लंबे अर्से बाद चीन-जापान में वार्ता

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क्षेत्रीय मुद्दे पर क़रीब दो साल से अधिक समय तक तनातनी के बाद चीन और जापान के बीच औपचारिक वार्ता पटरी पर लौटती दिख रही है.
जापान के अधिकारियों के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने बीजिंग में हो रहे एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग यानी एपेक सम्मेलन से इतर एक दूसरे से मुलाक़ात की.
पूर्वी चीन सागर में एक द्वीप को लेकर दोनों देशों के संबंधों में खटास आ गई थी.
दोनों नेताओं के सत्ता में आने के बाद उनकी यह पहली मुलाक़त है.
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह द्वीप जापान के क़ब्जे में है. चीन इसे दियावयू कहता है, जबकि जापान इसे सेनकाकू कहता है.
सितंबर 2012 में जापान सरकार ने एक निजी जापानी मालिक से इनमें से तीन द्वीपों को ख़रीद लिया था, तभी से यह विवाद उपजा.
चीन ने इस पर आपत्ति जताई थी और कहा था कि युद्ध के दौरान की गई अपनी ग़लतियों को सुधारने में जापान विफल रहा.
ओबामा और पुतिन

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चीन की राजधानी में एपेक के 21 सदस्य देशों के नेता दो दिवसीय बातचीत के लिए इकट्ठा हुए हैं.
शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता सोमवार को होगी. मंगलवार को नेताओं की बैठक होगी.
इस सम्मेलन के ज़रिए चीन क्षेत्रीय नेता और आर्थिक महाशक्ति के अपने दर्जे को स्थापित करने के रूप में देखता है.
मार्च 2013 में राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग के कार्यकाल में चीन में होने वाला यह सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन है.
इस सम्मेलन को अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी संबोधित करेंगे.
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