मत के लिए भगवान की एक छोटी प्रतिमा होती है.

लेकिन भारत में जहाँ इस प्रतिमा का चेहरा कार में बैठे लोगों की तरफ़ होता है, वहीं थाईलैंड में प्रतिमा का मुंह सड़क की ओर होता है.

इसकी वजह एकदम सरल है और वह है हमारा नज़रिया- 'हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम सुरक्षित हैं', जबकि थाई लोगों का नज़रिया है- 'भगवान की नज़र सड़क की तरफ़ रहे ताकि वहां किसी को चोट न लगे.'

आकार पटेल का विश्लेषण

थाईलैंड एक साफ़ सुथरा देश है. हालाँकि उनका देश अपेक्षाकृत ग़रीब है, और लगभग भारत की तरह ग़रीब है, लेकिन वहाँ के सार्वजनिक स्थल साफ़ सुथरे हैं. उनके सार्वजनिक शौचालय अधिक स्वच्छ और बेदाग हैं और ज़्यादातर यूरोपीय देशों से बेहतर स्थिति में हैं.

सफाई करता एक कर्मचारी

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इमेज कैप्शन, नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता अभियान के दौरान लोगों को सफ़ाई करने का संकल्प भी दिलाया था

बैंकॉक की गलियों का दिल्ली, मुंबई, ढाका, लाहौर या कराची की गलियों से कोई मुक़ाबला नहीं है. हम विकासशील देश हैं (जहाँ सिर्फ़ आर्थिक हालात नहीं, बल्कि सभ्यता और संस्कृति को भी विकसित किया जाना है).

थाईलैंड बौद्ध धर्म की हीनयान शाखा का अनुयायी है, जिसे थेरवाद भी कहा जाता है.

श्रीलंका, वियतनाम, कंबोडिया, बर्मा जैसे कई और देश भी हैं जो थेरवाद के अनुयायी हैं, लेकिन वे अलग मार्ग पर चल रहे हैं.

स्वच्छता अभियान

शौचालय

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जो मुद्दा मैं उठाना चाहता हूं वह यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे अच्छे क़दमों से भी 'स्वच्छ भारत' अभियान है.

इसी हफ़्ते मुलायम सिंह की एक बहू के बयान को लेकर ख़ासा विवाद हुआ. उन्होंने मोदी के भारत को स्वच्छ बनाने के नज़रिए की तुलना गांधीजी से कर डाली.

मैं उनसे सहमत हूं और मानता हूं कि प्रधानमंत्री गांधी जैसा एक काम कर रहे हैं. वास्तव में गांधीजी भी मोदी की इस पहल का स्वागत करते.

स्वच्छता का विचार

कूड़ा उठाते मोदी

यह भी सच है कि मोदी के दिमाग में ये विचार नया नहीं है.

जब मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सबसे असरदार नेता एमएस गोलवलकर की जीवनी लिखी तो उन्होंने उसमे एक क़िस्सा जोड़ा:

"एक बार जब गुरुजी (गोलवलकर) आंध्र प्रदेश के दौरे पर थे. उनकी ट्रेन सुबह साढ़े चार बजे पहुंचनी थी. वहां ट्रेन को लगभग 45 मिनट रुकना था. स्वयंसेवकों की योजना थी कि गुरुजी इस दौरान रेल के शौचालय का प्रयोग कर लें. क्योंकि उन्हें अभी 100 मील का सफर और तय करना था, लिहाजा स्वयंसेवकों की उनके लिए थर्मस में चाय लाने की भी योजना थी."

संघ के शिविर में मोदी

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"रात में, गुरुजी ने वरिष्ठ स्वयंसेवक बापूराव मोघे से अगले दिन का कार्यक्रम पूछा. उन्होंने कार्यक्रमों पर ग़ौर किया और बापूराव से पूछा, क्या आपने कभी रेलगाड़ी के शौचालय में छोटा सा नोटिस देखा है? बापूराव ने जवाब दिया, हां. गुरुजी ने कहा: इस पर लिखा होता है कि स्टेशन पर रेलगाड़ी के रुके होने के दौरान शौचालय का इस्तेमाल न करें. मैं हमेशा नियमों का पालन करता हूं."

