भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ नेटवर्क पर सहमति

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एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग सगंठन यानी एपेक के सदस्य देशों ने भ्रष्टाचार के मामलों में जानकारी साझा करने के लिए एक नेटवर्क बनाने पर सहमति जताई है.
एपेक के सदस्यों ने एक बयान में बताया कि इस समझौते का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को सुरक्षित पनाहगाह न मिले.
अगले सप्ताह एपेक शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहे चीन ने इस समझौते का प्रस्ताव रखा है.
अमरीका, जापान, दक्षिण कोरिया सहित 21 देशों का दो दिनों का शिखर सम्मेलन 10 और 11 नवंबर को बीजिंग में होगा.
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि सदस्य देश विदेशों में जमा काले धन की वापसी के लिए भी आपसी सहयोग बढ़ाएंगे.
फॉक्स हंट
वांग यी ने कहा, "इस साल एपेक ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए सहयोग बढ़ाया है. एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भ्रष्टाचार रोकने और अवैध धन और भगोड़ों को पकड़ने में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए क़ानूनी नेटवर्क तैयार किया है."
अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने इसे एक महत्वपूर्ण क़दम बताया है.
केरी ने कहा, "भ्रष्टाचार न सिर्फ़ अनुचित तरीक़े पैदा करता है और आर्थिक रिश्ते ख़राब करता है बल्कि इससे व्यवस्था पर से लोगों का भरोसा भी उठ जाता है."

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चीन ने देश छोड़कर भागे भ्रष्ट अधिकारियों की धरपकड़ के लिए ऑपरेशन फॉक्स हंट शुरू किया है.
प्रत्यर्पण का संकट
चीन में इस साल के शुरुआती नौ महीनों के दौरान 13 हज़ार से अधिक अधिकारी भ्रष्टाचार और घूसख़ोरी के दोषी पाए गए.
संवाददाताओं का मानना है कि मानवाधिकारों को लेकर चीन के ख़राब रिकॉर्ड के कारण भ्रष्ट लोगों के प्रत्यर्पण में मुश्किलें आ सकती हैं.
एपेक के इस नए क़दम को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम के हिस्से के रूप में भी देखा जा रहा है.
राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद चीन में पहली बार अंतरराष्ट्रीय नेता मिल रहे हैं.
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