मोदी लिखते हैं, "जरा सोचिए, रेलगाड़ियों में कितने लाख लोग यात्रा करते हैं और इस नोटिस को पढ़ते हैं. और कितने वास्तव में इसका पालन करते हैं?"

सफाई का संकल्प

<link type="page"><caption> स्वच्छ भारत अभियान</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/10/141002_modi_valmiki_colony_tk" platform="highweb"/></link> की शुरुआत करते हुए उन्होंने एक प्रतिज्ञा ली और दूसरों को भी इसे लेने के लिए प्रेरित किया:

फ़ाइल फोटो

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"मैं शपथ लेता हूँ कि मैं स्वच्छता के प्रति सजग रहूंगा और इसके लिए समय दूंगा. हर वर्ष 100 घंटे यानी हर सप्ताह दो घंटे श्रमदान करके स्वच्छता के लिए काम करूंगा. मैं न गंदगी करूंगा, न किसी और को करने दूंगा. सबसे पहले मैं स्वयं से, मेरे परिवार से, मेरे मुहल्ले से, मेरे गांव से और मेरे कार्यस्थल से इसकी शुरुआत करूंगा."

"मैं यह मानता हूं कि दुनिया के जो भी देश स्वच्छ दिखते हैं, उसका कारण यह है कि वहाँ के नागरिक गंदगी नहीं करते और न ही होने देते हैं. इस दृढ़ विश्वास के साथ मैं गांवों और शहरों में स्वच्छ भारत मिशन का प्रचार करूंगा."

शौचालय

"मैं आज जो शपथ ले रहा हूं, वह अन्य 100 व्यक्तियों को लेने के लिए प्रेरित करूंगा. वे भी मेरी तरह स्वच्छता के लिए 100 घंटे दें, इसके लिए प्रयास करूंगा."

"मुझे विश्वास है कि स्वच्छता के लिए बढ़ाया गया मेरा क़दम मेरे देश को स्वच्छ बनाने में मदद करेगा."

इस अभियान का मुख्य आकर्षण अन्य लोगों को सफाई की प्रतिज्ञा दिलाना (मोदी ने कई सैलेब्रेटीज़ को नामांकित किया) और फिर सार्वजनिक स्थान की सफाई में कुछ समय बिताना था.

भारत को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार के पास एक लंबी सूची भी है और इसका विवरण शहरी विकास मंत्रालय की <link type="page"><caption> वेबसाइट</caption><url href="http://moud.gov.in/" platform="highweb"/></link> पर है.

नज़रिये का फर्क़

बेकार भोजन

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मोदी के इस दृष्टिकोण पर मेरा छोटा सा विरोध है. यह बिल्कुल सही हैं कि लोग अपनी गलती स्वीकार करें, लेकिन सार्वजनिक स्थलों पर सफाई पर ध्यान केंद्रित करना ग़लत है. ज़ोर व्यक्तिगत गंदगी पर हो और यह सुनिश्चित हो कि ऐसा नहीं हो, लेकिन यह संस्कारों से जुड़ा पहलू है.

सार्वजनिक स्थानों पर झाड़ू उठाए हुए लोगों की तस्वीरों का संदेश है- "वह दूसरे लोग हैं, जो भारत को गंदा कर रहे हैं" और, फिर यह विश्वास दिलाना, "इसलिए मुझे सार्वजनिक स्थलों को साफ रखने में मदद करनी चाहिए."

हमें इस प्रक्रिया को उलटना होगा. इस वक़्त, प्रतिमा का मुंह हमारी तरफ होना चाहिए, सड़क की तरफ नहीं.

हमें सुनिश्चित करना चाहिए कि हम गंदगी न फैलाएं, चाहे दूसरे कुछ भी करें. अगर ऐसा होता है, तो मोदी का बेहतरीन क़दम ज़्यादा सफल होगा.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>